कृष्ण जन्माष्टमी 2017 पूजा विधि व्रत कथा और कृष्ण जन्म की पूरी कहानी

जन्माष्टमी का त्योहार : इस वर्ष जन्माष्टमी का त्यौहार 14 और 15 अगस्त 2017 को मनाया जाएगा. जन्माष्टमी की कई दिन पहले से ही तैयारियां जोर शोर से आरंभ हो जाती है पूरे भारत वर्ष में इस त्यौहार का उत्साह देखने योग्य होता है. चारों और सारा वातावरण भगवान श्री कृष्ण के रंग में डूबा हुआ होता है | जन्माष्टमी पूर्ण आस्था एवं श्रद्दा के साथ मनाया जाता है|

पापियों का नाश करने के लिए भगवान विष्णु ने लिया क्रष्ण अवतार

ऐसे कहा जाता हैं की भगवान विष्णु ने पृथ्वी को पापियों और दुष्टो से मुक्त करने के लिए कृष्ण के रुप में अवतार लिया था | भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को घनघोर काली रात्रि मैं मध्यरात्रि को देवकी और वासुदेव के घर में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था | भगवान श्री कृष्ण माता देवकी की आठवीं सन्तान थे | देवकी की सात कन्याओ को महान पापी कंश ने मार दिया था | देवकी की आखिरी कन्या का को मरने पर आकाश से भविष्यवाणी हुई थी की – दुष्ट कंश तुझे मारने वाला गोकुल मैं पल रहा हैं क्योकि राकक्ष कंश के भय से वासुदेव ने रातों रात कृष्ण को मथुरा के गोकुल नगर मैं माता यशोदा के घर छोड़ आये थे | इसी लिए कृष्ण को यसोदा का नन्दलाल कहा जाता हैं क्योंकि भगवान कृष्ण माता देवकी की कोख से पैदा हुए थे लेकिन उनका पालन पोषण माता यशोदा ने ही किया था | भगवान् कृष्ण ने मामा कंश को मार कर सम्पूर्ण स्रष्टि को दानव राज से मुक्त कराया |

जन्माष्टमी का महत्व

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओं से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ। इस दिन को रोहिणी नक्षत्र का दिन भी कहते हैं। इस दिन देश के समस्त मंदिरों का श्रृंगार किया जाता है। कृष्णावतार के उपलक्ष्य में झांकियां सजाई जाती हैं।भगवान कृष्ण का श्रृंगार करके झूला सजाया जाता है। पुरुष और औरतें रात्रि १२ बजे तक व्रत रखतें हैं। रात को १२ बजे शंख और घंटों की आवाज से श्री कृष्ण के जन्म की खबर चारों दिशाओं में गूँज उठती है। भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारी जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है। प्रसाद ग्रहण कर व्रत को खोला जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव बड़ा ही धूम धाम से मनाया जाता हैं । नगर बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर में सुबह से ही दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लग जाता हैं । बच्चों की मेहंदी रचाओ और चित्रकला प्रतियोगिता होती हैं । जगह जगह जन्माष्टमी मेलो का आयोजन किया जाता हैं | नगर पंचायतों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की भव्य झांकी निकली जाती हैं । श्रद्धालुओं द्वारा झांकियों का भरपूर लुत्फ उठाया जाता हैं । महिलाओं द्वारा भजन गाए जाते हैं । और हर गाँव और शहर मैं कृष्ण लीला दिखाई जाती हैं | जन्माष्टमी महोत्सव का सबसे अच्छा  नजारा मथुरा नगरी मैं देखने को मिलता हैं

जन्माष्टमी व्रत विधि :

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत : जन्माष्टमी के दिन दोपहर में स्नान कर एक सूत घर (छोटा सा घर) बनाना चाहिए। उसे पद्मरागमणि और वनमाला आदि से सजाकर द्वार पर रक्षा के लिए खड्ग, कृष्ण छाग, मुशल आदि रखना चाहिए। इसके दीवारों पर स्वस्तिक और ऊं आदि मांगलिक चिह्न बनाना चाहिए। सूतिका गृह में श्री कृष्ण सहित माता देवकी की स्थापना करनी चाहिए। एक पालने या झूले पर भगवान कृष्ण की बाल गोपाल वाली तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सूतिका गृह को जितना हो सके उतना सजाकर दिखाना चाहिए। इसके बाद पूर्ण भक्तिभाव के साथ फूल, धूप, अक्षत, नारियल, सुपारी ककड़ी, नारंगी तथा विभिन्न प्रकार के फल से भगवान श्री कृष्ण के बाल रुप की पूजा करनी चाहिए। कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की मध्य रात्रि या आधी रात को हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी के दिन अर्द्ध रात्रि के समय भगवान कृष्ण जी के जन्म-अवसर पर आरती करनी चाहिए और प्रसाद बांटना चाहिए। व्रती को नवमी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर उसे दक्षिणा दे कर विदा करना चाहिए। जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्तों को नवमी के दिन ही व्रत का पारण करना चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा विधि :

  • जन्माष्टमी के दौरान की जाने वाली श्री कृष्ण पूजा में यदि षोडशोपचार पूजा के सोलह (१६) चरणों का समावेश हो तो उसे षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा विधि के रूप में जाना जाता है।
  • भगवान श्री कृष्ण का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीकृष्ण की नवीन प्रतिमा में करें।
  • भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करने के बाद, निम्न मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सम्मुख आवाहन-मुद्रा दिखाकर, उनका आवाहन करें।
  • भगवान श्री कृष्ण का आवाहन करने के बाद, मन्त्र पढ़ कर उन्हें आसन के लिये पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़े।
  • भगवान श्री कृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद, मन्त्र पढ़ते हुए पाद्य (चरण धोने हेतु जल) समर्पित करें।
  • मन्त्र पढ़ते हुए आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल समर्पित करें।
  • आचमन समर्पण के बाद,  मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएँ।
  • स्नान कराने के बाद,  मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को मोली के रूप में वस्त्र समर्पित करें।
  • वस्त्र समर्पण के बाद,  मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।
  • मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
  • निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिये आभूषण समर्पित करें।
  •  मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
  • मन्त्र का जाप करते  हुए भगवन कृष्ण के अङ्ग-देवताओं का पूजन करना चाहिये।
  • बाएँ हाथ में चावल, पुष्प व चन्दन लेकर प्रत्येक मन्त्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से श्री कृष्ण की मूर्ति के पास छोड़ें।
  •  मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को धूप समर्पित करें।
  • निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को दीप समर्पित करें।
  • मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को नैवेद्य समर्पित करें।
  • मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें।
  • मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को दक्षिणा समर्पित करें।
  • अब श्रीकृष्ण की प्रदक्षिणा (बाएँ से दाएँ ओर की परिक्रमा) के साथ मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को फूल समर्पित करें।
  • मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को नमस्कार करें।
  •  मन्त्र पढ़ते हुए पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीकृष्ण से क्षमा-प्रार्थना करें

जन्माष्टमी व्रत कथा

श्रीकृष्ण जन्म कथा : द्वापर युग में जब पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार बढने लगा तो पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपने उद्दार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई। ब्रह्मा जी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान विष्णु जी के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवन विष्णु अपनी शैया पर सो रहे थे। स्तुति करने पर भगवान् की निद्रा भंग हो गई। भगवान ने ब्रह्मा और सब देवताओं से जब आने का कारण पूछा तो पृथ्वी ने उनसे यह आग्रह किया कि वे उसे पाप के बोझ से बचाएँ। यह सुनकर विष्णु जी बोले- मैं बज्र मंडल में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से जन्म लूँगा। आप सब देवतागण बज्र में जाकर यादव वंश की रचना करो। इतना कहकर भगवन अंतर्ध्यान हो गए। इसके बाद सभी देवताओं ने यादव वंश की रचना की। द्वापर युग के अंत में मथुरा में उग्रसेन राजा राज्य करता था। उसके पुत्र का नाम कंस था। कंस ने उग्रसेन को बलपूर्वक सिंहासन से उतारकर खुद राजा बन गया। कंस की बहन देवकी का विवाह यादव कुल में वासुदेव के साथ निश्चित हो गया। जब कंस देवकी को विदा करने के लिए रथ के साथ जा रहा था तो आकाशवाणी हुई हे कंस ! जिस देवकी को बड़े प्यार से विदा करने जा रहा है उसका आठवां पुत्र तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। आकाशवाणी की बात सुनकर कंस क्रोधित हो गया और देवकी को मारने के लिए तेयार हो गया। उसने सोचा न देवकी होगी न उसका पुत्र। तब वासुदेव जी ने कंस को समझाया की तुम्हें देवकी से तो कोई भय नहीं है। देवकी की आठवीं संतान मैं तुम्हें सौंप दूंगा। वासुदेव कभी झूठ नहीं बोलते थे तो कंस ने वासुदेव की बात स्वीकार कर ली। वासुदेव-देवकी को कारागार में बंद कर दिया गया। उसी समय नारद जी वहां पहुंचे और कंस से कहा की ये कैसे पता चलेगा की आठवां गर्भ कौन सा है। गिनती प्रथम से शुरू होगी या अंतिम से। कंस ने नारद के परामर्श पर देवकी के गर्भ से पैदा होने वाले सभी बालकों को मारने का निश्चय कर लिया। इस प्रकार कंस ने देवकी के ७ बालकों की हत्या कर दी।

माता देवकी की आठवीं सन्तान ने जब लिया अवतार

भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही जेल की कोठरी में प्रकाश फैल गया। वासुदेव-देवकी के सामने शंख,चक्र,गदा और पदमधारी चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट कर कहा कि-अब मैं बालक का रूप धारण करता हूँ तुम मुझे गोकुल के नन्द के यहाँ पहुंचा दो और उनकी अभी-अभी जन्मी कन्या को लाकर कंस को सौंप दो। तत्काल वासुदेव की हथकड़ियाँ खुल गयीं,दरवाजे अपने आप खुल गए,पहरेदार सो गए। वासुदेव श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर गोकुल की और चल दिए। रास्ते में यमुना श्रीकृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए बढने लगी। भगवान ने अपने पैर लटका दिए। चरण स्पर्श के बाद यमुना घट गई। वासुदेव यमुना पार करके गोकुल के नन्द के यहाँ गए। बालक कृष्ण को यशोदा की पास सुलाकर कन्या को लेकर वापिस कंस की कारागार में आ गए। जेल के दरवाजे बंद हो गए, वासुदेव के हाथों में फिर से हथकड़ियाँ लग गयी। कन्या के रोने पर कंस को खबर दी गयी। कंस ने कारागार में जाकर कन्या को लेकर पत्थर पर पटक कर मारना चाहा परन्तु वह कंस के हाथों से छूटकर आकाश में उड़ गई और देवी का रूप धारण कर बोली, हे कंस! तुझे मारने वाला तो गोकुल में जन्म ले चुका है। यह सुनकर कंस व्याकुल हो गया और उसने कृष्ण को मारने के लिए कई राक्षस भेजे लेकिन श्रीकृष्ण ने अपनी आलौकिक माया से सभी का संघार कर दिया। बड़े होकर श्रीकृष्ण ने कंस को मारकर पुन: उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया।

कृष्ण जन्माष्टमी पर पुण्यफल प्राप्ति के लिए करे दान

श्रीकृष्ण की पुण्य तिथि को तभी से सारे देश में हर्षौल्लास से मनाया जाता है। भादव श्रीकृष्णाष्टमी को जन्माष्टमी कहते हैं। इस दिन की रत को यदि रोहिणी नक्षत्र हो तो कृष्ण जयंती होती है। रोहिणी नक्षत्र के आभाव में केवल जन्माष्टमी व्रत का ही योग होता है। इस दिन सभी स्त्री-पुरुष नदी में तिल मिलाकर नहाते हैं। पंचामृत से भगवान कृष्ण की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है। उन्हें सुन्दर वस्त्रों व आभूषणों से सजाकर सुन्दर झूले में विराजमान किया जाता है। धूप-दीप पुष्पादि से पूजन करते हैं। आरती उतारते हैं और माखन-मिश्री आदि का भोग लगाते हैं। हरी का गुणगान करते हैं। १२ बजे रात को खीरा चीरकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म करते हैं। इस दिन गौ दान का विशेष महत्त्व होता है। इस अकेले व्रत से करोड़ों एकादशी व्रतों का पुण्यफल प्राप्त होता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भारत में मनाया जाने वाला एक प्रसिद त्यौहार है। यह अगस्त या सितम्बर के महीने में आता है। इस दिन भक्त लोग भजन गाते हैं। दिन भर तरह-तरह के व्यंजन बनाये जाते हैं तथा रात को कृष्ण प्रकट के बाद उन्हें भोग लगाते हैं और फिर इन व्यंजनों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यह त्यौहार भारत में ही नहीं विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भी बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से जगमगा उठती है। कान्हा की रासलीलाओं को देखने के लिए भक्त दूर-दूर से मथुरा पहुँचते हैं। मंदिरों को ख़ास तौर पर सजाया जाता है। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झूलाया जाता है। जगह-जगह रासलीलाओं का आयोजन किया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी मन्त्र “नमो भगवते वासुदेवाय”

जय श्री कृष्ण ।

You Must Read

रणथम्भौर दुर्ग का मुख्य आकर्षण महल छतरी मंदिर दरगाह शासक की ... राजस्थान के महत्वपूर्ण किले और महलों को मुगलों की ...
Sundar Pichai Biography Life Achievements Wife, Family and P... सुन्दर पिचाई की आत्मकथा Sundar Pichai's Autobiogra...
दुर्गाष्टमी महानवमीं पूजन विधि कन्या पूजन जानिए कन्या पूजन क... दुर्गाष्टमी महानवमीं पूजन : नवरात्र के नौ दिनों तक...
Jio 4G Volte Feature Mobile Smartphone Online Booking On 24 ... रिलायंस मोबाईल कम्पनी Jio 4G Volte Mobile का 15 अग...
श्रावण मास का महत्व कथाएँ पूजन विधि और जाने सोमवार के व्रत क... श्रावण मास का महत्व : हिंदु पंचांग के अनुसार सभी म...
Prishkar Coaching REET Answer Key 2018 Subject Wise (Level 1... REET Answer Key 2018 Prishkar Coaching Jaipur : He...
रक्षाबंधन गीत राखी पर भाई बहन के प्यार भरे स्पेशल हिट गीत... दोस्तों फिल्में और फ़िल्मी गीत हमारे समाज का आइना ह...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *