Dussehra Essay In Hindi दशहरा विजयदशमी पर निबन्ध

दशहरा / विजयदशमी 2018 : दशहरा या विजयदशमी पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। आश्विन शुक्ल दशमी को विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता और साहस का पूजक, शौर्य का उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में जोश और वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। यह त्योहार अशिवन महीने के शुक्ल पक्ष में दस दिनों तक मनाया जाता है । इन दिनों माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है । त्योहार का अंतिम दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है । असत्य पर सत्य की जीत इस त्योहार का मुख्य संदेश है ।

 

दशहरा / विजयदशमी पर निबंध Dussehra Nibandh in Hindi

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नमस्कार दोस्तों ! दशहरा या विजयदशमी का त्योंहार आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता हैं | दशहरा का त्योंहार वीरता और शोर्य का प्रतीक हैं | विजयदशमी का त्योंहार एक ऐसा दिन हैं जिस दिन अच्छाई की जीत और बुराई की हार होती हैं | दशहरा का उत्सव दस दिनों तक चलता हैं | दस दिनों के इस त्योंहार में माँ दुर्गा के नों रूपों की पूजा की जाती हैं | दुर्गाष्ठ्मी के दिन नवरात्रा पुरे होते हैं और माँ दुर्गा की पूजा कर कंवारी कन्याओ को भोजन करवाया जाता हैं और महानवमी का उत्सव मनाया जाता हैं | नवरात्रा के शुरू होते ही दशहरा उत्सव भी चालू हो जाता हैं | कहा जाता हैं की रावण ने सीता का हरण किया था तो राम को सीता को लाने में दस दिनों का समय लगा था | दसवे दिन श्री राम ने रावण के दसों शीश काट कर महान पापी रावण का अंत किया था और माता सीता को रावण के चंगुल से आजाद किया था |उसी ख़ुशी में विजयदशमी का उत्सव मनाया जाता हैं |

दशहरा / नवरात्रा में माँ दुर्गा शक्ति की पूजा

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दशहरा भक्ति और समर्पण का त्योहार है । भक्त भक्ति- भाव से दुर्गा माता की आराधना करते हैं । नवरात्र में दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा होती है । दुर्गा ही आवश्यकता के अनुसार काली, शैलपुत्री, ब्रह्‌मचारिणी ,कुष्मांडा आदि विभिन्न रूप धारण करती हैं और आसुरी शक्तियों का संहार करती हैं । वे आदि शक्ति हैं । वे ही शिव पत्नी पार्वती हैं । संसार उन्हें पूजकर अपने अंदर की आसुरी शक्ति को नष्ट होने की आकांक्षा रखता है । दुर्गा रूप जय यश देती हैं तथा द्वेष समाप्त करती हैं । वे मनुष्य को धन- धान्य से संपन्न कर देती हैं ।

विजयादशमी के त्योंहार पर रामलीला का आयोजन

 

भारत के कई हिस्सों में रामलीला का मंचन होता है । कहा जाता है कि विजयादशमी के दिन भगवान राम ने लंकेश अहंकारी रावण का वध किया था । रावण अत्याचारी और घमंडी राजा था । उसने राम की पत्नी सीता का छल से अपहरण कर लिया था । सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए राम ने वानरराज सुग्रीव से मैत्री की । वे वानरी सेना के साथ समुद्र पार करके लंका गए और रावण पर चढाई कर दी । भयंकर युद्ध हुआ । इस युद्ध में मेघनाद, कुंभकर्ण, रावण आदि सभी वीर योद्धा मारे गए । राम ने अपने शरण आए रावण के भाई विभीषण को लंका का राजा बना दिया और पत्नी सीता को लेकर अयोध्या की ओर प्रस्थान किया । रामलीला में इन घटनाओं का विस्तृत दृश्य दिखाया जाता है । इसके द्वारा श्रीराम का मर्यादा पुरुषोत्तम रूप उजागर होता है । 18 अक्टूबर को नवरात्रि का आखिर दिन होगा और इसके बाद 19 अक्टूबर को देश में दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम ने रावण को युद्ध में हराकर उसका वध किया था और लंका पर विजय प्राप्त की थी, इसी कारण से इस दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। दशहरे के दिन पूरे देश में भगवान राम की पूजा की जाती है और प्रतीक के रूप में रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन देश में ऐसी कई जगह है जहां पर दशहरे के दिन राम की नहीं बल्कि रावण की पूजा होती है। आइए जानते हैं आखिर क्यों की जाती है इन स्थानों पर रावण की पूजा ?

वो स्थान जहाँ होती हैं रावण की पूजा

भारत के कई एसे स्थान हैं जहाँ राम की नहीं रावण की पूजा की जाती हैं आज भी वहां रावण के भक्त हैं जो रावण की पूजा बड़े ही श्रधा भाव से करते हैं | देखिये वो कोंसी जगह हैं ?

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१. मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थान पर रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर का पुराना नाम दशपुर था यहां की रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था इसलिए इस स्थान नाम मंदसौर पड़ा। मंदसौर रावण का ससुराल होने के कारण रावण का यहां दहन नहीं किया जाता बल्कि पूजा की जाती है।

२. बिसरख, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बिसरख नामक गांव में रावण की पूजा की जाती है। यह गांव रावण का ननिहाल माना जाता है। रावण के पिता विश्वेशरा के कारण इसका नाम बिसरख पड़ा।

३. जसवंतनगर, उत्तर प्रदेश

प्रदेश के जसवंतनगर में दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। उसके बाद रावण के टुकड़े कर दिए जाते हैं और तेरहवें दिन रावण की तेरहवीं भी की जाती है।

४. अमरावती,महाराष्ट्र

अमरावती के गढ़चिरौली में यहां के आदिवासी लोग दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। ये आदिवासी समुदाय रावण को अपना देवता मानते हैं।

 

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