Hanuman Jayanti हनुमान जयंती 2018 हनुमानजी की पूजा का शुभ मुहूर्त समय और हनुमान पूजा के दौरान ना करें ऐसी गलतियां

Hanuman Jayanti 2018 हनुमानजी महाराज का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन हुआ था | पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है की हनुमान जी माता अंजनी Anjani और वानर राज केसरी Raja Keshari के पुत्र थे | इसके अलावा हनुमानजी महाराज भगवान शिव के 11वे अवतार के रूप में जन्म लिया था | हनुमानजी Hanuman ji को कई नामो से जाना जाता है जैसे महावीर Mahaveer ,बजरंगबली,मारुती नंदन Maruti Nandan,पवनपुत्र Pawan Putr ,आदि | वायु- पुराण के अनुसार हनुमानजी मातंग ऋषी Matang Rishi के शिष्य थे | हनुमानजी ने भगवान श्रीसूर्य देव और नारदमुनि जी से कई प्रकार की विद्यया सीखीं थी | चैत्र मास की पूर्णिमा Chaitr Mass purnima के दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था | इसी कारण प्रति वर्ष हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है |

2018 मे हनुमान जयंती का शुभ दिन व दिनांक Hanuman Jayanti Shubh Day and Date

दोस्तों हनुमान जयंती Hanuman Jayanti हनुमानजी या बजरंग बली के जन्‍म दिवस के उपलक्ष्‍य में मनाया जाता है | प्रतेक वर्ष हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा Chaitr Mass purnima को मनाई जाती है | इस वर्ष 2018 में हनुमान जयंती 31 मार्च 2018 शनिवार को बड़े ही धूम धाम से सम्पूर्ण भारत में मनाई जाएगी |

हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त Hanuman Jayanti Shubh Muhurat

ज्‍योतिष के अनुसार हनुमान जयंती 30 मार्च 2018 को सायंकाल 07:35 से लेकर 31 मार्च 2018 को शाम 06:06 मिनट तक रहेगी।दोस्तों 31 मार्च को उदया तिथि होने के कारण यह पर्व 31 मार्च को बड़े धूम धाम से मनाया जाएगा। इसलिए 31 मार्च को शाम 6 बजे तक पूजा करना शुभ रहेगा | जबकि 31 मार्च की सुबह 9 बजे से 11 बजे तक राहुकाल रहेगा | शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि 31 मार्च 2018 की रात्रि को हनुमानजी महाराज की पूजा अर्चना करने से विशेष फल प्राप्त होता है क्योंकि चैत्र मास की पूर्णिमा की रात्रि में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था | इस दिन यानि हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा या सुन्दरकांड का पाठ करने से भक्त के सभी संकट दूर हो जाते है |

हनुमान जयंती पर पूजा सामग्री Hanuman Jayanti Puja Samgari

एक चौकी ,लाल कपडा ,भगवान राम की मूर्ति ,चावल (अक्षत ),तुलसी के पत्ते ,धुप ,दीपक घी से भरा हुआ ,ताजा फूल ,चंदन ,रोली ,मोली,गंगाजल ,गुड ,भुने हुए चने आदि लेकर हनुमान जयनी पर हनुमान जी महारज की पूजा करनी चाहिय |

हनुमान जयंती पूजा विधि Hanuman Jayanti Puja Vidhi

सबसे पहले हनुमान की मूर्ति को साफ़ चौकी जिस पर लाल कपडा बिछा होना चाहिय विराजमान करे | सबसे पहले प्रथम पूज्यनीय गणेशजी महाराज की आरधना करे | पूजा में ब्रह्मचर्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हनुमान जी की पूजा में चन्दन, केसरी, सिन्दूर, लाल कपड़े और भोग हेतु लड्डू अथवा बूंदी रखे | हनुमान की प्रतिमा की प्रतिष्ठा कर विधिपूर्वक पूजा करें | इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढायें | सबसे पहले हनुमान जी महाराज की आरती करे | उसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करे | इस दिन अगर संभव हो सके तो श्री रामचरित मानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जा सकता है|

हनुमान जी पूजा के दौरान ना करें ये गलतिया Do not do this during Hanuman ji worship

  • हनुमान जयंती के दिन अगर आप ने उपवास किया है तो नमक का प्रयोग न करे
  • जिस वस्तु का आप दान करते है उस वस्तु का सेवन न करे विशेष रूप से मिठाई
  • हनुमान जी महाराज बाल ब्रह्मचारी थे | इसलिए स्‍त्रियों को स्‍पर्श न करे
  • महिलाये हनुमान जी के दीपक प्रज्‍जवलित कर सकती है जबकि उनके चरण स्पर्श व तिलक न करे
  • इस दिन महिलाओं को हनुमान जी को वस्‍त्र अर्पित करना भी वर्जित है |
  • हनुमान जी को काले या सफ़ेद वस्त्र धारण करके पूजा नहीं करनी चाहिय
  • हनुमान जी की पूजा लाल वस्‍त्र पहन कर ही करें। ऐसा न करने पर पूजा का नकरात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • हनुमान जी की पूजा करने वाले व्यक्ति को मांस या मदिरा का सेवन करके भूल से भी हनुमान जी के मंदिर ना जाये
  • हनुमान जी के पूजन के दौरान गलत विचारों की ओर भी मन को भटकने न दें।
  • हनुमान जी की पूजा के समय मन अशांत और क्रोध में नहीं होना चाहिय ऐसा न करने पर उसका फल नहीं मिलता।
  • हनुमान जी की पूजा में खंडित मूर्ति की पूजा नहीं करे

हनुमान पूजा मंत्र: Hanuman Puja Mantr

मनोजवं मारुततुल्यवेगम्
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

हनुमान जी महाराज की आरती Aarti of Hanuman Maharaj

आरती किजे हनुमान लला की| दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर काँपे | रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥

अंजनी पुत्र महा बलदाई| संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए| लंका जाए सिया सुधी लाए॥

लंका सा कोट समुंद्र सी खाई| जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जाई असुर संहारे| सियाराम जी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पडे सकारे| लानि संजिवन प्राण उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम कारे| अहिरावन की भुजा उखारे॥

बायें भुजा असुर दल मारे| दाहीने भुजा सब संत जन उबारे॥
सुर नर मुनि जन आरती उतारे| जै जै जै हनुमान उचारे॥

कचंन थाल कपूर लौ छाई| आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमान जी की आरती गावे| बसहिं बैकुंठ परम पद पावें॥

लंका विध्वंश किए रघुराई| तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती किजे हनुमान लला की| दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

श्री हनुमान चालीसा दोहा और चौपाई Hanuman Chalisa Doha Choupai

दोहा: Doha

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौ पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।

चौपाई Choupai

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।।
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।
कंचन वरन विराज सुबेसा, कान्न कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे, कान्धे मूंज जनेऊ साजे।
शंकर सुमन केसरी नन्दन, तेज प्रताप महा जग वन्दन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिवे को आतुर।
प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया, राम-लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा।
भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज सवारे।।
लाए संजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए।
रघुपति कीन्हि बहुत बठाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावें, अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा।।
यम कुबेर दिगपाल कहाँ ते, कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।
जुग सहस्र जोजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानु।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि, जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं।
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुलारे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।
सब सुख लहे तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहूँ को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपे, तीनों लोक हाँक ते काँपे।
भूत पिशाच निकट नहीं आवें, महावीर जब नाम सुनावें।।
नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत वीरा।
संकट ते हनुमान छुड़ावें, मन क्रम वचन ध्यान जो लावें।।
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावे, सोई अमित जीवन फल पावे।।
चारों जुग परताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा।
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन्ह जानकी माता।
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावें, जनम जनम के दुख विसरावें।
अन्त काल रघुवर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई।
संकट कटे मिटे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बलवीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं।
जो सत बार पाठ कर कोई, छूटई बन्दि महासुख होई।।
जो यह पाठ पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।।

दोहा Doha

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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