कैसे मनाये तुलसीदास जयंती Biography of Tulsidas in Hindi

सम्पूर्ण भारतवर्ष में महान ग्रंथ रामचतिमानसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के स्मरण में तुलसी जयंती मनाई जाती है। श्रावण मास की अमावस्या के सातवें दिन तुलसीदास की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 8 अगस्त है। गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 पुस्तकों की रचना की है, लेकिन सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित रामचरितमानस को मिली। दरअसल, इस महान ग्रंथ की रचना तुलसी ने अवधीभाषा में की है और यह भाषा उत्तर भारत के जन-साधारण की भाषा है। इसीलिए तुलसीदास को जन-जन का कवि माना जाता है।

तुलसीदास की जीवनी

जीवन परिचय पूरा नाम- गोस्वामी तुलसीदास

बचपन का नाम- रामबोला तुलसीराम

जन्म- सावन माह शुक्ल सप्तमी 1532

जन्म स्थान- राजापुर

माता का नाम- हुलसी देवी

पिता का नाम- आत्माराम शुक्ल दुबे

पत्नी- रत्नावली

गुरु- नरहरिदास

म्रत्यु- 1680

गुरु तुलसीदास के जन्म से जुड़े कुछ रहस्य आज भी रहस्य बने हुई हैं आज चार सौ साल बाद भी तुलसी पर निरंतर शोध और अध्‍ययन हो रहे हैं। वह आज भी बुद्धिजीवियों और चिंतकों के प्रिय हैं। तुलसीदास वास्‍तव में सिर्फ रचनाकार नहीं थे। वे एक संत और दार्शनिक भी थे, जो व्‍यापक समाज की हित चिंता से प्रेरित थे। तुलसीदास अपने आप में अनूठे थे। न तो उनके पहले और न ही उनके बाद उस कद और ऊर्जा वाला कोई दूसरा व्‍यक्ति हुआ। तुलसीदास और उनकी कृतियाँ इस बात का यथार्थ प्रमाण है कि समय की गति में वही बच पाता है, जिसकी जड़ें आम जनमानस में गहरी होती हैं। जो जन-जन का रचनाकार होता है। तुलसी ऐसे ही थे। सृष्टि रचयिता विधाता ने इस जड़ चेतन की समूह रूपी सृष्टि का निर्माण गुण व दोषों से किया है। लेकिन संतरूपी हंस दोष जल का परित्याग कर गुणरूपी दुग्ध का ही पान किया करते हैं।

तुलसीदास का बचपन

तुलसीदास के जन्म की एक चुकाने वाली गठना हैं आम तोर बच्चे 9 महीने में जन्म लेता हैं लेकिन संत तुलसीदास अपनी माँ के गर्भ में 12 महीने तक रहे थे जो आज विज्ञान जगत में एक बड़ा सवाल हैं जन्म के समय उन के मुख में पुरे 32 दांत थे. जन्म के समय उन का शरीर लगभग 5 वर्ष के बच्चे के जितना था | और जन्म के दोरान बच्चे रोते हैं लेकिन तुलसीदास जी नही रोये थी कहा जाता हें की जन्म के समय राम राम का नाम लेते हुए उन का जन्म हुआ था | जन्म के समय पंचांग के हिसाब से मूल लगे हुए थे इसका मतलब होता हैं की पिता को खतरा होता हैं इसी कारण से उन के पिता ने अपनी दासी चुनिया के साथ तुलसीदास जी को उस के साथ भेज दिया और 5 वर्ष तक तुलसीदास को दासी चुनिया ने अपने गाँव हरिपुर में रखा था बाद में चुनिया का देहांत हो जाता हैं | और माता पिता से भी उन का सम्बन्ध टूट जाता हैं |

  • तुलसीदास जी की मुख्य रचनाएँ |
  • तुलसीदास जी की 12 रचनाएँ बहुत फेमस हैं
  • तुलसीदास जी की रचनाएँ दो भागो में बाटी गई हैं
  • अवधि- रामलला, रामचरितमानस, बरवाई, पार्वती मंगल, जानकी मंगल,
  • ब्रज- गीतावली, साहित्य रत्न, दोहावली, वैराग्य सनाधिपनी
  • हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, हनुमान बाहुक और तुलसी सतसई

तुलसीदास जी का  विवाह

तुलसीदास जी के विवाह को लेकर भी हमेसा से राज ही रहा हैं कुछ महापुरसो का कहना हें की तुलसीदास जी जिन्दगी भर अविवाहित थे और भगवान हनुमान के भक्त थे | लेकिन कुछ संतो का कहना हें की तुलसीदास ने विवाह किया था सन 1583 में दीनबन्धु पाठक की बेटी रत्नावली से कहते हैं की तुलसीदास जी अपनी पत्नी से बहुत ज्यादा प्रेम करते थे एक बार जब उन की पत्नी अपने भाई के साथ अपने गाँव चली गई थी तो तुलसीदास जी रत्नावली के प्रेम में रात को ही घर से चल पड़ा था जब रत्नावली से मिले तो उन का ये प्रेम देख कर रत्नावली ने उने बड़े क्रोर वचन बोले कहा की वह क्यों इस बाहरी शारीरिक चीजो से प्यार करते हैं अगर उन्हें मोक्ष चाहिए तो उन्हें भगवान की शरण लेनी चाहिए | इस बात का उन्हें गहरा दक्का लगा और उन्होंने सन्यास धारण कर लिया

तुलसीदास जी म्रत्यु

विक्रम संवत 1680 में सावन महीने में वाराणसी के अस्सी घाट में हुई थी |

दोहा – 

तुलसी ने मानस लिखा था जब जाति-पाँति-सम्प्रदाय-ताप से धरम-धरा झुलसी।

झुलसी धरा के तृण-संकुल पे मानस की पावसी-फुहार से हरीतिमा-सी हुलसी।

हुलसी हिये में हरि-नाम की कथा अनन्त सन्त के समागम से फूली-फली कुल-सी।

कुल-सी लसी जो प्रीति राम के चरित्र में तो राम-रस जग को चखाय गये तुलसी।

आत्मा थी राम की पिता में सो प्रताप-पुन्ज आप रूप गर्भ में समाय गये तुलसी।

जन्मते ही राम-नाम मुख से उचारि निज नाम रामबोला रखवाय गये तुलसी।

रत्नावली-सी अर्द्धांगिनी सों सीख पाय राम सों प्रगाढ प्रीति पाय गये तुलसी।

मानस में राम के चरित्र की कथा सुनाय राम-रस जग को चखाय गये तुलसी।

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