स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी बोस की जीवनी और उनके क्रांतिकारी कार्य

भारत के क्रन्तिकारी नेता Rashbihari Boss : रासबिहारी बोस एक भारतीय क्रान्तिकारी थे जिन्होने अंग्रेजी हुकुमत के विरुद्ध ‘गदर’ एवं ‘आजाद हिन्द फौज’ के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न सिर्फ देश के अन्दर बल्कि दूसरे देशों में भी रहकर अँगरेज़ सरकार के विरुद्ध क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन किया और ताउम्र भारत को स्वतन्त्रता दिलाने का प्रयास करते रहे। रासबिहारी बोस ने दिल्ली में भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनायी, गदर की योजना बनाई, जापान जाकर Indian Independence leag और बाद में Ajad Hind Fouj की स्थापना की। हालांकि देश को आज़ाद कराने के लिये किये गये उनके प्रयास सफल नहीं हो पाये, पर देश की आजादी की लड़ाई में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

रासबिहारी बोस का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

रासबिहारी बोस का जन्म 26 मई 1886 को बंगाल के बर्धमान जिले के सुबालदह नामक गाँव में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा चन्दननगर में हुई, जहाँ उनके पिता विनोद बिहारी बोस कार्यरत थे। जब बालक रासबिहारी मात्र तीन साल के थे तब उनकी मां का देहांत हो गया जिसके बाद उनका पालन पोषण उनकी मामी ने किया। आगे की शिक्षा उन्होंने चन्दननगर के डुप्लेक्स कॉलेज से ग्रहण की। चन्दननगर उन दिनों फ़्रांसिसी कब्ज़े में था। अपने शिक्षक चारू चांद से उन्हें क्रांति की प्रेरणा मिली। उन्होंने बाद में चिकित्सा शाष्त्र और इंजीनियरिंग की पढ़ाई फ्रांस और जर्मनी से की। रासबिहारी बाल्यकाल से ही देश की आजादी के बारे में सोचते थे और क्रान्तिकारी गतिविधियों में गहरी दिलचस्पी लेते थी। रासबिहारी ने देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान में कुछ समय तक हेड क्लर्क के रूप में कार्य किया था।

रासबिहारी बोस का क्रांतिकारी जीवन

सन 1905 के बंगाल विभाजन के समय रासबिहारी बोस क्रांतिकारी गतिविधियों से पहली बार जुड़े। इस दौरान उन्होंने अरविंदो घोस और जतिन बनर्जी के साथ मिलकर बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजी हुकुमत की मनसा को उजाकर करने का प्रयत्न किया। धीरे-धीरे उनका परिचय बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारियों जैसे जतिन मुखर्जी की अगुआई वाले ‘युगान्तर’ क्रान्तिकारी संगठन के अमरेन्द्र चटर्जी और अरबिंदो घोष के राजनीतिक शिष्य रहे जतीन्द्रनाथ बनर्जी उर्फ निरालम्ब स्वामी से हुआ। निरालम्ब स्वामी के सम्पर्क में आने पर उनका परिचय संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) और पंजाब के प्रमुख आर्य समाजी क्रान्तिकारियों से हुआ।

रासबिहारी बोस ने वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की बग्गी पर फेंका बम

रास बिहारी बोस ने लॉर्ड हॉर्डिंग की हत्या बम से करने की सोची। दिन चुना 23 दिसंबर 1912 यानी वो दिन जब गर्वनर जनरल लॉर्ड हार्डिंग को नई राजधानी दिल्ली में पहली बार दिल्ली आना था। उसके जोरदार स्वागत की तैयारियां पूरी दिल्ली में कर ली गई थीं। हालांकि कोलकाता से हटाकर दिल्ली राजधानी बनाने का ऐलान 12 दिसंबर को ही कर दिया गया था। लॉर्ड हॉर्डिंग ने बड़े ही भव्य तरीके से अपनी दिल्ली यात्रा की योजना बनाई थी, वो खुद हाथी पर बैठकर शहर में घुसा। रास बिहारी को अंदाजा नहीं था कि वो हाथी पर बैठकर आएगा। बंगाल के एक युवा क्रांतिकारी बसंत कुमार विश्वास को बम फेंकने की जिम्मेदारी दी गई, वो रास बिहारी से ज्यादा मजबूत था। हाथी के ऊपर तक बम वही फेंक सकता था, रास बिहारी बोस ने उसे बम दे दिया। चांदनी चौक से जब गर्वनर जनरल की सवारी निकली, दोनों उस वक्त वहीं थे। बम फेंका भी, जोरदार विस्फोट हुआ, अफरातफरी मच गई। बहुत देर तक लोगों ने मान लिया कि हॉर्डिंग की मौत हो गई है, लेकिन वो केवल घायल हुआ, बच गया, लेकिन उसके हाथी का महावत मारा गया। इसी अफरातफरी में दोनों बच कर निकल भागे। रास बिहारी ने फौरन रात की ट्रेन देहरादून के लिए ली और सुबह अपना ऑफिस भी ज्वॉइन कर लिया। महीनों तक अंग्रेज पुलिस पता नहीं कर पाई कि कौन था मास्टर माइंड, जो खुद उनका मुलाजिम था, एक जूनियर क्लर्क। इतिहास में इस केस को ‘दिल्ली कांस्पिरेसी’ के नाम से जाना जाता है।

रासबिहारी बोस का जापान निर्वासन

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान कई नेताओं ने ‘सशस्त्र क्रांति’ की योजना बनाई, जिसमें रासबिहारी बोस की प्रमुख भूमिका थी। इन क्रांतिकारियों ने सोचा था कि प्रथम विश्वयुद्ध के कारण अधिकतर सैनिक देश से बाहर गये हुये थे, अत: शेष बचे सैनिकों को आसानी से हराया जा सकता था, लेकिन दुर्भाग्य से उनका यह प्रयास भी असफल रहा और कई क्रान्तिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। ऐसा माना जाता है कि सन 1857 की सशस्त्र क्रांति के बाद ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का यह पहला व्यापक और विशाल क्रांतिकारी प्रयत्न था। इसके बाद ब्रिटिश पुलिस रासबिहारी बोस के पीछे लग गयी जिसके कारण वो भागकर जून 1915 में राजा पी. एन. टैगोर के छद्म नाम से जापान पहुँचे और वहाँ रहकर भारत की आजादी के लिये काम करने लगे।जापान में उन्होंने अपने जापानी क्रान्तिकारी मित्रों के साथ मिलकर देश की स्वतन्त्रता के लिये निरन्तर प्रयास किया। जापान में उन्होंने अंग्रेजी अध्यापन, लेखन और पत्रकारिता का कार्य किया। वहाँ पर उन्होंने ‘न्यू एशिया’ नाम से एक समाचार-पत्र भी निकाला। उन्होंने जापानी भाषा भी सीख ली और इस भाषा में कुल 16 पुस्तकें लिखीं। उन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थ ‘रामायण’ का भी अनुवाद जापानी भाषा में किया।

सन 1916 में रासबिहारी बोस ने प्रसिद्ध पैन एशियाई समर्थक सोमा आइजो और सोमा कोत्सुको की पुत्री से विवाह कर लिया और सन 1923 में जापानी नागरिकता ग्रहण कर ली। रासबिहारी बोस ने जापानी अधिकारियों को भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन और राष्ट्रवादियों के पक्ष में खड़ा करने और भारत की आजादी की लड़ाई में उनका सक्रिय समर्थन दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मार्च 1942 में टोक्यो में ‘इंडियन इंडीपेंडेंस लीग’ की स्थापना की और भारत की स्वाधीनता के लिए एक सेना बनाने का प्रस्ताव भी पेश किया।

जून 1942 में उन्होंने बैंकाक में इंडियन इंडीपेंडेंस लीग का दूसरा सम्मेलन बुलाया, जिसमें सुभाष चंद्र बोस को लीग में शामिल होने और उसका अध्यक्ष बनने के लिए आमन्त्रित किया गया। मलय और बर्मा के मोर्चे पर जापान ने कई भारतीय युद्धबन्दियों को पकड़ा था। इन युद्धबन्दियों को इण्डियन इण्डिपेण्डेंस लीग में शामिल होने और इंडियन नेशनल आर्मी (आई०एन०ए०) का सैनिक बनने के लिये प्रोत्साहित किया गया। आई०एन०ए० इण्डियन नेशनल लीग की सैन्य शाखा के रूप में सितम्बर 1942 में गठित की गयी। इसके बाद जापानी सैन्य कमान ने रास बिहारी बोस और जनरल मोहन सिंह को आई०एन०ए० के नेतृत्व से हटा दिया लेकिन आई०एन०ए० का संगठनात्मक ढाँचा बना रहा। बाद में सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के नाम से आई०एन०ए० का पुनर्गठन किया।

रासबिहारी बोस का निधन

भारत को अंग्रेजी हुकुमत से मुक्ति दिलाने का सपना लिए भारत माता का यह वीर सपूत 21 जनवरी 1945 को परलोक सिधार गया। 

You Must Read

M वैंकेया नायडू बने भारत के 13वें उपराष्ट्रपति आज सम्भालेंगे... भारत के 13वें उपराष्ट्रपति बने वैंकेया नायडू ,राष्...
आनंद पाल के बारे मैं आज की सनसनी खेज न्यूज़... राजस्थान पुलिस ने अनोखी सर्जिकल स्ट्राइक कर कुख्या...
Reet Exam Latest News Date Admit Card Answer Key 2018 BSER R... Rajasthan REET Exam Latest Notification : Hello Fr...
Vivo Pro Kabaddi match U Mumba vs Puneri Paltan live streami... TV telecast info and preview Vivo Pro Kabaddi 2017...
UOK Kota University MA 1st & 2nd Year Admit Card 2018 वी... UOK University of Kota will be release MA Previous...
सावन के महीने में सोमवार का व्रत कर पाए कंवारी कन्याएँ महादे... श्रावण मास की महिमा : सावन के महीने में सोमवार के ...
RBSE 10th Result 2018 Rajasthan Board 10th Class Results Dat... Rajasthan Board 10th Result 2018 राजस्थान माध्यमि...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *