गोवर्धन पूजा 2017 अन्नकूट पूजा विधि शुभ मुहूर्त और महत्व

पौराणिक कथानुसार गोवर्धन पूजा का त्यौहार द्वापर युग से ही प्रारम्भ हुआ था | गोवर्धन पूजा कार्तिक माह की प्रतिपदा तिथि को आता है | हिन्दू कलेंडर के अनुसार यह गोवर्धन पूजा का दिन अमावस्या के एक दिन पहले भी आ सकता है | यह सब प्रतिपदा तिथि के प्रारम्भ होने के समय पर निर्भर करता है | कहा जाता है की गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन आता है | इस वर्ष 20 अक्टूबर 2017 को गोवर्धन पूजा की जाएगी यह उत्सव भगवान श्री कृष्ण के द्वारा इन्द्र देवता को पराजित किये जाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है |

annakut festival

गोवर्धन या अन्नकूट पूजा दिन और दिनांक Govrdhana,Annakoot Puja day and date

गोवर्धन या अन्नकूट पूजा 2017 में शुक्रवार 20 अक्टूबर 2017 को मनाई जाएगी

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त Govrdhan Puja Mhurt

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त = 07:22 से 9: 29
अवधि = 2 घंटे 6 मिनट
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ = 19 अक्टूबर 2017 को 15:11 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त = 20 अक्टूबर 2017 को 16:07 बजे

गोवर्धन-पूजा मन्त्र Govardhan Puja Mantr

लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं व्यपोहतु।।

अन्नकूट पूजा Annakoot Pooja 2017

Annakoot Pooja

गोवर्धन पूजा के दिन को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है | कहा जाता है की इस गेहूँ, चावल अनाज, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों से बने भोजन बनाकर भगवान श्री कृष्ण को अर्पित किये जाते है |

गोवर्धन अन्नकूट पूजा विधि Govardhan Annakut Puja Vidhi

Govardhan Annakut Puja Vidhi

द्वापर युग से यह प्रथा चली आ रही है की गाय के गोबर का गोवर्धननाथ बनाकर उसकी पूजा की जाये | गोवर्धन के दिन भी ऐसा ही किया जाता है | और उस गोवर्धन को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है | कहा जाता है की इस दिन भगवन श्री कृष्ण ने ब्रज में इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाई थी | इस दिन भगवान इन्द्र का अहंकार ध्वस्त कर पर्वतराज गोवर्धन जी का पूजन करने का ऐलान किया था | इस दिन मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है | शाम के समय गोबर का गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है | इस दिन गाय की पूजा की जाती है | फूल माला, धूप, चंदन आदि से इनका पूजन किया जाता है|

कहा जाता है की यह त्यौहार ब्रजवासियो का प्रमुख त्यौहार है परन्तु यह त्यौहार पुरे भारत में बड़े हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है | इस दिन सभी भक्त अपने ईस्ट देवता भगवान श्री कृष्ण को छप्पन प्रकार के भोजन अर्पित करते है |और इस के अलावा रंगोली बनाते है चावलों को पर्वत के आकार में बनाकर भगवान श्री कृष्ण को अर्पित करते हैं | इस के बाद भगवन श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते है | इसके बाद इस प्रसाद को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं | अन्नकूट के इस पवित्र दिन चन्द्र दर्शन को अशुभ माना जाता है | इसलिए प्रतिपदा में द्वितीया तिथि के हो जाने पर इस पर्व को अमावस्या को ही मनाने की परंपरा है |

महाराष्ट्र की गोवर्धन पूजा Govardhan Pooja in Maharashtra

Govrdhan

महाराष्ट्र गोवर्धन पूजा को बालि प्रतिपदा या बालि पड़वा के रूप में मानते है । कहा जाता है की वामन जो कि भगवान विष्णु के अवतार थे | उसकी राजा बाली पर विजय और बाद में बालि को पाताल लोक भेजने के कारण इस दिन को बालि पड़वा कहा जाता है | गोवर्धन पूजा उत्सव गुजराती नव वर्ष के दिन के एक दिन पहले मनाया जाता है | जो कि कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के दौरान मनाया जाता है|

गोवर्धन पूजा महत्व Significance of Worshipping Govrdhan

द्वापर युग में जब भगवन श्री कृष्ण का अवतार हुआ था तब से गोवर्धन पूजा या अन्नकूट पूजा प्रारम्भ हुई ऐसा माना जाता है |गोवर्धन पूजा केबारे में एक कथा प्रसिद्ध है | कहा जाता है की ब्रजवासी देवराज इन्द्र की पूजा करते थे | जब देव राज इन्द्र प्रसन्न होते तो वर्षा होती थी जिससे अन्न पैदा होता था | तब भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासीयों को बताया की इससे अच्छे तो हमारे पर्वत है | जो हमारी गायो को भोजन देते है |

ब्रजवासीयों ने श्री कृष्ण की बात मान ली और गोवर्धन पर्वत की पूजा प्रारम्भ कर दी | तब इन्द्र देव ने देखा की यहाँ के लोग मेरी पूजा करने के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे है | तब इन्द्र देव क्रोधित हो गए और बादलो को गोकुल में जाकर बरसने का आदेश दे दिया | और ब्रजभूमि में मूसलाधार बारिश होने लगी |ऐसा देख कर ब्रजवासी श्री कृष्ण के पास गए | श्री कृ्ष्ण ने सभी को गोवर्धन पर्व की शरण में चलने को कहा |

जब सभी गोवर्धन पर्वत के निकट पहुंचे तो श्री कृ्ष्ण ने गोवर्धन को अपनी कनिष्का अंगूली पर उठा लिया | इस प्रकार सभी ब्रजवासी उस पर्वत के निचे चले गए | यह चमत्कार देखकर इन्द्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ | और इन्द्र देव ने इस पर कृ्ष्ण से क्षमा मांगी जब सात दिन बाद श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत नीचे रखा और ब्रजवासियो को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्यौहार मनाने को कहा | तब से लेकर आज तक यह त्यौहार मनाया जाता है |

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