छठ पूजा कब हैं छठ पूजा का व्रत करने का क्या महत्व हैं

छठ पूजा महोत्सव : छठ पर्व उत्सव 26 अक्टूबर 2017 को हैं | छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम पर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के क्षेत्रों में बड़ा ही धूम धाम से मनाया जाता हैं।

यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्धी तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। स्त्री और पुरुष समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं। छठ व्रत के सम्बन्ध में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं; उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये, तब श्री कृष्ण द्वारा बताये जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उनकी मनोकामनाएँ पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिला। लोक परम्परा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मइया का सम्बन्ध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी।

कार्तिक छठ पूजा का महत्व व्रत कथा इतिहास | Kartik Chhath Puja Mahatva

छठ पूजा के दिन माता छठी की पूजा की जाती हैं, जिन्हें वेदों के अनुसार उषा (छठी मैया) कहा जाता है, जिन्हें शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव की पत्नी कहा गया हैं इसलिए इस दिन सूर्य देवता की पूजा का महत्व पुराणों में निकलता हैं | इस पूजा के जरिये भगवान सूर्य का देव को धन्यवाद दिया जाता हैं | सूर्य देव के कारण ही धरती पर जीवन संभव हो पाया हैं, एवम सूर्य देव की अर्चना करने से मनुष्य रोग मुक्त होता हैं | इन्ही सब कारणों से प्रेरित होकर यह पूजा की जाती हैं |

कार्तिक चैती छठ पूजा महत्व

इसका बहुत अधिक महत्व होता हैं | इस दिन छठी माता की पूजा की जाती हैं और छठी माता बच्चो की रक्षा करती हैं | इसे संतान प्राप्ति की इच्छा से किया जाता हैं | इसका महत्व उत्तर भारत में सबसे अधिक हैं, कहा जाता हैं भगवान राम जब माता सीता से स्वयंबर करके घर लौटे थे और उनका राज्य अभिषेक किया गया था | उसके बाद उन्होंने पुरे विधान के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को पुरे परिवार के साथ पूजा की थी | तब ही से इस पूजा का महत्व हैं | महाभारत काल में जब पांडव ने भी अपना सर्वस्व गँवा दिया था | तब द्रोपदी ने इस व्रत का पालन किया वर्षो तक इसे नियमित करने पर पांडवों को उनका सर्वस्व मिला था |इस प्रकार यह व्रत पारिवारिक खुशहाली के लिए किया जाता हैं |

सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं छठी मइया

छठ को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है | इसके महत्व का इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इसमें किसी गलती के लिए कोई जगह नहीं होती | इसलिए शुद्धता और सफाई के साथ तन और मन से भी इस पर्व में जबरदस्त शुद्धता का ख्याल रखा जाता है | इस त्योहार को जितने मन से महिलाएं रखती हैं पुरुष भी पूरे जोशो-खरोश से इस त्योहार को मनाते हैं औऱ व्रत रखते हैं |

छठ पूजा से जुड़ी कहानियाँ और इतिहास

छठ पूजा से जुड़ी हुई कई रोचक कहानिया है जो निचे दी गई हैं

राम की सूर्यपूजा

कहते हैं सूर्य और षष्ठी मां की उपासना का ये पर्व त्रेता युग में शुरू हुआ था | भगवान राम जब लंका पर विजय प्राप्त कर रावण का वध करके अयोध्या लौटे तो उन्होंने कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को सूर्यदेव की उपासना की और उनसे आशीर्वाद मांगा | जब खुद भगवा, सूर्यदेव की उपासना करें तो भला उनकी प्रजा कैसे पीछे रह सकती थी | राम को देखकर सबने षष्ठी का व्रत रखना और पूजा करना शुरू कर दिया | कहते हैं उसी दिन से भक्त षष्ठी यानी छठ का पर्व मनाते हैं |

राजा प्रियव्रत की कथा

छठ पूजा से जुड़ी एक और मान्यता है | एक बार एक राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रयेष्टि यज्ञ कराया | लेकिन उनकी संतान पैदा होते ही इस दुनिया को छोड़कर चली गई | संतान की मौत से दुखी प्रियव्रत आत्महत्या करने चले गए तो षष्ठी देवी ने प्रकट होकर उन्हें कहा कि अगर तुम मेरी पूजा करो तो तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी | राजा ने षष्ठी देवी की पूजा की जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई | कहते हैं इसके बाद से ही छठ पूजा की जाती है |

कुंती-कर्ण कथा

कहते हैं कि कुंती जब कुंवारी थीं तब उन्होंने ऋषि दुर्वासा के वरदान का सत्य जानने के लिए सूर्य का आह्वान किया और पुत्र की इच्छा जताई | कुंवारी कुंती को सूर्य ने कर्ण जैसा पराक्रमी और दानवीर पुत्र दिया | एक मान्यता ये भी है कि कर्ण की तरह ही पराक्रमी पुत्र के लिए सूर्य की आराधना का नाम है छठ पर्व |

कार्तिक छठ पूजा विधि 2017 शुभ मुहर्त व्रत विधि कथा और महत्व

You Must Read

Holi Best Shayari Status Whatsapps Facebook Holi Wishes Mess... Holi Best Shayari, Wishes Message SMS Status for W...
ऋषि पंचमी के व्रत की कहानी 2017 कैसे करे ऋषि पंचमी का व्रत ज... ऋषि पंचमी व्रत 2017 : ऋषि पंचमी का व्रत इस बार 25 ...
Bakra Eid मुबारक 2017 | Wishes SMS Shayari | बधाई सन्देश फोट... Bakra Eid 2017 : ईद-उल-अज़हा या ईद-उल-ज़ुहा या बकर...
April Fool Funny Joke SMS Shayari Message Chutkale April Fool Funny Joke SMS Shayari : Happy April Fo...
मुहर्रम 2017 कब हैं और क्यों मनाया जाता हैं ताजिये का महत्व ... Muharram 2017 : मुहर्रम का त्योंहार इमाम हुसैन की ...
बकरीद कब है 2017 बकरीद क्यों मनाई जाती हैं बकरीद के इतिहास क... बकरीद कब है 2017 ? - इस साल बकरीद 1 सितम्बर शुक्रव...
भाग्य बदल सकता गुरु पूर्णिमा के व्रत से जानिए... कैसे करें  गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा भारत...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *