करवा चौथ 2017 पूजन विधि कहानी और पूजा की सामग्री

करवा चौथ2017 :  का व्रत (उपवास) कार्तिक मास के हिन्दू माह में कृष्ण पक्ष चतुर्थी के दिन किया जाता है और अमान्ता कैलेंडर के अनुसार गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसके बाद अश्विन का महीना आता है जो करवा चौथ के दौरान चालू होता है। हालांकि यह केवल उसी महीने का नाम है जो अलग है और सभी राज्यों में करवा चौथ एक ही दिन मनाई जाती है।

करवा चौथ 2017

करवा चौथ का महत्व Importance of Karwa Chauth

करवा चौथ व्रत

करवा चौथ कई देशों में हिंदू महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले एक दिवसीय त्योहार है | करवा चौथ का दिन भगवान गणेश के लिए मनाया गया उपवास का दिन । करवा चौथ का उपवास विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के लम्बी उम्र के लिए मनाया जाता है। विवाहित महिला भगवान शिव सहित भगवान गणेश की पूजा करती हैं और चंद्रमा को देखने के बाद उपवास तोड़ती हैं। करवा चौथ का उपवास रात में चंद्रमा के देखने तक सूर्योदय के बाद किसी भी भोजन या पानी की एक बूंद के बिना मनाया जाता है।

यह त्योहार पूर्णिमा के बाद चौथे दिन आता है, कार्तिक कैलेंडर माह के हिंदू कैलेंडर में। कभी-कभी, अविवाहित महिलाओं को उनके मंगेतर या वांछित पति के लिए उपवास में शामिल होती हैं करवा चौथ का व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालना कर सकती है ।


करवा चौथ के देवी देवता Karva Chautha goddess God

करवा चौथ के देवी देवता

देवी पार्वती करवा चौथ का मुख्य देवी है। देवी पार्वती के साथ, उसके अन्य सदस्य भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। देवी पार्वती ,चौथ माता यानी देवी चौथ माता .

Puja Muhurat and Chandrodaya time for Karwa Chauth

करवा चौथ पूजा मुहूर्त= 05:55 से 07:09
अवधि = 1 घंटा 14 मिनट
करवा चौथ दिन पर चंद्रमा = 08:14
चतुर्थी तिथी शुरू है = 04:58 8 अक्टूबर 2017
चतुर्थी तिथी समाप्ति = 02:16 9 अक्टूबर 2017


Karwa Chouth Pojan Samgri करवा चौथ पूजन सामग्री की सूची List of worship materials

इस व्रत में मुख्य रूप से गौरी व गणेश का पूजन किया जाता है। जिसमें पूजन सामग्री का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। जो निम्न प्रकार है |

करवा चौथ पूजन सामग्री की सूची

1. चंदन  2. शहद 3. अगरबत्ती 4. पुष्प  5. कच्चा दूध  6. शक्कर 7. शुद्ध घी 8. दही  9. मिठाई 10. गंगाजल  11. कुंकू 12. अक्षत (चावल)  13. सिंदूर 14. मेहंदी 15. महावर 16. कंघा 17. बिंदी  18. चुनरी 19. चूड़ी 20. बिछुआ 21. मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन 22. दीपक 23. रुई 24. कपूर  25. गेहूं 26. शक्कर का बूरा 27. हल्दी 28. पानी का लोटा 29. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी 30. लकड़ी का आसन 31. चलनी 32. आठ पूरियों 33. हलुआ 34. दक्षिणा (दान) के लिए पैसे, इ‍त्यादि।


करवा चौथ के लिए रस्में Rituals for Karwa Chauth

करवा चौथ की रस्मे

करवा चौथ का उपवास महिला सामूहिक रूप से एक गोल घेरे में बेठ कर करवा चौथ की पूजा करती है गाना गाते हुए फेरी देती है | उपवास वाली महिलाएं करवा चौथ कहानी सुनती है और पूजा करने के बाद सूर्य भगवन की ओर पानी की अर्क देती है


करवा चौथ व्रत की पूजन विधि Karwa Chauth Puja Vidhi Karva Chauth Vrat Vidhi

करवा चौथ पूजा विधि

बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें । मूर्ति के अभाव में सुपारी पर सुआनाल बाँधकर देवता की मूर्ति स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें। महिलाएं देवी गौरा और चौथ माता की पूजा करती हैं


करवा चौथ पूजन हेतु मंत्र Mantra for Karva Chautha Puja

‘ॐ शिवायै नमः’ से पार्वती का, ‘ॐ नमः शिवाय’ से शिव का, ‘ॐ षण्मुखाय नमः’ से स्वामी कार्तिकेय का, ‘ॐ गणेशाय नमः’ से गणेश का तथा ‘ॐ सोमाय नमः’ से चंद्रमा का पूजन करें।


चौथ माता का मंदिर Temple of Chauth Maata

चौथ माता मंदिर

भारत देश में वैसे तो चौथ माता जी के कई मंदिर स्थित है, लेकिन सबसे प्राचीन एवं सबसे अधिक ख्याति प्राप्त मंदिर राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गाँव में स्थित है। चौथ माता के नाम पर इस गाँव का नाम बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा पड़ गया। चौथ माता के मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी।


करक चतुर्थी क्या है What is Karak Chaturthi

करवा चौथ दिन को (करक चतुर्थी) भी कहा जाता है। मिट्टी के बर्तन के लिए संदर्भित करता है जिसके माध्यम से अर्घ (अर्घ) के रूप में जाना जाता है, जो पानी की पेशकश, चंद्रमा के लिए किया जाता है। करवा की पूजा के दौरान बहुत महत्वपूर्ण है और यह भी ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान के रूप में दिया जाता है।


करवा चौथ मूल महत्व Karva Chauth Basic Importance

करवा चौथ कब है

कार्तिक महीने के दौरान कार्तिक चतुर्थी के साथ करवा चौथ दिन आता है। काराका और करवा दोनों जो पूजा के दौरान काम में लिया जाता है और परिवार के भलाई के लिए दान के रूप में दिया जाता है। केवल महिलाओं को करवा चौथ पर उपवास करने का अधिकार है | क्योंकि काराका चतुर्थी के उपवास लाभ केवल महिलाओं को ही मिलता हैं।

करवा चौथ पर उपवास न केवल पति के कल्याण और लंबे जीवन के लिए किया जाता है बल्कि पुत्रों, पोते, धन और परिवार की समृद्ध समृद्धि के लिए भी किया जाता है | उपवास और पूजा जो काराका चतुर्थी पर की जाती है, मुख्यतः देवी पार्वती को समर्पित है। देवी पार्वती को अखंड सौभाग्यवती की पूजा पहले भगवान शिव, भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश के बाद की पूजा के दौरान की जाती है। महिलाएं करवी चौथ के दिन देवी गौरा और चौथ माता की भी पूजा करती हैं जो देवी पार्वती हैं।


करवा चौथ की कथा या कहानी Karva Chauth’s story

करवा चौथ व्रत कथा

बहुत समय पहले की बात है की एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी। शाम को भाई जब अपना व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल लग रही थी। सभी भइयो ने अपनी बहन से खाने का आग्रह किया |

बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्ग देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं गई और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो। इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्ग देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्ग देकर खाना खाने बैठ जाती है।

करवा चौथ की कथा

वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।
उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है। इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है।

यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है। सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है।

भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है। अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।


करवा चौथ की दूसरी कथा Second story of Karwa Chauth

एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा।उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया।

करवा चौथ की दूसरी कथा

मगर को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ। यमराज बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।


करवा चौथ की तीसरी कथा Curva Chauth’s Third Stories

एक बार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर गए। दूसरी तरफ द्रोपदी बहुत परेशान थीं। अर्जुन की कोई खबर न मिलने पर द्रोपदी ने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा बहना इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था। तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया।

इस व्रत को करने से स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी। द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से हिन्दू महिलाएँ अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ व्रत करती हैं।

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