चन्द्रग्रहण 31 जनवरी 2018 चन्द्रग्रहण का समय अवधि, सूतक समय, और शुद्धिकरण मन्त्र

चन्द्रग्रहण 31 जनवरी 2018 : सन्न 2018 का पहला पूर्ण चन्द्रग्रहण बुधवार को हैं | इसमें एक साथ Super moon,Blue Moon,Blood Moon की स्थिति बन रही हैं | भारत में दिखने वाला ब्लुमून पूर्ण चन्द्रग्रहण 174 साल बाद होने जा रहा हैं | ऐसा 31 मई 1844 और 31 दिसम्बर 1656 को हुआ था | तब ये ग्रहण भारत में भी दिखे थे | आज शाम 5.20 बजे से शुरू होने वाला पूर्ण चन्द्रग्रहण 3 घंटे 24 मिनट का होगा और पुरे भारत में दिखेगा | आंशिक चन्द्रग्रहण 17:18 बजे होगा और पूर्ण चन्द्रग्रहण 18:21 बजे होगा | और 20:48 बजे शुद्धिकरण होगा | पूर्ण चन्द्रग्रहण के समय चन्द्रमा का रंग भूरा होगा |

चन्द्रग्रहण से पहले सूतक लगने का समय

chandra grahan time

आज 31जनवरी बुधवार को पूर्ण चन्द्रग्रहण होगा | सूतक का काल सुबह 10 बजकर 18 मिनट से शुरु हो जाएगा। इस दिन 12 घंटे तक भगवान के दर्शन करना अशुभ जाएगा जिस कारण से मंदिरों के पट बंद रहेंगे इस दौरान किसी भी तरह की पूजा नहीं की जा सकती है। ये चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा जिस कारण से इसे धार्मिक सूतक की मान्यता दी जाएगी। चंद्र ग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 24 मिनट तक रहेगी। ऐसे में पूर्णिमा तिथि की पूजा और स्नान-दान का पुण्य और मंदिर में भगवान विष्णु और शिव की उपासना के लिए सुबह 8 बजकर 40 मिनट तक ही विशेष समय माना जा रहा है। ग्रहण का समय चंद्रोदय के साथ ही शुरु होगा। बालक, वृद्ध और रोगियों के लिए सूतक काल नहीं माना जाएगा। ग्रहण के समय मूर्ति स्पर्श, भोजन और नदी स्नान वर्जित माना जाएगा।

चन्द्रग्रहण शुरू होने का समय

31जनवरी 2018 को ग्रहण का समय चंद्रोदय के साथ ही शुरु होगा।

  • चन्द्रग्रहण आज शाम 5.20 बजे से शुरू
  • आंशिक चन्द्रग्रहण 17:18 बजे होगा
  • पूर्ण चन्द्रग्रहण 18:21 बजे होगा |
  • शुद्धिकरण 20 : 48 बजे होगा

चन्द्रग्रहण पूर्ण होने की अवधि : चंद्र ग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 24 मिनट तक रहेगी।

चन्द्रग्रहण पूर्ण होने के बाद शुद्धिकरण कैसे करे ?

ग्रहण के समाप्त होने के बाद हमे स्नान करना चाहिए और अपने वस्त्र बदलने चाहिए और गंगाजल छिडक कर पुते घर का शुद्धिकरण करना चाहिए और मंदिर की सफाई भी की जानी चाहिए। और बर्तनों or पानी भरने के पात्रो को अच्छे से साफ़ करके उनमे शुद्ध जल भरना चाहिए |

चन्द्रग्रहण शुद्धिकरण मन्त्र : ऊं क्षीरपुत्राय विह्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्रः प्रचोदयात्।। चंद्रग्रहण के सूतक के दौरान इस मंत्र का जाप करना सबसे लाभकारी माना जाता है।

चन्द्रग्रहण के दुष्प्रभाव :

यह चंद्रग्रहण पुष्य आश्लेषा नक्षत्र एवं कर्क राशि पर चरितार्थ होगा अतः इन राशि वालों को ग्रहण का दर्शन नहीं करना चाहिए एवं वृषभ, कन्या ,तुला एवं कुंभ राशि हेतु दर्शन करना सुखद है तथा मेष, कर्क, सिंह एवं धनु राशि हेतु दर्शन करना योग्य नहीं है | मिथुन, वृश्चिक, मकर और मीन राशि हेतु सामान्य मध्यम फलद रहेगा । गर्भवती महिलाओं के लिए ये भुत ही खतरनाक साबित होता हैं अत : उन्हें सुत्तक लगने के बाद से ही घर के बहार नहीं निकलना चाहिए | क्योंकि उसके होने वाले बच्चे पर चन्द्रग्रहण का दुष्प्रभाव होता हैं अत: गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए | चंद्रग्रहण के दौरान वृद्ध, बीमार, नवजात और गर्भवती महिलाओं का ग्रहण देखना या संपर्क में आना वर्जित है। खाने पीने की वस्तुओं में तुलसीदल रख दें और चंद्रग्रहण समाप्ति के बाद ही भोजन करें। जो भी पूर्णिमा का व्रत रखता हो वे लोग व्रत रख सकते हैं, लेकिन चंद्रदेव की पूजा और व्रत तभी तोड़ें जब ग्रहण पूर्णतः समाप्त हो जाये।

चन्द्रग्रहण का राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव

1) मेष – नौकरी और व्यवसाय में सफलता मिलेगी। कार्यस्थल पर आपकी मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आजीविका से जुड़े सभी क्षेत्रों में लाभ की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। संपत्ति सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं। ग्रहण के दौरान शिव जी की उपासना करें। ग्रहण के बाद हरी वस्तुओं का दान करें।

2) वृषभ- करियर में बदलाव के योग हैं। नौकरी और व्यापार में उन्नति होगी। निर्णयों में सावधानी रखें। अचानक धन लाभ होने की संभावना है। ग्रहणकाल में कृष्ण जी की उपासना करें। ग्रहण के बाद लाल फल का दान करें।

3) मिथुन –धन हानि हो सकती है। सेहत का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि मानसिक अवसाद के शिकार हो सकते हैं। आंखों और कान नाक गले का ध्यान रखें।। ग्रहणकाल में बजरंग बाण का पाठ करें। ग्रहण के पश्चात सफ़ेद वस्तुओं का दान करें।

4) कर्क- दुर्घटनाओं और शल्य चिकित्सा के योग है, शारीरिक कष्ट से समस्या हो सकती है। वाहन सावधानी से चलाएं। मुकदमेबाज़ी और विवादों से बचें। ग्रहणकाल में चन्द्रमा के मंत्र का जाप करें। ग्रहण के पश्चात काली वस्तुओं का दान करें।

5) सिंह- धन हानि होने की संभावना है। आँखों की समस्या का ध्यान दें। पारिवारिक विवादों से बचाव करें। ग्रहणकाल में यथाशक्ति हनुमान चालीसा का पाठ करें। ग्रहण के बाद जूते या छाते का दान करें।

6) कन्या- आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। नौकरी के निर्णयों में सावधानी रखें। साहस और परामक्रम में वृद्धि होगी। छोटी दूरी की यात्रा की संभावना है। भाई-बहन अच्छा समय व्यतीत करेंगे। ग्रहणकाल में रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। ग्रहण के पश्चात अन्न का दान करें।

7) तुला – शारीरिक विकारों से परेशानी बढ़ सकती है। किसी बात का भय बना रह सकता है। जीवन में संघर्ष बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। करियर में अचानक समस्याएं आ सकती हैं। किसी दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं। ग्रहणकाल में दुर्गा कवच का पाठ करें। ग्रहण के बाद काली वस्तुओं के दान से लाभ होगा।

8) वृश्चिक -प्रेम संबंधों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पढ़ाई-लिखाई में अड़चनें आ सकती हैं। अपयश और विवाद की संभावना बन सकती है। मूत्र विकार और धन हानि से बचाव करें। ग्रहणकाल के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करें। ग्रहण के बाद फलों के दान से और भी ज्यादा लाभ होगा।

9) धनु – नौकरी और करियर में संकट आ सकता है, विरोधियों से चुनौती मिल सकती है, वे कई तरह की समस्या उत्पन्न करेंगे। आर्थिक जीवन सामान्य रहेगा, धन लाभ के साथ-साथ खर्च भी बढ़ेंगे। किसी कानूनी मामले से परेशानी हो सकती है। वाहन दुर्घटना से बचें। ग्रहणकाल में चन्द्रमा के मंत्र का जाप करें, ग्रहण के बाद सफ़ेद वस्तुओं का दान करें।

10) मकर – जीवनसाथी के साथ रिश्तों का ध्यान दें। ग्रहणकाल में हनुमान बाहुक का पाठ करें। ग्रहण के बाद लाल फल का दान लाभकारी होगा।

11) कुम्भ – करियर में मनचाही सफलता मिल सकती है। सेहत में लापरवाही न करें। ग्रहणकाल में शिव जी की उपासना करें। ग्रहण के बाद निर्धनों को भोजन कराएं।

12) मीन – अनावश्यक अपयश के शिकार हो सकते हैं। पेट और कारोबार की समस्यायें आ सकती हैं। गर्भवती महिलायें विशेष सावधानी रखें। ग्रहणकाल में श्रीकृष्ण की उपासना करें। ग्रहण के बाद केले का दान करे।

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