गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2018 जन्मौत्सव व खालसा पंथ की स्थापना

गुरु गोविन्द सिंह जयंती 2017 : गुरुगोविन्द सिंह Guru Gobind Singh सिख धर्म के दसवें धर्म गुरु थे | उनका जन्म पौष शुदि सप्तमी 22 दिसंबर 1666 को पटना में हुआ था | गुरु गोविन्द सिंह Guru Gobind Singh के जन्म दिवस को गुरु गोविंद जयंती के रूप में सीखो द्वारा मनाया जाता है | इस दिन गुरुद्वारों को सजाया जाता है और इस दिन गुरु ग्रन्थ का पाठ किया जाता है | गुरु गोविन्द सिंह जयंती Guru Gobind Singh Jayanti के दिन गुरूदावारो में लंगर लगाये जाते है | गुरु गोविन्द सिंह ने सिखों की पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया था | इस ग्रन्थ में उनके जीवन की सम्पूर्ण जानकारी का उल्लेख मिलाता है | जिसमे में मुगलों के साथ 14 युद्ध लडे थे इस की वजह से गुरु गोविन्द सिंह को कलगीधर, दशमेश, बाजांवा के उप – नाम से भी जाना जाता है | वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होने खालसा पन्थ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है |

Guru Gobind Singh Jayanti

Guru Govind Singh Jaynti Day and Date

वर्ष 2019 में गुरु गोविन्द सिंह जयंती या गुरु गोविन्द सिंह जन्म दिवस 13th January 2019 रविवार को बड़े ही धूम धाम से मनाई जाएगी |

गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म Guru Gobind Singh Birth

गुरु गोबिन्द सिंह Guru Gobind Singh का जन्म नौवें सिख गुरु गुरु तेगबहादुर और माता गुजरी के घर पटना में 22 दिसंबर 1666 को हुआ था। उनके बचपन का नाम गोविन्द राय था | 1670 में उनका परिवार पंजाब में आकर बस गया | गुरु गोविन्द सिंह की प्रारंभिक शिक्षा चक्क नानकी नामक स्थान पर हुई | इसके बाद उन्होंने फारसी, संस्कृत की शिक्षा ग्रहण की और योद्धा बनने के लिए सैन्य कौशल भी सीखा | गुरु गोविन्द सिंह जी शांति, क्षमा, सहनशीलता की मूर्ति थे | जब कश्मीरी पंडितो को जबरन धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनाया जा रहा था तब उनके पिता का 11 नवंबर 1675 को औरंगजेब ने दिल्ली के चांदनी चौक में सार्वजनिक रूप से उनके पिता गुरु तेग बहादुर का सिर कटवा दिया था | इसके बाद वैशाखी के दिन 29 मार्च 1676 को गुरु गोविन्द सिंह Guru Gobind Singh सिखों के दसवें गुरु रूप में घोषित किये गये थे |

Guru Gobind Singh Jayanti 2018 Date

गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा खालसा पंथ की स्थापना Establishment of Guru Gobind Singh Khalsa Panth

गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के दसवें धर्म गुरु थे गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 ईसवी यानि बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना कर अपने अनुयायियों के समूह का निर्माण किया |जब सिख समुदाय की एक सभा चल रही थी तो सभा में पूछा की “कौन अपने सर का बलिदान दे सकता है “ | उसी समय एक सेवक खड़ा हुआ और कहा में करवा सकता हु | तो गुरु गोविन्द सिंह उसे एक तम्बू में लेकर गये कुछ देर बाद गुरु गोविन्द सिंह खून से सनी तलवार लेकर आये | इस तरह से गुरु गोविन्द सिंह पांच सेवको को लेकर गये जब पांचवे सेवक को लेकर गये थोड़ी देर बाद सभी पांचो सेवको को जीवित बहार लेकर आये तब से उन्होंने ” पंज प्यारे ” या पहले खालसा का नाम दिया | उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह ने एक कटोरा लिया उसमे पानी और चीनी मिलाकर दुधारी तलवार से घोलकर अमृत नाम दिया | उसे छठवां खालसा का नाम दिया गया | इसके बाद उनका नाम गुरु गोबिंद राय से गुरु गोबिंद सिंह रख दिया गया और उन्होंने पांचो ककारों का महत्व खालसा के लिए समझाया और कहा – केश, कंघा, कड़ा, किरपान, कच्चेरा आदि |

गुरु गोबिंद सिंह खालसा पंथ की स्थापना

गुरु गोबिन्द सिंह की पुस्तके Guru Gobind Singh Book

गुरु गोबिन्द सिंह Guru Gobind Singh एक वीर योद्धा होने के साथ वह एक महान कवि भी थे। समय के अनुकूल गुरुजी ने योगियों, पंडितों व अन्य संतों के मन की एकाग्रता के लिए बेअंत बाणी की रचना की। गुरु गोविंद सिंह जी ने गुरु की पदवी को समाप्त करने के लिए ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ को सिखों का गुरु बनाया। गुरु गोविंद सिंह जी ने आदेश दिया कि आगे से कोई भी देहधारी गुरु नहीं होगा और गुरु वाणी व गुरु ग्रंथ साहिब ही सिखों के लिए गुरु सामान्य होगी। इसके बाद भी उन्होंने अनेक रचनाये लिखी जो इस प्रकार है |

  • जाप साहिब
  • अकाल उस्तत
  • बचित्र नाटक
  • चण्डी चरित्र – ४ रचनाएँ
  • शास्त्र नाम माला
  • अथ पख्याँ चरित्र लिख्यते
  • ज़फ़रनामा
  • खालसा महिमा

गुरु गोविन्द सिंह की मृत्यु Guru Gobind Singh Death

27 दिसम्बर 1704 को औरंगजेब ने उनके दोनों पुत्र जोरावतसिंह व फतेहसिंहजी को दीवारों में चुनवा दिया था | तब गुरु गोविन्द सिंह ने उन्हें पत्र लिखा कि तेरा साम्राज्य नष्ट करने के लिए खालसा पंथ तैयार हो गया है | इसके बाद 8 मई 1705 को मुक्तसर’ नामक स्थान पर मुगलों से भयानक युद्ध हुआ | जिसमे गुरु गोविन्द सिंह की विजय हुई | इसके बाद अक्टूबर सन्‌ 1706 में गुरु गोविन्द सिंह जी दक्षिण में गए जहाँ पर औरंगजेब की मृत्यु का पता लगा | एक बार युद्ध करते समय गुरु गोबिंद सिंह जी के छाती में दिल के ऊपर एक गहरी चोट लग गयी थी | जिसके कारण 18 अक्टूबर 1708 को 42 वर्ष की आयु में नान्देड में उनकी मृत्यु हो गयी |

गुरु गोविंदजी के बारे में लोगो का मत

  • गुरु गोविंदजी के बारे में लाला दौलतराय, जो कि कट्टर आर्य समाजी थे, लिखते हैं ‘मैं चाहता तो स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद, परमहंस आदि के बारे में काफी कुछ लिख सकता था, परंतु मैं उनके बारे में नहीं लिख सकता जो कि पूर्ण पुरुष नहीं हैं। मुझे पूर्ण पुरुष के सभी गुण गुरु गोविंदसिंह में मिलते हैं।’ अतः लाला दौलतराय ने गुरु गोविंदसिंहजी के बारे में पूर्ण पुरुष नामक एक अच्छी पुस्तक लिखी है।
  • इसी प्रकार मुहम्मद अब्दुल लतीफ भी लिखता है कि जब मैं गुरु गोविंदसिंहजी के व्यक्तित्व के बारे में सोचता हूँ तो मुझे समझ में नहीं आता कि उनके किस पहलू का वर्णन करूँ। वे कभी मुझे महाधिराज नजर आते हैं, कभी महादानी, कभी फकीर नजर आते हैं, कभी वे गुरु नजर आते हैं। सिखों के दस गुरू हैं।

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