नाग पंचमी की पूजा विधि व्रत कथा और महत्व

नागपंचमी : नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योंहार हैं | नाग पंचमी श्रावण मॉस के शुक्ल पक्ष की पंचमी (27 जुलाई )को मनाया जायेगी | नागपंचमी के दिन नाग देवता अथवा सर्प की पूजा की जाती है। इसी कारण नागपंचमी कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं इसी कारण इस दिन नाग पूजा करने का विधान है। नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने से लक्ष्मी रूपी धन की प्राप्ति होती है साथ ही आध्यात्मिक शक्ति का भी विकास होता है। | नाग पंचमी के दिन राजस्थान मैं कलयुग के देवता हिरामलजी महाराज की बड़े ही धूम धाम से पूजा की जाती हैं | नाग पंचमी के दिन शिव मंदिरों में पूजा की जाती हैं और बड़े बड़े मेलों का आयोजन किया जाता हैं,और कई प्रकार के खेलों का और मनोरंजनो का आयोजन किया जाता हैं | नाग पंचमी के दिन महिलाओं और पुरुषो द्वारा व्रत भी किया जाता हैं |

नागपंचमी का महत्व :

नागपंचमी पर नागों की पूजा कर आध्यात्मिक शक्ति और धन मिलता है. लेकिन इस पूजा के दौरान कुछ बातों का ख्याल रखना है बेहद जरूरी हैं , श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। और नागों और सर्पों की पूजा की जाती हैं। हिंदू धर्मग्रन्थों में नाग को देवता माना गया है प्राचीन कथाओं के अनुसार शेषनाग के फन पर पृथ्वी टिकी है। भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर सोते हैं। शिवजी के गले में सर्पों का हार है। कृष्ण जन्म पर नाग की सहायता से ही वासुदेवजी ने यमुना पार की थी। यहां तक कि समुद्र-मंथन के समय देवताओं की मदद भी वासुकी नाग ने ही की थी। इसलिय यह दिन नाग देवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है ।वर्षा ऋतु में वर्षा का जल धीरे-धीरे धरती में समाकर सांपों के बिलों में भर जाता है। इसलिए श्रावण मास में सांप सुरक्षित स्थान की खोज में अपने बिल से बाहर निकलते हैं। संभवतः उस समय उनकी रक्षा करने और सर्पभय व सर्पविष से मुक्ति पाने के लिए भारतीय संस्कृति में इस दिन नाग के पूजन की परंपरा शुरू हुई।

नागपंचमी के दिन नागदेव का पूजन

इस दिन सांप मारना मना है। पूरे श्रावण माह विशेष कर नागपंचमी को धरती खोदना निषिद्ध है। इस दिन व्रत करके सांपों को खीर खिलाई व दूध पिलाया जाता है। कहीं-कहीं सावन माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी को भी नागपंचमी मनाई जाती है। खास तौर पर इस दिन सफेद कमल पूजा में रखा जाता है।

नागपंचमी के दिन क्या करना चाहिए

– इस दिन नागदेव के दर्शन अवश्य करना चाहिए।

– बांबी (नागदेव का निवास स्थान) की पूजा करना चाहिए।

– नागदेव को दूध भी पिलाना चाहिए।

– नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि नागदेव को सुगंध प्रिय है।

– ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा का जाप करने से सर्प दोष दूर होता है।

नाग देव पूजन विधि

सुबह उठकर घर की अच्छे से साफ़ सफाई स्नान करके फ्रेश हो जाये और धुले हुए साफ एवं स्वच्छ कपड़े धारण करें। नाग पूजन के लिए सेंवई-चावल आदि ताजा भोजन बनाएं। कुछ भागों में नागपंचमी से एक दिन पहले ही भोजन बना कर रख लिया जाता है और नागपंचमी के दिन बासी (ठंडा) खाना खाया जाता है। इसके बाद दीवार पर गेरू पोतकर पूजन का स्थान बनाया जाता है। फिर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती जाती हैं |और उसमें कई नागदेवों की आकृति बनाते हैं कुछ जगहों पर काठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों बगलों में पांच फन वाले नागदेव अंकित कर पूजते हैं |सर्वप्रथम नागों की बांबी में एक कटोरी दूध चढ़ा आते हैं। फिर दीवार पर बनाए गए नागदेवता की दही, दूर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से पूजन कर सेंवई व मिष्ठान से उनका भोग लगाते हैं।
ततपश्चात आरती करके कथा का श्रवण किया जाना चाहिए।

नाग पंचमी व्रत कथा

एक समय एक किसान था जिसके दो पुत्र तथा एक पुत्री थी. एक दिन जब वह अपने खेत में हल चला रहा था, उसका हल सांप के तीन बच्चों पर से गुजरा और सांप के बच्चों की मौत हो गई. अपने बच्चों की मौत को देख कर उनकी नाग माता को काफी दुख हुआ.. नागिन ने अपने बच्चों की मौत का बदला किसान से लेने का निर्णय किया. एक रात को जब किसान और उसका परिवार सो रहा था, नागिन ने उनके घर में प्रवेश कर गई. उसने किसान, उसकी पत्नी और उसके दो बेटों को डस (काट) लिया. इसके परिणाम स्वरूप सभी की मौत हो गई. किसान की पुत्री को नागिन ने नहीं डसा था जिससे वह जिंदा बच गई. दूसरे दिन सुबह नागिन फिर से किसान के घर में किसान की बेटी को डसने के इरादे से गई. किसान की पुत्री काफी बुद्धिमान थी . उसने नाग माता को प्रसन्न करने के लिए कटोरा भर कर दूध दिया तथा हाथ जोड़कर प्रार्थना की नागिन उसके पिता को अपने प्रिय पुत्रों की मौत के लिए माफ कर दे. उसने नागिन का स्वागत किया और उसके माता-पिता को माफ कर देने की प्रार्थना की. नाग माता इससे काफी प्रसन्न हुई तथा उसने किसान, उसकी पत्नी और उसके दोनों पुत्रों को, जिसे उसने रात को काटा था, जीवन दान दे दिया. इसके अलावा नाग माता ने इस वायदे के साथ यह आशीर्वाद भी दिया कि श्रावण शुक्ल पंचमी को जो महिला सांप की पूजा करेगी उसकी सात पीढ़ी सुरक्षित रहेगी .वह नाग पंचमी का दिन था और तब से सांप दंश से रक्षा के लिए सांपों की पूजा की जाती है.

नागपंचमी पूजा मंत्र : Nag Panchami puja Mantra

सर्वे नागाः प्रीयंतां में ये केचित पृथिवीतले।

ये च हेलिमरीचिस्था येsन्तरे दिवि संस्थिताः।।

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।

ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु नमः।।

अन्नतं वासुकिं शेषम पद्मनाभं च कम्बलं।

शंख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियम तथा।

एतानि नाव नामानि नागानां च महात्मनाम।।

सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।

तस्य विषभयं नास्ति सवर्त्र विजयो भवेत्।।

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