ओणम विकिपीडिया 2017 | ओणम की कहानी पूजा विधि | ओणम का त्योंहार | ओणम के पकवान | ओणम पर निबंध

ओणम विकिपीडिया : ओणम केरल का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह सितम्बर के महीन में मनाया जाता है। इस बार ओणम का त्योंहार 3 सितम्बर को हैं | यह उत्सव तमिलनाडु और केरल मैं दस दिनों तक चलता हैं | इस दिन सुन्दर फूलों से घरों को सजाया जाता है। महिलाओ और बालिकाओं द्वारा इस दिन नाच गान किया जाता हैं | हैं और पुरूष तैरने और नौका-दौड़ में सम्मिलित होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन इनके राजा महाबली इन्हें आशीर्वाद देने पाताल लोक से आते हैं। यह प्राचीन राजा महाबली के याद में मनाया जाता है। यह पर्व दस दिनों तक चलाता है, इन दस दिनों में घरों में फूलों की रंगोली बनाई जाती है।

ओणम का त्योंहार 2017 :

ओणम का त्यौहार मलयालम कैलेंडर के अनुसार चिंगम महीने में मनाया जाता है | यह मलयालम कैलेंडर का पहला महिना होता है, जो ज्यादातर अगस्त-सितम्बर महीने के समय में ही आता है| दुसरे सोलर कैलेंडर के अनुसार इसे महीने को सिम्हा महिना भी कहते है, जबकि तमिल कैलेंडर के अनुसार इसे अवनी माह कहा जाता है| जब थिरुवोनम नक्षत्र चिंगम महीने में आता है, उस दिन ओणम का त्यौहार मनाया जाता है | थिरुवोनम नक्षत्र को हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रवना कहते है| इस बार सन 2017 में ओणम 25 अगस्त दिन शुक्रवार से मनाना सुरु होगा | 10 दिन के ओणम त्यौहार में थिरुवोनम दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है, जो 6 सितम्बर 2017, दिन बुधवार को ख़त्म हो जायेगा |

ओणम त्यौहार की कहानी एवं पूजा विधि |

भारत में सभी धर्मों के अपने अपने त्यौहार है, कुछ त्यौहार तो देश के हर कोने में मनाते है, तो कुछ किसी विशेष क्षेत्र या राज्य में मनाये जाते है| भारत के मुख्य त्योहारों की बात करे, तो दीवाली, होली, ईद, बैसाखी, क्रिसमस, दुर्गा पूजा आदि है| दीवाली की बात की जाये तो ये देश का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है, मुख्यरूप से उत्तरी भारत का तो ये बहुत बड़ा त्यौहार है, इसी तरह कलकत्ता में दुर्गा पूजा, पंजाब में बैसाखी मुख्य है| किसी राज्य विशेष के त्योहारों की बात करें, तो दक्षिण भारत के केरल में ओणम त्यौहार उत्तरी भारत के दीवाली जितना ही महत्वपूर्ण है| ओणम को मुख्य रूप से केरल राज्य में मनाया जाता है, जहाँ इसे बड़ी ही धूमधाम से हिन्दू धर्म के द्वारा मनाया जाता है|

Farmer Festival Onam

ओणम एक मलयाली त्यौहार है, जो किसानों का फेस्टिवल है, लेकिन सभी लोग ही वहां इसे मनाते है | इस त्यौहार की प्रसिद्धता को देखते हुए, 1961 में इसे केरल का नेशनल फेस्टिवल घोषित कर दिया गया| ओणम का त्यौहार समस्त केरल में 10 दिनों तक मनाया जाता है | जिससे ओणम त्यौहार के समय अधिक से अधिक पर्यटक केरल आ सकें| इसका असर देखा भी जा सकता है, भगवान् का देश कहा जाने केरल को देखने के लिए, ओणम के दौरान सबसे अधिक लोग जाते है

ओणम के पकवान :

ओणम में मलयाली लोग खास तरह के पकवानों से थाली सजाते हैं| उनकी थाली केले के पत्ते की होती है जिसे ओणम साध्य के नाम से भी जाना जाता है| इस साध्य में एक से एक लजीज डिशेज होती हैं जो इस त्योहार को और भी खास बनाती हैं| और ओणम का त्योहार एक तरह से खाने का ही फेस्टिवल हो जाता है| तो आइए जानते हैं उन लजीज डिशेज के बारे में जो ओणम साध्य को बनाती हैं खास- सूजी का हलवा,कोकोनट खोया गुलकंद लड्डू,शाही कस्टर्ड,मोहन भोग, आदि स्वादिष्ट भोजन बनाया जाता हैं |

ओणम त्यौहार का महत्व

ओणम एक प्राचीन त्योहार है, जो अभी भी आधुनिक समय में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है| ओणम के साथ साथ चिंगम महीने में केरल में चावल की फसल का त्योहार और वर्षा के फूल का त्योहार मनाया जाता है| ओणम त्यौहार की कहानी असुर राजा महाबली एवं भगवान् विष्णु से जुड़ी हुई है| लोगों का मानना है कि ओणम त्यौहार के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने, उनके हाल चाल, खुशहाली जानने के लिए हर साल केरल राज्य में आते है| राजा महाबली के सम्मान में यह त्यौहार यहाँ मनाया जाता है|

ओणम पर निबंध

भारत र्त्योहारो का देश हैं | भारत के विभिन्न भागो मैं भिन्न भिन्न प्रकार की भाषाएँ बोली जाती हैं | और उसी के अनुसार पुरे भारत मैं भिन्न भिन्न प्रकार के त्योंहारों का आयोजन भी किया जाता हैं | जिस प्रकार कलकत्ता में दुर्गा पूजा, पंजाब में बैसाखी मुख्य है| उसी प्रकार दक्षिण भारत के केरल में ओणम त्यौहार उत्तरी भारत के दीवाली जितना ही महत्वपूर्ण है|

ओणम पर निबंध : ओणम के त्योंहार पर हम कुछ निबंधात्मक वाक्य लिख रहे हैं इसमें हम ओणम की सम्पूर्ण कथा के बारे में आपको बताने जा रहे हैं |

महाबलि नाम के एक राजा केरल में राज्य करते थे । वह एक आदर्श राजा थे । उनके राज में प्रजा सुखी थी । वह प्रजा से बहुत प्यार करते थे । वह न्यायप्रिय थे । उनके लिए सब बराबर थे । छोटे-बड़े का कोई भेदभाव नहीं था । सब जगह सुख और समृद्धि थी । महाबलि बहुत दानी थे । प्रजा उनकी प्रशंसक ही नहीं भक्त भी थी । प्रजा उन्हें भगवान मानती और उनकी पूजा करती थी । देवताओं से उनकी लोकप्रियता देखी न गई ।

एक षड्‌यंत्र रचा गया । राजा इन्द्र के अनुरोध पर विष्णु ने वामन अवतार लिया । वह ब्राह्मण का भेष बनाकर राजा बलि के पास आए । तपस्या करने के लिए राजा से तीन पग भूमि दान में माँगी । राजा बलि तो पहले ही से दानी और विशाल हृदय के थे ।

एक ब्राह्मण तपस्या के लिए भूमि माँगे और वह न दें यह कैसे हो सकता था । अत: राजा बलि ने बिना सोचे-समझे उस ब्राह्मण को जहाँ से वह चाहे, तीन पग भूमि दान लेने की अनुमति दे दी । उधर ब्राह्मण के रूप में स्वयं विष्णु भगवान थे । उन्होंने विराट रूप धारण कर लिया ।

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एक पग में भू-लोक तथा दूसरे पग में स्वर्ग-लोक नाप लिया । तीसरे पग के लिए भूमि कम पड़ गई । राजा महाबलि अपने वचन के पक्के थे । कुछ तो करना ही था, तीसरा पग नापने के लिए राजा बलि ने अपना सिर विष्णु के सम्मुख कर दिया ।

अब विष्णु ने बलि से सब कुछ प्राप्त कर लिया । अत: विष्णु ने बलि को पाताल लोक में रहने की आज्ञा सुनाई । किन्तु पाताल लोक में प्रस्थान से पूर्व बलि को एक वर माँगने की अनुमति भी दी गई । राजा बलि अपनी प्रजा को बहुत चाहते थे । अत: उन्होंने वरदान माँगा कि, उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा के सुख- दु:ख को देखने का अवसर दिया जाए । महाबलि की प्रार्थना स्वीकृत हुई ।

अत: कहते हैं कि हर वर्ष श्रवण नक्षत्र में राजा बली अपनी प्रजा को देखने आते हैं । श्रवण नक्षत्र से मलयालम भाषा में ‘ ओणम ‘ नक्षत्र कहते हैं । उस दिन वहाँ की प्रजा बहुत श्रद्धा से अपने प्रिय राजा की प्रतीक्षा करती है । उस दिन सुख और समृद्धि का ऐसा वातावरण प्रस्तुत किया जाता है जिससे राजा महाबलि को यह प्रमाण मिले यहाँ की प्रजा सुखी और प्रसन्न है । ओणम के अवसर पर धरती को सजाया जाता है । रंगोली के द्वारा धरती माँ का श्रुंगार होता है ।

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रंगोली से सजी धरती पर विष्णु तथा राजा बलि की प्रतिमाएँ स्थापित की जाती है । ओणम के अवसर पर विष्णु के साथ – साथ महाबलि की पूजा भी होती है । बच्चे-जवान, तथा वुढ़े सभी इस दिन की बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं । नए-नए वस्त्र सिलवाए जाते हैं । गीत, संगीत तथा विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन क्रिया जाता है । मंदिरों में उत्सव होते हैं । ओणम के अवसर पर नाव दौड़ तथा हाथियों का जुलूस लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं ।

राजा महाबलि लोगों के आदर्श थे । वह दानी थे । अत: ओणम के अवसर पर धनी लोग निर्धन लोगों को खुलकर दान देले हैं । ओणम के दिन लोक नृत्य भी होते हैं । कत्थकली नृत्य केरल का लोकप्रिय नृत्य है । युवतियाँ सफेद साड़ियाँ पहनती हैं और बालों पर फूलों की वेणियाँ सजाकर नाचती है । ओणम का त्यौहार सभी धर्मो के लोगों द्वारा परस्पर प्रेम और सौहार्द्र से मनाया जाता है ।

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