गणेश चतुर्थी 2017 पूजा विधि मुहूर्त और गणपति बप्पा का 1970 किलो का केक

ganpati bappa kek photo

गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को भक्तों ने चढ़ाया 1,970 किलो का केक, बनाया वर्ल्ड रिकार्ड

पुणे के प्रसिद्ध गणपति श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति को भक्तों द्वारा एक हजार 970 किलो का मोदक के आकार का केक चढ़ाया गया है। भक्तों द्वारा गणपति को प्रसाद के रूप में चढ़ाए गया यह मोदक केक एक वर्ल्ड रिकार्ड बन गया है जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बुक में दर्ज किया गया है। देशभर में धूमधाम और श्रद्धामय रूप से मनाया जानेवाले सार्वजनिक गणेश फेस्टिवल महाराष्ट्र में इस वर्ष अपने 125 वर्ष पूर्ण कर रहा है। जिसके आयोजन में भक्तों द्वारा गणपति को मोदक केक प्रसाद के रूप में चढ़ाया गया। गणपति को प्रसाद के रूप में चढ़ाया गया अबतक का सबसे बड़ा मोदक है।

गणेश चतुर्थी 2017 Ganesh Chaturthi 2017

भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव में गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। | इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि और समृद्धि के देवता माना जाता है | पुराणों में यह मान्यता है कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में श्री गणेश भगवान का जन्म हुआ था। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी का दिन शुक्रवार 25 अगस्त 2017 को आयेगा । भाद्रपद माह में गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिन तक चलता है | इसके बाद चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है | इस दिन को गणेश विसर्जन के नाम से भी जाना जाता है। अंत में चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु ढोल नगाड़ो व बड़े ही धूम-धाम के साथ जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का तालाबों, झीलों ,नदी आदि में विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त समय Ganesh Chaturthi Puja Muhurat Time

  • मध्याह्न गणेश पूजा का समय = 11:06 से 13: 39
  • 24 वें, चंद्रमा को न देखने का समय = 20:27 बजे 20:43
  • 25 वें, चन्द्रमा को न देखने का समय = 09: 10 से 21:20
  • चतुर्थारी तिथि प्रारम्भ = 24 / अगस्त / 2017 बजे 20:27 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्ति = 25 / अगस्त / 2017 बजे 20:31 बजे

गणपति स्थापना और गणपति पूजा मुहूर्त Ganapati establishment and Ganpati Puja Muhurt

ज्योतिष के अनुसार मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। ऐशी मान्यता है की गणेशजी महाराज का जन्म मध्याह्न (दोपहर ) काल के दौरान हुआ था समय गणेशजी महाराज की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है | भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी के दिन गणेश स्थापना और गणेश पूजा मध्याह्न (दोपहर )में की जाती है ।

गणेश चतुर्थी 2017

भगवान गणेश चतुर्थी पर चन्द्रमा दर्शन पर दोष क्यों लगता है

चंद्रमा

गणेश चतुर्थी के दिन अगर आप ने चन्द्रमा के दर्शन किए तो आप को बहुत बड़ा दोष लग सकता है क्यों की महाराज श्री गणेश भगवान ने चन्द्रमा को श्राप दिया था इस श्राप के कारण ही गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शनों करना निषेध बताया है| अगर कोई इस दिन भूलवश कोई कारण वस चाँद के दर्शन कर लेता है तो उसके दोष के निवारण का उपाय भी बताया गया है।

भगवान गणेश ने चन्द्रमा को श्राप क्यों दिया और इसके उपाय क्या हैं

जातक कथाओ में बताया जाता है की एक दिन गणेशजी चूहे की सवारी करते समय गिर पड़े | तो उस पर चन्द्रमा को हंसी आ गई । इस बात को लेकर गणेशजी महाराज बहुत काफी क्रोधित हो गये | और गणेशजी महाराज ने चन्द्रमा को श्राप दे दिया कि चंद्रमा अब तुम किसी के देखने के योग्य नहीं रहोगे और किसी ने तुम्हें देख भी लिया तो वह पाप( दोष )का भागी होगा। श्राप देकर गणेशजी वहाँ से चले गये। इस बात पर चन्द्रमा दुःखी व चिन्तित होकर मन ही मन दुःख महसूस करने लगे । वहीं चन्द्रमा के दर्शन न कर पाने के श्राप से देवता भी दुःखी होने लगे ।
इसके बाद भगवान इन्द्र की अध्यक्षता में सभी देवी – देवताओं ने भगवान गणेश की आरधना प्रारम्भ की। देवताओं की आराधना से प्रसन्न होकर गणेशजी महाराज ने वर मांगने को कहा। सभी देवी – देवताओं ने कहा- महाराज चन्द्रमा को श्राप से मुक्त कर दो | यही हमारा आप से निवेदन है। गणेशजी ने देवताओ से कहा कि मैं अपना श्राप वापस तो नहीं ले सकता हूं। किन्तु उसमें कुछ बदलाव कर सकता हूं। यह श्राप केवल एक दिन ही प्रभावी रहेगा | जो व्यक्ति भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चन्द्रमा के दर्शन करेगा वह अभिशप्त होगा और उस पर झूठे चोरी के आरोप लगने का भय रहेगा।

चन्द्रमा श्राप का दोष निवारण मन्त्र Defective mantra of Moon curse

यदि आपके भूलवस से गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन हो जायें तो दोष या पाप से बचाव के लिये निम्नलिखित मन्त्र का उचारण करना चाहिये –

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

गणेश चतुर्थी महोत्सव की कथा Story of Ganesh Chaturthi Festival

गणेश चतुर्थी महोत्सव की कथा 

भगवान गणेश देवी पार्वती और भगवान शिव के बेटे है। प्राचीन समय में, एक बार भगवान शिव हिमालय के पहाड़ों में अपनी समाधि के लिए चले गये। तो देवी पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपनी गुफा का द्वारपालक बना दिया। शिवजी ने जब गुफा में प्रवेश करना चाहा तो तब बालक गणेश ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणोंने बालक गणेश से युद्ध किया | परंतु इस युद्ध में भगवान गणेश कोई हरा नहीं कर सका। अन्त में भगवान शिव शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक गणेश का सर धड से काट कर अलग कर दिया। जैसे ही माता पार्वती बाहर आयी वह इस घटना को देखकर बहुत क्रोधित हुई। उन्होंने गणेश के सिर और शरीर को गोद में लेकर बेठ गई । उन्होंने कहा कि मुझे किसी भी कीमत पर अपना पुत्र वापस चाहिये अन्यथा मैं पूरे संसार को नष्ट कर दूँगी। भयभीत देवताओं ने देवर्षिनारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णुजी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने हाथी के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुन:र्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस गज बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके सबसे पहले पूजने का वरदान दिया। भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष होगा । गणेश्वर तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। माता लक्ष्मी ने कहा कि अब से गणेश मेरी गोद में बैठेगें और लोग ज्ञान और धन पाने के लिये मेरे साथ गणेश की पूजा करेगें। अत: इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी।

क्यों रखा जाता है गणेश चतुर्थी का व्रत

शास्त्रों की मानें तो इस व्रत के बारे में भगवान गणेश ने मां पार्वती को बताया था। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से विग्नहर्ता सभी विघ्न बाधाओं का नाश करते हैं और भगवान श्री गणेश संतान को सभी कष्टों से बचाते हैं।

कैसे करें भगवन गणेश का व्रत

सुबह सूर्योदय से पहले गुड़, तिल, गन्ने और मूली से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति बनाई जाती है और पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं। इस दिन पूरे दिन व्रत रखा जाता है और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत पूर्ण होता है। इस दिन सकट माता की भी पूजा की जाती है। पूजा की जगह इनका चित्र बनाया जाता है। इस दिन गुड़ और तिल से बने लड्डू भगवान गणेश को चढ़ाए जाते हैं इसके साथ उन्हें दुर्वा भी अर्पित की जाती है। इस पूरे दिन महिलाएं निर्जला होकर व्रत रखती हैं।

ऊँ गं गणपतये नम:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:,
निर्विघ्नं कुरूमें देव सर्व कार्येषु सर्वदा।

गणेश चतुर्थी पर व्रत की कथा The story of fasting on Ganesh Chaturthi

सतयुग में जब महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक मटका बनाने वाला (कुम्हार) रहता था। एक बार उसने बर्तन बना कर अलावा लगाया पर अलावा पूर्ण रूप से नहीं पका बर्तन कच्चे रह गए। बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा तो उसने कहा कि इस में किसी बच्चे की बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र को पकड़ कर सकट चौथ के दिन अलावा में डाल दिया। लेकिन बालक की विधवा माता ने उस दिन गणेशजी की पूजा की थी। बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला तो गणेशजी से प्रार्थना की। सवेरे कुम्हार ने देखा कि अलावा पक गया | लेकिन कुम्हार ने देखा की बच्चा जीवित था। इस पर कुम्हार ने राजा के सामने अपना सच स्वीकार कर लिया। राजा ने उस बुढि़या से इस चमत्कार का रहस्य पूछा तो उसने गणेश पूजा के बारे में बताया। राजा ने भी इस सकट चौथ की महिमा को स्वीकार किया तथा पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया। प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकटहारिणी माना जाता है।

भारत में गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi in India

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार देश के विभिन्न भागों में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है परन्तु गणेश चतुर्थी का महा पर्व महाराष्ट्र में और भी बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणिक कथाओ के अनुसार इसी दिन भगवन गणेशजी का जन्म हुआ था । गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा करते है। भारत के कई प्रमुख शहरो व गाँवो में भगवान गणेशजी की बड़ी बड़ी मुर्तिया स्थापित की जाती है। इन मुर्तिया का नो दिन तक पूजन किया जाता है। बड़ी संख्या में आस पास के लोग दर्शन करने पहुँचते है। नो दिन बाद गाजे बाजे से श्री गणेश प्रतिमा को किसी तालाब नदी के जल में विसर्जित किया जाता है।

भारत में भगवन गणेश के मंदिर

भगवान शि‍व-पार्वती के पुत्र गणेश भगवान (गजानंद) को हर पूजा में सबसे पहले पूजा जाता है. भगवन गणेश (गणपति) जीवन के हर दुख व बाधा में याद किया जाता हैं | आज हम आपको बताने जा रहे है श्री गणेश भगवान के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जो इस प्रकार है –

  • रणथंभौर गणेश मंदिर – राजस्थान के रणथंभौर किले में
  • मोती डूंगरी गणेश मंदिर- मोतीडूंगरी जयपुर
  • श्री वरदविनायक- रायगढ़ जिले के कोल्हापुर महाराष्ट्र
  • सिद्धिविनायक मंदिर- मुंबई
  • श्री मयूरेश्वर मंदिर- पुणे
  • मनाकुला विनायगर मंदिर- पोंडिचेरी
  • खजराना गणेश मंदिर- खजराना इंदौर
  • श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई मंदिर- पुणे
  • विघ्नेश्वर गणपति- जूनर पुणे
  • चिंतामणि गणपति- हवेली ,पुणे
  • श्री बल्लालेश्वर मंदिर- नागोथाने मुंबई-पुणे हाइवे पर
  • मधुर महागणपति मंदिर- केरल
  • कनिपक्कम विनायक मंदिर- चित्तूर , आंध्रप्रदेश
  • श्री गिरजात्मज गणपति मंदिर- पुणे-नासिक
  • गणेश टोंक मंदिर- गंगटोक ,सिक्किम
  • महागणपति मंदिर- रांजणगांव , पुणे

भगवान श्री गणेशजी महाराज की आरती वंदना

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चार भुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।
माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी)
पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
(हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा),
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अँन्धे को आँख देत कोढ़िन को काया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया।
सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
(दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी )
(कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी)॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

 

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