क्रष्ण जन्माष्ठमी 2017 दही हांड़ी उत्सव और कान्हा की फोटो वॉलपेपर

govinda aala re

दही हंडी उत्सव : हिंदू त्योहार जन्माष्ठमी 2017 गोकुलाष्ठामी का त्योंहार कृष्ण के जन्म के उपलक्ष में जो जश्न मनाया जाता है उसे दही हांड़ी उत्सव कहते हैं | महाराष्ट्र मैं दही हांड़ी का उत्सव बड़ा खाश होता हैं |दही हंडी हर बार अगस्त महीने मैं मनाया जाता है, जो कि कृष्ण जन्माष्टमी के दिन आता हैं । इस उत्सव पर एक मिट्टी के बर्तन को फांसी पर लटकाया जाता है, जिसकी काफी ऊंचाई होती हैं जहाँ तक पहुंचना काफी मुस्किल होता हैं । कई युवा पुरुषों और लड़कों की टीमों का गठन कर एक पिरामिड बनाया जाता हैं और दही हांड़ी तक पहुंचने या उसको तोड़ने का प्रयास करते हैं। जैसे ही वे करते हैं, लड़कियां उन्हें घेरती हैं, संगीत के साथ गाते हैं, और उन पर जयकार करती हैं। और पानी की बोछारे छोड़ी जाती हैं | इन कठिनाईयों को पार करते हुए जो लड़का दही हांड़ी को फोड़ता हैं वही गोविंदा कहलाता हैं |

radha krishna

क्रष्ण जन्माष्ठमी 2017 दही हांड़ी उत्सव फोटो

मथुरा के राजा कंस द्वारा किए गये अत्याचार, जिसमे प्रजा द्वारा सभी दूध उत्पाद का ज़रूरत से ज़्यादा माँग के विरोध स्वरूप। बाल्य काल मैं भगवान श्री कृष्ण अपने ग्वाला टोलियों के साथ घर-घर जाकर दूध से बने उत्पाद जैसे – दही, मक्खन आदि को लेकर अपने ग्वाला दोस्तों मैं बाँट दिया करते थे। इस विरोध स्वरूप प्रारंभ हुआ दही-हंडी महोत्सव।

कृष्ण जन्माष्टमी फोटो

janmasthami

जन्माष्टमी पर कविता : Happy Shree Krishna Janmashtami

krishna janmasthami

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

रात अँधेरी अष्टमी।
महीना था वो भादो।
नन्द भी नाचे और नाची थी मैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

माखन चोर कहाये तुम।
खुद भी खाया – सबको खिलाया।
पी गए थे तुम दहिया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

jay shree krishna

गोपी संग में रास रचाया।
राधा संग त्योहार मनाया।
वृन्दावन के अमर नचैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

उस रास रंग में वृन्दावन के –
क्यों न तब हमको भी मिलाया।
हम भी बनते रास रचैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

छोड़ के पीछे सबको तुमने।
त्याग उदाहरण पेश किया।
वापस आओ धूम मचैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

पाप बढ़े थे कंसराज में –
बढ़ रही थी बुराइयाँ।
खुशियां बांटी कंस वधैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *