कजरी तीज 2017 का दिन व्रत पूजा कहानी फल और महत्व

कजरी तीज का त्यौहार उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार राज्यों में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। कजरी तीज का त्यौहार नव विवाहित सुहागिन महिलाओं का विशेष त्यौहार है। इसे 3 नामो से जाना जाता है हरितालिका तीज, कजरी / कजली तीज , हरतालिका तीज के नाम से भी जाना जाता है। कजरी तीज में विशेष प्रकार के आयोजन जैसे गान और शिव-पार्वती जी की पूजा आदि कार्यक्रम का आयोजित होते है।

क्या है कजरी तीज और क्यों इसे कजरी तीज कहते है What is Kajaree Teej and why is it called Kajaree Teej

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी या कजली तीज प्रतेक वर्ष आती है | इस दिन की मान्यता है की इस दिन आसमान में काली-काली घटाये छाती है | और बादल गरजते है | इसी कारण इसे कजरी या कजली तीज कहते है | इस पर्व के दिन परविद्धा तृतीया ग्राह्य है। इस तिथि के दिन अगर पूर्वाभाद्रपद या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र हो तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। भाद्रपद के दो नक्षत्रों में से उत्तराभाद्रपद शनि का नक्षत्र है। इस नक्षत्र में भगवान विष्णु के श्याम वर्ण लिए विग्रह का पूजन करने का विधान बताया गया है। किसी भी भाद्रपद नक्षत्र में शनिदेव व भगवान श्रीकृष्ण के पूजन का विधान है। इस में कहा गया है की कजली का मतलब काले रंग से है | शास्त्रों में शनिदेव का स्थान काले मेघों के बीच माना गया है कहा जाता है की शब्द भाद्रपद से ही शनि की बहन भद्रा उत्तपन हुई थी। और शब्द भाद्रपद का अर्थ है जिनके श्री चरण सुंदर हों अर्थात श्रीकृष्ण व शनिदेव।

कजरी तीज 2017 का दिन व दिनांक Day and date of Kajaree Teej 2017

कजरी या कजली तीज का यह त्यौहार 10 अगस्त 2017 को मनाया जाएगा। इस दिन नव विवाहित महिलाये कजरी खेलती है |कजरी तीज के दिन महिलाये उपवास करती है और बाद जौ, गेहूँ, चावल, सत्तू ,घी, गुड़ और मेवा से बने विशेष पकवान चांद को चढ़ाने के बाद स्वयं ग्रहण करती हैं। इस दिन मिट्टी से बने शिव- पार्वती की प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए। कजरी या कजली तीज हिन्दू धर्म की नव विवाहित महिलाओं का विशेष त्यौहार है।

क्या करती है महिलाये कजरी तीज को What does women do to Kajaree Teej

पुरनी मान्यता है की कजरी या कजली तीज के कुछ दिन पहले महिलाएं पास की नदी में स्नान करने जाती हैं और वहां से नदी की मिट्टी लाती है। इस मिट्टी का पिंड बनाकर उसमें जौ बोती है जिसमें से कुछ समय बाद वो बीज अंकुरित होते है | इस के बाद महिलाएं अपने भाई और बड़ों के कान पर इन पौधों को रखकर आशीर्वाद लेती हैं।

कजरी तीज का महत्व Importance of Kajaree Teej

शिव महा महापुराण में लिखा है की कजरी तीज के दिन विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लम्बी उम्र के लिए और अविवाहित महिलाएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत उपवास रखती हैं और बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। शास्त्रों में यह भी लिखा है कि विधवा भी इस व्रत को रख सकती हैं।

कजरी तीज व्रत का फल Kajaree Teej fast

शिव महा महापुराण में लिखा है कि कजरी तीज कजली तीज का व्रत उपवास रखने वाली स्त्रियां महिलये जीवन के सभी सुखों को प्राप्त कर शिव लोक जाती हैं। इसके साथ ही उन्हें सुख- शांति,सौभाग्य, समृद्धि, की प्राप्ति होती है। और कजरी तीज के प्रभाव से मानव के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की सहज प्राप्ति भी होती है।

कजरी तीज के मन्त्र Kajari Teej Mantr

मां भवानी और श्री राधा-कृष्ण और शनिदेव का विधिवत षोडशोपचार पूजा करें उनकी दिव्य कथाओं एवं चरित्रों का श्रवण करते हुए इन मंत्रो का उचारण करे जो निम्न है
ॐ गौरीशंकराय नमः,
ॐ नमो भगवाते वसुदेवाय,
ॐ शनिदेवाय नमः”,

कजली तीज कथा Kajaree Teej Katha

एक बार की बात है एक साहूकार के सात बेटे थे | सतुदी तीज के दिन उसकी बड़ी बहु नीम की पूजा कर रही थी | तभी उसके पति की मोत हो जाती है | थोड़े दिन बाद उसके दुसरे पुत्र की सादी हो जाती है | और उसकी बहु भी नीम की पूजा कर रही थी तभी उसके पति की मोत हो जाती है | इस प्रकार उसके सभी छ: की मोत होजाती है |उसके बाद सातवे पुत्र का विवहा होता है | और सतुदी तीज के दिन उसकी पत्नी कहती है की वह आज नीम के पेड़ की जगह उसकी टहनी की पूजा करेगी | जब वह पूजा कर रही थी तब देखा की उस साहूकार के 6वो बेटे अचानक वापस आ जाते है | परन्तु वो किसी को दिखाई नहीं देते है | तब वह अपनी सभी जेठानियो को
बुलाकर कहती है की नीम के पेड़ की पूजा करो और पिंडा को काटो तब वे सब बोलती है की हम पूजा कैसे कर सकती है | जबकि उनके सुहाग यहाँ नहीं है तब उनको साहूकार की छोटी बहु बताती है की उनके पति जिन्दा है | तब वो नीम की टहनी की पूजा अपने पति के साथ करती है | इस के बाद यह बात सब जगह फ़ैल गई की इस तीज को नीम के पेड़ की जगह नीम की टहनी की पूजा करनी चाहियें |

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