करवा चौथ व्रत पूजन विधि 2018 कथा चन्द्रमा के उदय होने का सही समय और अर्घ्य टाइम

Latest Update News for Karva Chauth Moon Rise Time : Karwa Chauth the Puja Muhurat starts at 05:44 PM and ends at 07:01 PM. The moon will rise on Karva Chauth at 08:08 PM. The Chauth Tithi on Karwa Chauth begins on the 27 October at 06:37 PM and the Chaturthi Tithi ends on the 28th of October at 04:54 PM.

Happy Karva Chauth

 


Karva Chauth Mooon Rising Time at 27 October 2018

सभी माता बहनों से निवेदन हैं की करवा चौथ में चन्द्रोदय का मुहूर्त और समय अलग -अलग शहरोँ का अलग -अलग होगा | निचे लिखे समय के अनुसार ही करवा चौथ के दिन चन्द्रमा उदय होगा | इसलिय आप अपनी तश्ल्ली के लिए टाइम को नोट कर ले ,धन्यवाद आपको करवा चौथ की ढेर सारी शुभकामनाएं और आपके पति की लम्बी आयु हो, यही हमारी कामना हैं |

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करवा चौथ चन्द्रोदय समय और अर्घ्य टाइम

निचे दिए गये समय के अनुसार ही चन्द्रमा उदय होगा और चन्द्रमा दीखते ही सभी सुहागीन महिलाओं को अर्घ्य देना हैं

  • चंडीगढ़ में रात 8:46 pm
  • जयपुर में रात 8:27 pm
  • जोधपुर में रात 9:10 pm
  • मुंबई में रात 9:22 pm
  • बंगलुरु में रात 9:12 pm
  • हैदराबाद में 9:22 pm
  • देहरादून में रात 8:44 pm
  • पटियाला,लुधियाना रात 8:50 pm
  • पटना में रात 8:46 pm
  • लखनऊ, वाराणसी में रात 8:37 pm
  • कोलकाता में रात 8:13 pm

करवा चौथ व्रत पूजन विधि|Karva Chauth ki Katha { कहानी }

Happy karwa chauth

 

स्त्रियां इस व्रत को पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं। यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है, लेकिन इन मान्यताओं में थोड़ा-बहुत अंतर होता है। सार तो सभी का एक होता है अपने पति की दीर्घायु की कामना ।


  • करवा चौथ व्रत पूजन विधि :-

karwa chauth pooja vrat Vidhi

 

  1. करवा चौथ की आवश्यक संपूर्ण पूजन सामग्री को एकत्र करें।
  2. व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि
  3. सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’
  4. पूरे दिन निर्जला रहें।
  5. दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है।
  6. आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं।
  7. पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं।
  8. गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें।
  9. जल से भरा हुआ लोटा रखें।
  10. वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें।
  11. रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।
  12. गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें।
  13. नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥’
  14. करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।
  15. कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।
  16. तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें।
  17. रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
  18. इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।

Karva Chauth ki Katha | चौथ माता की कहानी 1,2,3

Karva Chauth ki kahani in hindi

 

करवा चौथ की कहानी 2018  – शादी शुदा महिलाएं अपने जीवन में सुख मंगल और अपने पति की लम्बी आयु की कामना के लिए सुहागन स्त्रियों द्वारा करवाचौथ का व्रत रखा जाता है | करवा चौथ की कहानी में लोगों के विशवास और धारणा को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न भिन्न विशवास है | मुख्य रूप से सात भाई और बहिन, कृष्ण द्रोपदी, सत्यवान-सावित्री और करवा नामक स्त्री की कथाओं को सर्वमान्य माना जाता है | इस दिन प्रत्येक पतिव्रता स्त्री अपने पति के लिए व्रत रखती है | पूजा मुहूर्त के अनुसार उन्हें करवा चौथ कहानी का पाठ करना चाहिए जिससे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है | करवा चौथ की कथा इस प्रकार है –


1. करवा चौथ कहानी | कृष्ण द्रोपदी

 

एक समय की बात है जब निलगिरी पर्वत पर पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने गये. उस समय पाडवों पर गहरा संकट आ पड़ा. तब चिंतित व शोककुल द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया. कृष्ण के दर्शन होने पर द्रोपदी ने पांड्वो के कष्ट के निवारण के उपाय जाने |तब श्री कृष्ण बोले- हे द्रोपदी में तुम्हारे दुःख का कारण जानता हु. इसके निवारण के लिए तुम्हे एक उपाय करना होगा. जल्द ही कार्तिक महीने की कृष्ण चतुर्थी आने वाली है. उस दिन तुम मन से करवा चौथ का व्रत करना, भगवान शिव पार्वती और गणेश की उपासना करना. तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएगे और सब कुछ ठीक हो जाएगा.कृष्ण की आज्ञा के अनुसार द्रोपदी ने वैसा ही किया. जल्द ही उनकी सारी इच्छाए पूर्ण हुई तथा उनके पति के दर्शन हो गये | जय हो चौथ माता की 


2. करवा चौथ कहानी | भगवान् शिव ,पार्वती

 

जब पार्वती ने भगवान् शिव से अपने पति की दीर्घायु और सुख सम्रद्धि की विधि पूछी तो तब भगवान् शिव ने करवा चौथ की व्रत कथा सुनाई.करवा चौथ व्रत कथा के अनुसार एक धोबिन अपने पति के साथ तुगभद्रा नदी के तट पर रहा करती थी. उसका पति बुढा व् निर्बल था.

एक दिन जब वह नदी के किनारे कपड़े धो रहा था तो वहां पर एक मगरमच्छ आया और धोबी के पैरो को अपने मुह में दबाकर यमलोक की ओर ले जाने लगा. तब धोबी को कुछ नही सुझा वह करवा करवा चिल्लाने लगा.जब उसकी पत्नी करवा ने अपने पति की आवाज सुनी तो वह नदी की ओर गई तथा उस मगरमच्छ को सूत के धागे से बांधकर यमराज के सामने ले जाकर कहने लगी.यमराज आप ही मेरे पति की रक्षा कीजिए तथा इस मगर को इस कृत्य के लिए कठिन से कठिन सजा दीजिए.
तथा इसे नरक पंहुचा दीजिए.

यमराज बोले करवा अभी तक इसकी आयु पूर्ण नही हुई है, इससे पूर्व में इसे नही मार सकता. तब करवा ने कहा यदि आप मेरे पति की रक्षा करने के लिए ऐसा नही करेगे तो मै आपकों श्राप दे दुगी.इस तरह करवा के साहस को देखकर यमराज ने डर से उस मगर को यमलोक भेज दिया तथा करवा के पति को दीर्घायु होने का आशीर्वाद दे दिया. तब से कार्तिक कृष्ण माह की चतुर्थी को करवा चौथ मनाने का चलन शुरू हुआ.


3. करवा चौथ कहानी |सात भाईयो और एक बहन करवा की 

 

प्राचीन समय में काशी में एक ब्राह्मण परिवार रहा करता था. उस परिवार में सात भाई और एक बहिन थी. सात भाइयो की एक बहिन होने के कारण सभी लोग उन्हें अपने दिल का टुकड़ा मानते थे. बहिन रूपा की शादी के बाद वह ससुराल चली गई. कुछ दिन तक वह ससुराल में रहने के बाद अपने मायके लौटी थी.सभी भाई और उनकी पत्नियां घर पर थी. इधर उधर का हालचाल जानने के बाद उन्होंने रूपा को खाने के लिए कहा मगर उन्होंने करवा चौथ का निर्जला व्रत का कहकर खाने के लिए मना कर दिया.

दिन ढलने के साथ ही सभी भाई अपनी बहिन की उतरी दशा देखकर चिंतित थे. वह किसी भी हालत में करवा चौथ का व्रत चाँद के दर्शन के पूर्व नही तोड़ सकती थी. अतः उनके सबसे छोटे भाई को एक तकरीब सूझी और वह घर से थोड़ी ही दूर खड़े एक घने वृक्ष पर दीपक रखकर उसके उपर छलनी रख आया. घर आकर उन्होंने रूपा को चन्द्र दर्शन का झांसा देकर उपवास तोड़ने को कहा. जब रूप ने छत पर जाकर देखा तो छलनी के पार वह दीपक चाँद सा नजर आ रहा था. उन्हें इस झांसे का पता नही था. अतः उन्होंने भोजन करने की हामी भर दी.जब वह भोजन करने बैठी तो उनके पहले निवाले के खाते ही उनके छिक आई.

जब वह अगला निवाला मुह में डालती है तो सिर का बाल आ जाता है. जब उसने तीसरा निवाला मुह में डाला ही था कि उन्हें अपने पति की मृत्यु का संदेश आ जाता है. जिसके सुनते ही वह पागलों की तरह रोने लगती है. तभी उनकी छोटी भाभी उन्हें इस अनहोनी का कारण समझाते हुए कहती है,आपने करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से तोडा है इस कारण गणेश जी आपसे नाराज हो गये है.

अपनी भूल का अहसास होने पर वह अपने पति का अंतिम संस्कार न करने का निर्णय ले लेती है. उस मृत शव की रोजाना कड़ी निगरानी रखती है. उसके पास उगने वाले सुई नुमा घास को इकट्ठा करती है. जब कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी (करवा चौथ) का दिन आता है. इस दिन सभी भाभिया अपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखती है.तथा आशीर्वाद लेने के लिए रूपा के पास जाती है. रूपा एक ही रट लगाए जा रही थी.

यम सुई ले लो पिय सुई दे दो. मगर सभी बड़ी भाभिया उनका तिरस्कार कर चली जाती है. अंत में सबसे छोटी भाभी उनके पास आशीर्वाद लेने आती है. जिनके कारण रूपा के पति की मृत्यु हुई थी. वह वही प्रक्रिया अपनाती है.

इस बार रूपा छोटी भाभी को जोर से पकड़ लेती है तथा पिय सुई देने का आग्रह करती है. हजारों प्रयत्न के बाद भी वह रूपा को दूर नही कर पाती है. इतने यत्न के बाद छोटी भाभी का दिल भी पसीज जाता है. तथा वह अपनी छोटी अंगुली को छिरकर रूपा के पति के मुह में अमृत की धार डालती है.

जिससे उसका पति जय श्री गणेश जय श्री गणेश करता हुआ खड़ा होता है. इस प्रकार छोटी भाभी की दया से रूपा को अपना पति मिल जाता है. हे शिव पार्वती गणेश जिस प्रकार रूपा को करवा चौथ का वर मिला है. ऐसा वर हर सौभाग्यवती स्त्री को प्राप्त हो | करवा चौथ माता का बहुत बहुत धन्यवाद की मुझे मेरा पति वापस मिल गया | जय हो माता चौथ की ,जय हो |

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