रणथम्भौर दुर्ग का मुख्य आकर्षण महल छतरी मंदिर दरगाह शासक की महत्वपूर्ण जानकारी

राजस्थान के महत्वपूर्ण किले और महलों को मुगलों की तरह राजपूत रचनात्मक निर्माणकर्ता थे और उन्होंने राजस्थान में कुछ सबसे शानदार और प्रभावशाली किलों और महलों का निर्माण करवाया था | राजस्थान के रेगिस्तान में शानदार किलों और विभिन्न शासकों और निर्माणकर्ताओं द्वारा निर्मित महलों को तैयार किया है। ये किले और महलों आमतौर पर शहर की रक्षा के लिए उची पहाड़ियों पर शहर के बाहर बनाया गया थे । राजस्थान में महलों की महिमा अच्छी तरह से संरक्षित है। राजाओ ने अपने संघर्ष के समय में शासकों को सुरक्षा प्रदान की है। अब, वे उन पर्यटकों के लिए खोले दिए गए हैं जो यहां विदेशी आते हैं उनकी समृद्ध विरासत और शानदार कलात्मक वास्तुकला की अद्भुत प्रस्तुति मिल सके। इन किले और महलों में से कई अपने पुराने आकर्षण और अनुष्ठान बनाए हुए हैं | विदेशी मेहमान अभी भी भारत के शाही अतीत के जादू का अनुभव कर सकते हैं।

रणथम्भौर दुर्गा का निर्माण Construction of Ranthambore Durga

राजस्थान के इतिहास में कई ऐतिहासिक घटनाओं के बाद रणथम्भौर क़िले के निर्माण का सही समय एवं निर्माता के बारे में जानकारी नहीं मिली है। यह माना जाता है कि इस क़िले का निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था। 11वीं-12वीं शताब्दी तक इस क़िले की प्रसिद्धि इतनी फैल चुकी थी कि तत्कालीन समय के विभिन्न ऐतिहासिक महत्त्व के ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। इस किले का अधिकांश निर्माण कार्य चौहान राजाओं के शासन काल में ही हुआ है। दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान के समय भी यह किला मौजूद था और चौहानों के ही नियंत्रण में था। इतिहास में सर्वप्रथम इस क़िले पर चौहानों का उल्लेख मिलता है। यह सम्भव है कि चौहान शासक रंतिदेव ने इसका निर्माण करवाया था ।

रणथम्भौर दुर्गा सवाईमाधोपुर का क्षेत्रफल Ranthambore Durga

भारत में सबसे पुराना किलों में से एक रणथंभौर किला जिसकी परिधि में लगभग 7 कि.मी. के एक क्षेत्र में फेला हुआ है चौथाओं द्वारा 8वीं सदी के दौरान रणथम्भौर किला बनाया गया था। रणथम्भौर का किला एक पहाड़ी पर रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के पास हरियाली में स्थित है। रणथंभौर का नाम पहाड़ियों के नाम से है – थनभोर पहाड़ी है जिस पर किला स्थित है और पास के पहाड़ी पर भाग जाता है। और महलों, मंदिरों, मस्जिदों और बैरकों जैसे भवनों के एक समूह में है |

रणथम्भौर दुर्गा का परिचय Introduction of Ranthambore Durga

रणथम्भौर किले ऐतिहासिक स्थल व प्रवेश द्वार

रणथम्भौर किले से संबंधित प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों में ये निम्न लिखित है जो इस प्रकार है

  • नौलखा दरवाजा
  • हाथीपोल
  • गणेशपोल
  • सुरजपोल
  • त्रिपोलिया या अंधेरी दरवाजा

रणथम्भौर किले के महल व हवेली Ranthambore Fort Mahal and Haveli

  • हम्मीर महल
  • सुपारी महल
  • समंटन की हवेली
  • टोरन द्वार
  • हम्मीर कचहरी
  • बादल महल
  • जबरा-भंवरा

रणथम्भौर किले की छतरी Ranthambore Fort Chatri

  • 32 खम्बों की छतरी,
  • महादेव की छतरी

रणथम्भौर किले के मंदिर Temple of Ranthambore Fort

  • त्रिनेत्र गणेश मंदिर Trinetr Ganesh Temple

    पूरी दुनिया में यह एक ही मंदिर है जहाँ भगवान गणेश जी अपने सम्पूर्ण परिवार, दो पत्नी- रिद्दि और सिद्दि एवं दो पुत्र- शुभ और लाभ, के साथ विराजमान है। भारत में चार स्वयंभू गणेश मंदिर माने जाते है | जिनमें रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर  प्रथम है। इस मंदिर के अलावा सिद्दपुर गणेश मंदिर गुजरात, अवंतिका गणेश मंदिर उज्जैन एवं सिद्दपुर सिहोर मंदिर मध्यप्रदेश में स्थित है| महाराजा विक्रमादित्य जिन्होंने विक्रम संवत् की गणना शुरू की प्रत्येक बुधवार उज्जैन से चलकर रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी के दर्शन हेतु नियमित जाते थे, उन्होंने ही उन्हें स्वप्न दर्शन दे सिद्दपुर सीहोर के गणेश जी की स्थापना करवायी थी।

  • चामुंडा मंदिर Chamunda Temple
  • ब्रह्मा मंदिर Brahma Temple
  • शिव मंदिर Shiv Temple
  • जैन मंदिर Jain Temple

रणथम्भौर किले में दरगाह  Dargah in Ranthambore Fort

  • पीर सहरुद्दीन की दरगाह  Dargha of Pir Shahruddin

रणथम्भौर किले में जल गेटवेज Water Gateways at Ranthambore Fort

  • कच्छि घाटी Kachchi Valley
  • सुरवाल झील Surwal Lake

रणथम्भौर किले में पिकनिक स्पोर्ट्स Picnic Sports in Ranthambore Fort

  • मलिक तालो Malik Talo

रणथम्भौर किले का जंगली जीवन Ranthambore Fort Wild Life

  • बाकूला Bakuala
  • लकड़ना और अनंतपुरा TLakadna and anantapura
  • राजबाग तालो Rajbagh Talo
  • रणथंभौर टाइगर रिजर्व या राष्ट्रीय उद्यान Ranthambore Tiger Reserve or National Park

रणथम्भौर किले महत्वपूर्ण जानकारी Ranthambore fort important information

रणथम्भौर किले के पास से एक सुरंग महलों तक गई है। किले तक पहुँचने के लिए कई उतार-चढाव, संकरे व फिसलन वाले रास्ते तय करने के साथ नौलखा, हाथीपोल, गणेशपोल और त्रिपोलिया द्वार पार करना पड़ता है। सामंतो की हवेलियाँ गुप्त गंगा एक धारा जो पूरे वर्ष में बहती रहती है। तत्कालीन स्थापत्य कला के अनूठे प्रतीक है। राणा सांगा की रानी कर्मवती द्वारा शुरू की गई अधूरी छतरी भी दर्शनीय है। दुर्ग का मुख्य आकर्षण हम्मीर महल है जो देश के सबसे प्राचीन राजप्रसादों में से एक है स्थापत्य के नाम पर यह दुर्ग भी भग्न-समृधि की भग्न-स्थली है।

रणथंभौर किले का मुख्य आकर्षण The main attraction of Ranthambore Fort

हमीर अदालत रणथंभौर किले का मुख्य आकर्षण है गणेश मंदिर है । मंदिर के बारे में एक दिलचस्प पहलू है कि भक्त भगवान गणेश को पत्र लिखते हैं और इसे इस मंदिर में भेजते हैं। इन पत्रों को स्थानीय डाकिया द्वारा दैनिक भेज दिया जाता है |

रणथम्भौर किले के शासक Ranthambore Fort Rulers

११९२ में तहराइन के युद्ध में मुहम्मद गौरी से हारने के बाद दिल्ली की सत्ता पर पृथ्वीराज चौहान का अंत हो गया और उनके पुत्र गोविन्द राज ने रणथंभोर को अपनी राजधानी बनाया। गोविन्द राज के अलावा वाल्हण देव, प्रहलादन, वीरनारायण, वाग्भट्ट, नाहर देव, जैमेत्र सिंह, हम्मीरदेव, महाराणा कुम्भा, राणा सांगा, शेरशाह सुरी, अल्लाऊदीन खिलजी, राव सुरजन हाड़ा और मुगलों के अलावा आमेर के राजाओं आदि का समय-समय पर नियंत्रण रहा लेकिन इस दुर्ग की सबसे ज्यादा ख्याति हम्मीर देव (1282-1301) के शासन काल में रही। हम्मीरदेव का 19 वर्षो का शासन इस दुर्ग का स्वर्णिम युग था। हम्मीर देव चौहान ने 17 युद्ध किए जिनमे13 युद्धो में उसे विजय श्री मिली। करीब एक शताब्दी तक ये दुर्ग चितौड़ के महराणाओ के अधिकार में भी रहा। खानवा युद्ध में घायल राणा सांगा को इलाज के लिए इसी दुर्ग में लाया गया था।

रणथम्भौर किले के युद्ध की जानकारी Information about the Battle of Ranthambore Fort

मुहम्मद ग़ोरी के हाथों तराइन में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद उनका पुत्र गोविन्दराज दिल्ली और अजमेर छोड़कर रणथम्भौर आ गया और यहाँ शासन करने लगा। उसके बाद लगभग 100 वर्षों तक चौहान रणथम्भौर पर शासन करते रहे। उनके समय में दुर्ग के वैभव में बहुत वृद्धि हुई। राजपूत काल के पश्चात् से 1563 ई. तक यहाँ पर मुस्लिमों का अधिकार था। इससे पहले बीच में कुछ समय तक मेवाड़ नरेशों के हाथ में भी यह दुर्ग रहा। इनमें चौहान शासक राणा हम्मीर प्रमुख हैं। इनके साथ दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलज़ी का भयानक युद्ध 1301 ई. में हुआ था, जिसके फलस्वरूप रणथम्भौर की वीर नारियाँ पतिव्रत धर्म की ख़ातिर चिता में जलकर भस्म हो गईं और राणा हम्मीर युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुए। इस युद्ध का वृत्तान्त जयचंद के ‘हम्मीर महाकाव्य’ में है। 1563 ई. में बूँदी के एक सरदार सामन्त सिंह हाड़ा ने बेदला और कोठारिया के चौहानों की सहायता से मुस्लिमों से यह क़िला छीन लिया और यह बूँदी नरेश सुजानसिंह हाड़ा के अधिकार में आ गया।

रणथम्भौर किले पर मुगलों का अधिकार Right to the Mughals at Ranthambore Fort

कहा जाता है की चार वर्ष बाद मुग़ल बादशाह अकबर ने चित्तौड़ की चढ़ाई के पश्चात् मानसिंह को साथ लेकर रणथम्भौर पर चढ़ाई की। अकबर ने परकोटे की दीवारों को ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, किन्तु पहाड़ियों के प्राकृतिक परकोटों और वीर हाड़ाओं के दुर्दनीय शौर्य के आगे उसकी एक न चली। किन्तु राजा मानसिंह ने छलपूर्वक राव सुजानसिंह को अकबर से सन्धि करने के लिए विवश कर दिया। सुजानसिंह ने लोभवश क़िला अकबर को दे दिया, किन्तु सामन्त सिंह ने फिर भी अकबर के दाँत खट्टे करके मरने के बाद ही क़िला छोड़ा। 1569 ई. में इस पर अकबर का अधिकार हो गया। इसके बाद अगले दो सौ वर्षों तक इस पर मुग़लों का अधिकार बना रहा। 1754 ई. तक रणथम्भौर पर मुग़लों का अधिकार रहा। इसी वर्ष इसे मराठों ने घेर लिया, किन्तु दुर्गाध्यक्ष ने जयपुर के महाराज सवाई माधोसिंह की सहायता से मराठों के आक्रमण को विफल कर दिया। तब से आधुनिक समय तक यह क़िला जयपुर रियासत के अधिकार में रहा।

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान Ranthambore National Park

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान उत्तर भारत में सबसे बड़ा वन्यजीव संरक्षण स्थल है। वर्ष 1955 में यह वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया । बाद में 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के पहले चरण में इसको शामिल किया गया। इस अभयारण्य को 1981 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्रदान किया गया था। बाघों के अलावा यह राष्ट्रीय अभ्यारण्य विभिन्न जंगली जानवरों, सियार, चीते, लकड़बग्घा, दलदली मगरमच्छ, जंगली सुअर और हिरणों की विभिन्न किस्मों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त यहाँ जलीय वनस्पति, जैसे- लिली, डकवीड और कमल की बहुतायत है। रणथम्भौर राष्ट्रीय अभ्यारण्य हाड़ौती के पठार के किनारे पर स्थित है। यह चंबल नदी के उत्तर और बनास नदी के दक्षिण में विशाल मैदानी भूभाग पर फैला है। अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 392 वर्ग कि.मी. है। इस विशाल अभ्यारण्य में कई झीलें हैं, जो वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण और जलस्रोत उपलब्ध कराती हैं। इस अभ्यारण्य का नाम प्रसिद्ध रणथम्भौर दुर्ग पर रखा गया है।

Ranthambore Fort Visit Timings

खुलने का समय 10 बजे से 5.30 बजे तक

You Must Read

हरतालिका तीज 2017 अखण्ड सौभाग्यवती बनने के लिय करें हरतालिका... हरतालिका तीज भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती ...
Navratri Puja Vidhi Shubh Muhurat 2017 Kalas Sthapana Vrat K... नवरात्र किन किन देवियों की पूजा होती हैं - 21...
Hanuman Jayanti हनुमान जयंती 2018 हनुमानजी की पूजा का शुभ म... Hanuman Jayanti 2018 हनुमानजी महाराज का जन्म चैत्र...
BSER Ajmer Board XIIth Science Result 2018 Name Roll Number ... राजस्थान 12 वी विज्ञान का परीक्षा परिणाम माध्यमिक ...
Live Test Match India VS Srilanka latest updates India 600 all out in their 1st innings Sri Lanka ...
प्राकृतिक आपदा पर महत्वपूर्ण लेख हिंदी मैं... भारत मैं आई प्राकृतिक आपदाएं : भोगोलिक द्रष्टि से ...
Rajasthan BSTC Online Application Form 2018 Date Notificatio... Rajasthan BSTC Online Application Form 2018 Notifi...
विश्व अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस 17 जुलाई... अन्तर्राष्ट्री जस्टिस विश्व दिवस, जिसे अंतरराष्ट्र...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *