ईद उल फित्र चाँद से 25 जून को मनाई जाएगी जाने ईद के बारे मैं सम्पूर्ण इतिहास

ईद उल-फ़ित्र 2017 (राजस्थान)

शाम रविवार, 25 जून से
सोमवार, 26 जून शाम तक

ईद उल-फ़ित्र : मीठी ईद मुसलमानों का त्योहार हैं | ईद मूल रूप से भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्योहार है। इस त्योहार को सभी आपस में मिल के मनाते है और खुदा से सुख-शांति और बरक्कत के लिए दुआएं मांगते हैं। पूरे विश्व में ईद की खुशी पूरे हर्षोल्लास से मनाई जाती है।रमजान का अंतिम जुमा (जुमा अलविदा) आज शुक्रवार को है। रमजान के रोजों के बाद खुशियों का त्योहार ईद मनाया जाता है। ईद की तैयारियों में लोग जोर-शोर से लगे हुए हैं। पुरुष कपड़ों और महिलाएं श्रृंगार के सामान के साथ-साथ चूड़ियों और कपड़ो की जमकर खरीददारी कर रही हैं। | अब सभी लोगों की नजर चाँद पर हैं ,जिस रात को चाँद दिखेगा उस रात की सुबह ईद मनाई जाएगी | मीठी ईद मुसलमान भाइयो का भाई चारे और प्रेम से भरा त्यौहार हैं इस दिन सभी लोग आपस मैं बैर की भावना को भुला कर भाई भाई की तरह से रहते हैं और आपस मैं एक दुसरे के गले मिलकर अपना प्यार का इजहार करते हैं | मीठी ईद पर तरह तरह की मिठाईयां बांटी जाती हैं ,महिलाये बाजार में कपड़े और आभूषणों की खरीददारी करती हैं ,और तरह तरह के सूट पहनती हैं |

ईद क्या हैं ? और इसे क्यों मनाया जाता हैं ?

ईद उल अजहा – कुर्बानी का इतिहास : ईद उल अजहा पर कुर्बानी दी जाती है। यह एक जरिया है जिससे बंदा अल्लाह की रजा हासिल करता है। बेशक अल्लाह को कुर्बानी का गोश्त नहीं पहुँचता है, बल्कि वह तो केवल कुर्बानी के पीछे बंदों की नीयत को देखता है अल्लाह को पसंद है कि बंदा उसकी राह में अपना हलाल तरीके से कमाया हुआ धन खर्च करे। कुर्बानी का सिलसिला ईद के दिन को मिलाकर तीन दिनों तक चलता है।

कुर्बानी का इतिहास- इब्रा‍हीम अलैय सलाम एक पैगंबर गुजरे हैं, जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपने प्यारे बेटे इस्माईल (जो बाद में पैगंबर हुए) को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें। यह इब्राहीम अलैय सलाम के लिए एक इम्तिहान था, जिसमें एक तरफ थी अपने बेटे से मुहब्बत और एक तरफ था अल्लाह का हुक्म।

चाँद देख कर ही क्यों मनाई जाती हैं ईद

रमजान के 30वें रोज़े के बाद चाँद देख कर ईद मनाई जाती हैं। इस साल भी इसी तरह जून महीने मैं ईद मनायी जानी हैं। पर क्या आप जानते हैं कि ईद और चाँद का क्या कनेक्शन हैं ? क्यों ईद चाँद दिखने के बाद अगले दिन मनाई जाती हैं ? ईद को ईद-उल-फितर भी कहा जाता हैं जो इस्लामिक कैलंडर के दसवें महीने के पहले दिन मनाई जाती हैं। इस्लामिक कैलंडर के बाकि महीनो की तरह यह महिना भी “नया चाँद” देख कर शुरू होता हैं।

साल 2017 में ईद उल फित्र 24 या 25 जून को मनाई जाएगी।

ईद मनाने का मकसद क्या हैं ? जाने

ईद मनाने का मकसद वैसे तो पूरी दुनिया में भाईचारा फैलाने का हैं , 624 ईस्वी में पहला ईद-उल-फितर मनाया गया था। इस्लामिक कैलंडर में दो ईद मनायी जाती हैं। दूसरी ईद जो ईद-उल-जुहा या बकरीद के नाम से भी जानी जाती हैं। ईद-उल-फितर का यह त्यौहार रमजान का चाँद डूबने और ईद का चाँद नजर आने पर नए महीने की पहली तारीख को मनाया जाता हैं। रमजान के पुरे महीने रोजे रखने के बाद इसके खत्म होने की खुशी में ईद के दिन कई तरह की खाने की चीजे बनाई जाती हैं। सुबह उठा कर नमाज अदा की जाती हैं और खुदा का शुक्रिया अदा किया जाता हैं कि उसने पुरे महीने हमें रोजे रखने की शक्ति दी। नए कपड़े लिए जाते हैं और अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से मिल कर उन्हें तोहफे दिए जाते हैं और पुराने झगड़े और मन-मुटावों को भी इसी दिन खत्म कर एक नयी शुरुआत की जाती हैं।

ज़कात उल-फ़ितर क्या हैं :

ईद के दिन मस्जिदों में सुबह की प्रार्थना से पहले हर मुसलमान का फ़र्ज़ है कि वो दान या भिक्षा दे. इस दान को ज़कात उल-फ़ितर कहते हैं। यह दान दो किलोग्राम कोई भी प्रतिदिन खाने की चीज़ का हो सकता है, मिसाल के तौर पे, आटा, या फिर उन दो किलोग्रामों का मूल्य भी। प्रार्थना से पहले यह ज़कात ग़रीबों में बाँटा जाता है।

क्या कनेक्शन है ईद का, चांद से विस्तार से जाने

ईद-उल-फ़ितर हिजरी कैलंडर (हिजरी संवत) के दसवें महीने शव्वाल (शव्वाल उल-मुकरर्म) की पहली तारीख को मनाई जाती है। गौरतलब है कि हिजरी कैलेण्डर की शुरुआत इस्लाम की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना से मानी जाती है, जब हज़रत मुहम्मद ने मक्का शहर से मदीना की ओर हिज्ऱत (प्रवास) किया था।हिजरी संवत चांद पर आधारित कैलेण्डर है। इस संवत के बाकी के अन्य महीनों की तरह शव्वाल महीना भी ‘नया चाँद’ देख कर ही शुरू होता है।यदि इस महीने का पहला चांद नजर नहीं आता है, तो माना जाता है कि रमजान का महीना मुकम्मल होने में कुछ कसर है, लिहाजा ईद अगले दिन मनाई जाती है। इस्लाम के तारीखी पन्ने बताते हैं कि पहली ईद सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बद्र की लड़ाई के बाद मनाई गई थी।

क्यों मनाया जाता हैं ईद-उल-फ़ित्र का त्यौहार

रमजान का पवित्र महीने ख़त्म होगया और आज यानी 1 शौव्वल को ईद मनाई जारही हैं. ईद-उल-फ़ित्र में ‘फ़ित्र’ अरबी का शब्द है जिसका मतलब होता है फितरा अदा करना. इसे ईद की नमाज़ पढने से पहले अदा करना होता हैं . फितरा हर मुसलमान पर वाजिब है और अगर इसे अदा नहीं किया गया तो ईद नहीं मनाया जासकता.
रोजा इस्लाम के अहम् फराइजो में से एक है और यह सब्र सिखाता है. रमज़ान में पूरे महीने भर के रोज़े रखने के बाद ईद मनाई जाती हैं. दरसल ईद एक तौफा है जो अल्लाह रब्बुल इज्ज़त अपने बन्दों को महिना भर के रोज़े रखने के बाद देते है.

ईद पर निबंध : Essay on Eid in Hindi

ईद मुसलमान भाइयों का सर्वप्रमुख त्योहार है । इस त्योहार को ईद-उल-फित्र के नाम से भी जाना जाता है । यह त्योहार रमजान के महीने की त्याग, तपस्या और व्रत के बाद आता है । यह प्रेम और भाईचारे की भावना उत्पन्न करनेवाला पर्व है । इस दिन चारों ओर खुशी और मुस्कान छाई रहती है । हर कोई ईद मनाकर स्वयं को सौभाग्यशाली समझता है ।

रमजान का पूरा महीना व्रत का महीना होता है । हर स्वस्थ मुसलमान भाई रोजे रखता है । दिन में न कुछ खाता है, न पानी पीता है । सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच ही खाया-पीया जाता है । बहुत सब्र की जरूरत होती है, बड़ी तपस्या के दिन होते हैं यह! जब बाहर लू के थपेड़े चल रहे हों, जब प्यास के मारे गला सूख रहा हो, तब लगातार एक महीने तक व्रत रखना सचमुच दिलेरी का काम है ।
रमजान का पावन महीना जैसे-जैसे बीतता गया, लोगों की आशा बढ़ती गई । बच्चे अधीर होने लगे कब ईद आएगी? अब्बाजान तो कहते थे, जल्दी ईद आएगी, पर अभी तक ईद आयी नहीं । पर नए वस्त्र तो सिलवा कर रख सकते हैं, पसंद की टोपी तो खरीद ही सकते हैं । उनका उत्साह थमने का नाम नहीं ले रहा ।कहा जाता है की ईद का दिन मुसलमानों के लिये इनाम का दिन होता है. इस दिन को बड़ी ही आसूदगी और आफीयत के साथ गुजारना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करनी चाहिए.

ईद-उल-फ़ित्र पर बनाई गई खाश मिठाइयां

ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता हैं. सेवइयों और शीरखुरमे की मिठास में लोग अपने दिल में छुपी कड़वाहट को भी भुला देते हैं. ईद का यह त्यौहार ना सिर्फ मुसलमान भाई मनाते हैं बल्कि सभी धर्मो के लोग इस मुक्कदस दिन की ख़ुशी में शरीक होते हैं .

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