ओणम 2017 थिरु ओणम के त्योंहार पर निबन्ध कहानी और ओणम के दिन राजा महाबली का केरल मैं प्रवेश

Thiru Onam Festival 2017 : Onam is a Important festival of Kerala.This day, the houses are decorated with beautiful flowers.Women and Girls are enjoying dance songs this day and men join in swimming and boat races.It is said that on this day their King Mahabali comes from Patal Lok to bless them.It is celebrated in the memory of ancient King Mahabali. The festival runs for ten days, in these ten days the rangoli of flowers is made in the houses.This festival is related to harvesting of crops. The festival celebrates this festival with all the people of the community in the city. Onam is celebrated in the first month of Malayalam calendar in the beginning of ‘Chingam’. This festival runs from four to ten days in which the first and the tenth day is the most important.

Happy onam 2017

थिरु ओणम त्योहार 2017 केरल

ओणम केरल का एक प्रमुख त्योहार है। इस बार ओणम 4 सितम्बर 2017 सोमवार को हैं |इस दिन सुन्दर फूलों से घरों को सजाया जाता है। महिलायें और किशोरियाँ इस दिन नाचने गाने में मस्त रहती हैं और पुरूष तैरने और नौका-दौड़ में सम्मिलित होते हैं। कहा जाता है कि ओणम के दिन इनके राजा महाबली इन्हें आशीर्वाद देने पाताल लोक से आते हैं। यह प्राचीन राजा महाबली के याद में मनाया जाता है। यह पर्व दस दिनों तक चलाता है, इन दस दिनों में घरों में फूलों की रंगोली बनाई जाती है। यह त्योहार फसलों की कटाई से संबंधित है। शहर में इस त्योहार को सभी समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। ओणम मलयालम कैलेंडर के पहले माह ‘चिंगम’ के प्रारंभ में मनाया जाता है। यह पर्व चार से दस दिनों तक चलता है जिसमें पहला और दसवाँ दिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है।

As per the Malayalam calendar, the dates for 2017 and their significance are as follows:

  • In 2017, Thiru Onam is on September 4.
  • In 2018, Thiru Onam is on August 24.
  • In 2019, Thiru Onam is on September 11.

मलयालम कैलेंडर के अनुसार ओणम 2017 की तारीखें और उनका महत्व इस प्रकार है |

  1. 2017 में, थिरु ओणम 4 सितंबर को है
  2. 2018 में, थिरु ओणम 24 अगस्त को है
  3. 2019 में, थिरु ओणम 11 सितंबर को है

Onam Festival Story in Hindi

Onam is an ancient festival, which is still celebrated with great joy in modern times. Along with Onam, festival of rice and rains of flowers is celebrated in Kerala in the month of Chingam. The story of Onam festival is associated with Asur king Mahabali and Lord Vishnu. People believe that during the Onam festival, King Mahabali comes to Kerala state every year to meet his people, to know their wellbeing, happiness and prosperity. This festival is celebrated in honor of King Mahabali

ओणम के त्योंहार की कहानी

ओणम एक प्राचीन त्योहार है, जो बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है |ओणम के साथ साथ चिंगम महीने में केरल में चावल की फसल का त्योहार और वर्षा के फूल का त्योहार मनाया जाता है | ओणम त्यौहार की कहानी असुर राजा महाबली एवं भगवान् विष्णु से जुड़ी हुई है | लोगों का मानना है कि ओणम त्यौहार के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने उनके हाल चाल खुशहाली जानने के लिए हर साल केरल राज्य में आते है | राजा महाबली के सम्मान में यह त्यौहार यहाँ मनाया जाता है |

ओणम पर निबंध Onam Essay in Hindi

भारत विविधता मैं एकता वाला देश हैं | यहाँ पर भिन्न भिन्न प्रकार के लोग और विभिन्न प्रकार की जातियां निवश करती हैं | इस विविधता मैं एकता वाले भारत देश की संस्क्रती अपने आप मैं अलोकिक हैं अविस्मर्णीय हैं जिसका वर्णन करते हुए हम थकते नहीं हैं | भारत एक रमणीय देश हैं यहाँ पर हर दिन हर महीने कोई न कोई त्योंहार मनाया जाता हैं जैसे – होली दीवाली,रक्षाबंधन,तीज आदि ,इसी प्रकार ओणम भी एक खाश त्योंहार हैं ओंनम केरला का प्रसिद्ध त्योंहार हैं | मलयाली और तमिल लोग ओणम के त्योंहार को बड़ा ही धूम धाम से मनाते हैं |

ओणम का त्योंहार क्यों और कैसे मनाया जाता हैं इसकी कहानी के बारे मैं हम बताने जा रहे हैं | केरल प्रदेश पर राज्य करने वाला महान राजा महाबलि था। कहा जाता है कि महाबलि महाप्रतापी, आदर्श, धर्मपरायण, प्रजावत्सल एवं सत्पुरूष थे। उनके राज्य में सुख-समृद्धि की बहुलता थी। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि वे राजा नहीं भगवान बन गए अपनी प्रजा के लिए। राज्य में हर जगह उनकी पूजा होने लगी। देवता भला इसे कैसे सह पाते। देवराज इन्द्र ने षड्यन्त्र किया। उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता माँगी। विष्णु वामन का वेश बनाकर महाबलि की धरती पर उतरे। पहले तो उन्होंने महाबलि को वचनबद्ध कर लिया फिर उससे तीन पग जमीन माँगी।

राजा महाबलि की परीक्षा

महादानी महाबलि के लिए तो यह साधारण सी बात थी। परन्तु जैसे ही राजा ने इसकी हामी भरी विष्णु ने अपना विराट रूप ले लिया। एक पग में उन्होंने सारी धरती नाप लीं और दूसरे में आकाश, तीसरे पग के लिए कुछ बचा ही नहीं। महाबलि ने तुरन्त ही अपना शरीर अर्पित कर दिया। अपना सब कुछ दान करने के बाद अब धरती पर वह रह भी नहीं सकता था। अतः विष्णु ने उसे पाताल लोक में जाने की आज्ञा दी। जाने से पहले विष्णु ने उसे एक वरदान माँगने को कहा। महाबलि को अपनी प्रजा से अगाघ प्रेम था। अतः उसने वर्ष में एक बार धरती पर आकर अपनी प्रजा को देखने की इच्छा प्रकट की। विष्णु ने इसे मान लिया। कहा जाता है कि हर वर्ष श्रावण महीने के श्रवण नक्षत्र में राजा महाबलि अपनी प्रजा को देखने आते हैं। चूँकि मलयालय भाषा में श्रवण नक्षण को ओणम कहा जाता है। इसीलिए इस पर्व का नाम भी ओणम ही पड़ गया।ओणम के अवसर पर सम्पूर्ण प्रदेश की जनता अपने देवतुल्य राजा की प्रतीक्षा में अपने घरों को सजाती हैं। चारों ओर खुशी का वातावरण फैल जाता है। दीप जलाये जाते हैं, वंदनवार लगाए जाते हैं। हर तरह धरती को सजाया जाता है। रंगोली द्वारा धरती का भव्य श्रृंगार किया जाता है। रंगोली से सजी धरती पर भगवान विष्णु और राजा महाबलि की प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं। दोनों की ही भव्य पूजा की जाती है। सभी नये परिधानों में सजकर तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। मंदिरों में भव्य उत्सव मनाये जाते हैं। मनोरंजन के कार्यक्रमों जैसे नौका दौड़, हाथियों के जुलूस का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के पीछे लोगों का उदेश्य होता है कि उनके पूज्य राजा अपनी प्रजा को सुखी देखकर प्रसन्न हों। इस दिन सभी लोग जी खोलकर दान भी करते हैं जो महाबलि की दानशीलता का प्रतीक है।

ओणम का महत्व

इस अवसर पर कई तरह के नृत्य-प्रस्तुति की भी परम्परा है। कत्थकली जो केरल का सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य है, का आयोजन काफी बड़े पैमाने पर किया जाता है। युवतियाँ सफेद साड़ी पहनती हैं और बालों पर फूलों की वेणियाँ सजाकर नाचती हैं। ये सारे कार्यक्रम व्यापक रूप से किये जाते हैं। इसमें सभी लोग हिस्सा लेते हैं।ओणम सुख-समृद्धि, प्रेम-सौहार्द एवं परस्पर प्रेम एवं सहयोग का संदेश लेकर आता है। इसके पीछे चाहे कोई भी कहानी जुड़ी हो, इतना तो स्पष्ट है कि यह हमारी संस्कृति का आईना है। हमारी भव्य विरासता का प्रतीक है। हमारे जीवन की ताजगी है। हमें साल में एक बार ही सही एक ऐसी ताजगी दे जाता है जो हमारी धमनियों में वर्षभर नयेपन का संचार करता रहता है।

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