स्वतन्त्रता दिवश पर सुभाष चन्द्र बोस के देशभक्ति नारे

सुभाष चन्द्र बोस ने कहा भारत की आजादी पाने की लिए क़दम क़दम बढ़ाते चलो : सुभाष चन्द्र बोस जो नेता जी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था।

तुम मुझे खून दो मैं तुझे आजादी दूंगा : सुभाष चन्द्र बोस

तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़
मरने से तू कभी न डर
उड़ा के दुश्मनों का सर
जोश-ए-वतन बढ़ाये जा

क़दम क़दम बढ़ाये जा
ख़ुशी के गीत गाये जा
ये ज़िंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

हिम्मत तेरी बढ़ती रहे
ख़ुदा तेरी सुनता रहे
जो सामने तेरे खड़े
तू ख़ाक़ में मिलाये जा

क़दम क़दम बढ़ाये जा
ख़ुशी के गीत गाये जा
ये ज़िंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

चलो दिल्ली पुकार के
क़ौमी-निशाँ संभाल के
लाल क़िले पे गाड़ के
लहराये जा लहराये जा

क़दम क़दम बढ़ाये जा
ख़ुशी के गीत गाये जा
ये ज़िंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाये जा

सुभाष चंद्र बोस की मौत को लेकर फ्रांस की खुफिया रिपोर्ट ने किया हुआ बड़ा खुलासा

पेरिस के इतिहासकार जे बी पी मोरे ने 11 दिसंबर 1947 की एक फ़्रेंच सीक्रेट सर्विस रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में नहीं हुई थी, बल्कि वे 1947 तक जिंदा थे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के बारे में अब तक यही माना जा रहा था की नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में हुई थी कि इस रहस्य पर से पर्दा उठ गया है। भारत सरकार ने जिस तरह नेताजी से जुड़े तमाम दस्तावेजों को सार्वजनिक किया और उसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में हुई थी, उसके बाद माना जा रहा था कि यह विवाद अब खत्म हो गया है लेकिन फ्रांस की खुफिया रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा कर इस दावे को झुठला सबको चौंका दिया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के बारे में अब तक यही माना जा रहा था कि इस रहस्य पर से पर्दा उठ गया है। भारत सरकार ने जिस तरह नेताजी से जुड़े तमाम दस्तावेजों को सार्वजनिक किया और उसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में हुई थी, उसके बाद माना जा रहा था कि यह विवाद अब खत्म हो गया है लेकिन फ्रांस की खुफिया रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा कर इस दावे को झुठला सबको चौंका दिया है। पेरिस के इतिहासकार जे बी पी मोरे ने 11 दिसंबर 1947 की एक फ़्रेंच सीक्रेट सर्विस रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में नहीं हुई थी, बल्कि वे 1947 तक जिंदा थे। पेरिस में पढ़ाने वाले मोरे कहते हैं, ‘कागजातों में भी नहीं लिखा है कि बोस की मौत हवाई दुर्घटना में हुई थी। 1947 तक उनके ठिकाने के बारे में खबर थी।’

एक रिपोर्ट में मोरे ने लिखा है, ‘इंडो-चीन बॉर्डर से जिंदा बच निकले थे और 1947 तक जिंदा भी थे। वह जापान की हिकारी किकान के सदस्य होने के साथ-साथ इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के पूर्व मुखिया भी थे।’ गौरतलब है कि ब्रिटेन और जापान ने कहा था कि नेताजी की तोक्यो जाते समय एक हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी। हालांकि फ़्रेंच सरकार ने इसपर चुप्पी साध रखी थी। किंगशुक नाग जैसे विद्वानों का भी कहना है कि इस बात को सीरियसली लिया जाना चाहिए। भारत सरकार ने 1956 से लेकर अब तक 3 कमिटियां बनाई। इनमें से दो शाह नवाज कमिटी (1956) और खोसला कमीशन (1970) का कहना है कि 18 अगस्त 1945 को नेताजी की ताईहोकु एयरपोर्ट जापान पर एक हवाई दुर्घटना में नेताजी की मौत हो गई थी, जबकि मुखर्जी कमीशन (1999) का मानना है कि उनकी मौत हवाई दुर्घटना में नहीं हुई थी, हालांकि, सरकार ने इस दावे को खारिज किया है।

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