ऋषि पंचमी के व्रत की कहानी 2018 कैसे करे ऋषि पंचमी का व्रत जानें सम्पूर्ण विधि

ऋषि पंचमी व्रत 2018 : ऋषि पंचमी का व्रत इस बार 25 अगस्त (भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी) को हैं | वो लोग जिन्होंने अपनी जिन्दगी मैं पापों के आलावा कुछ नहीं कमाया हैं उनके लिए 25 अगस्त का दिन बड़ा ही खाश हैं | इस दिन ऋषि पंचमी हैं | और ऋषि पंचमी का व्रत करके आप अपने पापों को धो सकते हैं | पापी लोगों को और पापी महिलाओ को ऋषि पंचमी का व्रत अवश्य करना चाहिए | ऋषि पंचमी सप्त ऋषियों के पूजन का दिन है| इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा करके और उनको श्रध्दा भाव सा भोजन करवाए जरुर आपके सभी पापों का नाश होगा |

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108 दातून के करने के बाद स्नान करके, ऋषि पंचमी व्रत की करे शुरुआत

व्रत धारण करने से पूर्व अपामार्ग की 108 दातून के बाद स्नान करने के साथ व्रत की शुरुआत की जाती है। इस दिन दही और साठी का चावल खाया जाता है। नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हल से जुते हुए अनाज का उपयोग मना है। दिन में एक बार ही भोजन करना चाहिए।

कैसे रखें ऋषि पंचमी व्रत ?

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ऋषि पंचमी का व्रत करने के लिए प्रात:काल से दोपहर तक उपवास करके दोपहर को तालाब में जाकर अपामार्ग की दातून से दांत साफ कर, शरीर में मिट्टी लगाकर स्नान करना चाहिये।घर लौटकर गोबर से पूजा का स्थान लीपना चाहिये।सर्वतोभद्रमंडल बनाकर, मिट्टी या तांबे के कलश के कलश में जौ भर कर स्थापना करें।पंचरत्न,फूल,गंध,अक्षत से पूजन कर व्रत का संकल्प करें।कलश के पास अष्टदल कमल बनाकर, उसके दलों में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जगदग्नि और वशिष्ठ ऋषियों की पत्नी की प्रतिष्ठा करें।इन सभी सप्तऋषियों का 16 वस्तुओं से पूजन करें।ऋषि पंचमी में साठी का चावल और दही खाई जाती है।नमक और हल से जुते अन्न इस व्रत में नहीं खाये जाते हैं।पूजन के बाद कलश सामग्री को किसी ब्राह्मण को दान करें।पूजा के बाद ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करें। इस व्रत में नमक का प्रयोग वर्जित है। हल से जुते हुए खेत का अन्न खाना वर्जित है। दिन में केवल एक ही बार भोजन करना चाहिए।

सतयुग में सुमित नाम के ब्राह्मण ने अपने माता-पिता को ऋषि पंचमी व्रत से ही, पशु योनि से मुक्ति दिलाई थी। इसीलिए जिनसे भी कोई अंजाने में पाप हो जाये, उन्हें भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी को पड़ने वाला ये व्रत ज़रुर करना चाहिये।

ऋषि पंचमी व्रत पूजन विधि :

यह व्रत भाद्रपद शुक्लपक्ष की पंचमी को किया जाता है। इस व्रत में अरुंधती सहित सप्त ऋषियों का पूजन किया जाता है इसीलिए इसे ऋषि पंचमी कहते हैं। ज्ञात अज्ञात पापों के निवारण के लिए पति-पत्नी द्वारा यह व्रत किया जाता है। महिलाओं द्वारा रजस्वला अवस्था में घर के सामान को स्पर्श कर लिए जाने के कारण होने वाले पाप के निवारण के लिए यह व्रत किया जाता है। प्रातःकाल से मध्यान्ह पर्यंत उपवास करके किसी नदी या तालाब पर जाकर शरीर पर मिटटी लगाकर स्नान करें। स्नान से पूर्व अपामार्ग से दातुन करें।कलश की स्थापना कर कलश पूजन करें। गणपति स्थापना कर पूजन करें। कलश के पास ही आठ दल(पंखुड़ी) का व्राताकार कमल बनाकर प्रत्येक दल में एक ऋषि की प्रतिष्ठा करनी चाहिए। प्रतिष्ठित किए जाने वाले ऋषि हैं – कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि तथा वशिष्ठ। वशिष्ठ के साथ अरुंधती की प्रतिष्ठा करें। जैसा कि हर पूजन में किया जाता है वैसे ही सभी का पूजन करें।

ऋषि पंचमी व्रत पूजन संकल्प -

मैं अपनी आत्मा से रजस्वला अवस्था में घर के बर्तन और कोई भी गलत काम आदि को जाने अनजाने में स्पर्श कर लिए जाने के दोष के निवारणार्थ हूँ और अरुंधति सहित सप्त ऋषियों का पूजन करती हूँ | ये संकल्प लेकर सप्त ऋषियों का पूजन करे और बाद मैं सभी ऋषियों को और कंवारी कन्याओं को भोजन करवाकर स्वयं भोजन करे | और अंत मैं पुजन सामग्री ब्राह्मण को दान कर देनी चाहिए।

पापनाशक हैं सप्त ऋषि पूजन

ऋषि पंचमी का व्रत क्र अपने पापों का नाश करे | और सप्त ऋषियों का पूजन करके और उनको भोजन करवाके आप अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं | यह व्रत संपूर्ण पापों का नाश करने वाला है जिसे भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के अगले दिन ऋषि पंचमी पर महिलाएं पति की लंबी आयु और ऋतु कार्य में लगने वाले दोष के निवारण के लिए कुशा अथवा वस्त्र पर सप्त ऋषि बनाकर उनकी पूजा-अर्चना करती हैं।

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