क्यों कैसे मानते है दशहरा विजयदशमी मानाने का कारण व शुभ मुहर्त

Dussehra 2017 : दशहरा या विजयदशमी जो हिन्दू पंचांग के अनुसार आशिवन माह की शुक्ल पक्ष के दसवे दिन मनाया जाता है | दशहरा हिन्दुओ का प्रसिद्ध त्यौहार है | जो एक अच्छाई की बुराई पर जीत की ख़ुशी में मनाया जाता है | यह त्यौहार इस लिए भी मनाया जाता है क्यों की इस दिन भगवान राम ने रावण को मारा था | दशहरा शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द दस -हर से हुई है जिसक अर्थ दस बुराइयों से छुटकारा पाना है |दशहरा पर्व भगवान श्रीराम का अपनी पत्नी यानि माता सीता को रावण के चुगल से छुड़ाकर व रावण का वध करने के उपलक्ष्य में तथा अच्छाई की बुराई पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है |

dussehra 2017

दशहरा या विजयदशमी कब है dussehra 2017 Date Subh Muhrat

दशहरा या विजयदशमी वर्ष 2017 में आशिवन माह की शुक्ल पक्ष के दसवे दिन यानि दिंनाक 30 सितम्बर 2017 को सम्पूर्ण भारत में मनाया जायेगा | इस विजयदशमी पर विजय मुहूर्त दोपहर – 14:08 से 14:55 मिनट तक का है। अपराह्न पूजा समय- 13:21 से 15:42 तक उचित रहेगी |

  • दशमी तिथि आरंभ – 23:49 (29 सितंबर )
  • दशमी तिथि समाप्त – 01:35 (01 अक्टूबर )

दशहरा पर मैले का आयोजन

vijayadashami 2017

दशहरा भारत के अलावा श्रीलंका ,भूटान ,नेपाल के लाखो लोगो द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार है | इस त्यौहार को अलग अलग जगह पर अलग अलग नामो से जाना जाता है | कही “दुशहेरा” तो कही “दुशे “के नाम से जाना जाता है | मेले का आयोजन खुले स्थान पर होता है | पौराणिक श्रीलंका में रावण के बड़े बड़े पुतलो का प्रदर्शन किया जाता है | और बाद में इन पुतलो को बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ दहन किया जाता है |

नवरात्रि का त्यौहार और दशवें दिन विजयादशमी मानाने का कारण

पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की भगवान राम के समय से यह दिन विजय प्रस्थान का प्रतीक है | बताया गया है की भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध हेतु इसी दिन प्रस्तान किया था | शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन प्रस्थान करके हिन्दू धर्म की रक्षा की थी | इस तरह के अनेक उदहारण है जो आपको बताएँगे की विजय दसमी क्यों श्रेष्ठ है |

नवरात्रि पूजा

इस पर्व को भगवती के विजय पर्व या विजयदशमी नाम पड़ा था | और इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास काटकर व रावण का वध कर अयोध्या नगरी में लोटे थे | इसलिए भी इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है | शास्त्रों में ऐसा माना जाता है की आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को तारा उदय होता है | उस समय विजय नामक मुहर्त होता है | यह समय सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है | इसलिए भी इसे विजयदशमी कहते है |

भारत का प्रसिद्ध दशहरा मेला

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हिमाचल प्रदेश में कुल्लू का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है। अन्य स्थानों की ही भाँति यहाँ भी दस दिन अथवा एक सप्ताह पूर्व इस पर्व की तैयारी आरंभ हो जाती है। स्त्रियाँ और पुरुष सभी सुंदर वस्त्रों से सज्जित होकर तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े, बाँसुरी आदि-आदि जिसके पास जो वाद्य होता है, उसे लेकर बाहर निकलते हैं। पहाड़ी लोग अपने ग्रामीण देवता का धूम धाम से जुलूस निकाल कर पूजन करते हैं। देवताओं की मूर्तियों को बहुत ही आकर्षक पालकी में सुंदर ढंग से सजाया जाता है। साथ ही वे अपने मुख्य देवता रघुनाथ जी की भी पूजा करते हैं। इस जुलूस में प्रशिक्षित नर्तक नटी नृत्य करते हैं। इस प्रकार जुलूस बनाकर नगर के मुख्य भागों से होते हुए नगर परिक्रमा करते हैं और कुल्लू नगर में देवता रघुनाथजी की वंदना से दशहरे के उत्सव का आरंभ करते हैं। दशमी के दिन इस उत्सव की शोभा निराली होती है।

 

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