कन्या संक्रांति 2017 विश्वकर्मा जयंती पूजा विधि मुहर्त का समय और भगवान विश्वकर्मा के किस्से आरती

कन्या संक्रांति ,विश्वकर्मा जयंती 2017 : 17 सितम्बर 2017 को कन्या सक्रांति और विश्वकर्मा जयंती हैं | 17 सितम्बर को सूर्य कन्या राशी में प्रवेश करेगा | तो उस राशि की संक्रांति शुरू हो जाती है। इस संक्रांति के दौरान विश्वकर्मा भगवान की पूजा की जाती है। कन्या संक्रांति भारत में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मनाई जाती है। विश्वकर्मा को औजारों के देवता भी कहा जाता हैं। इस धरती एक छोटे से तिनके से लेकर तीनो लोक का निर्माण विश्वकर्मा द्वारा ही किया गया हैं | विश्वकर्मा जयंती पर सभी लोग अपने अपने काम करने के औजारो को साफ़ सुथरा करके उनकी पूजा करते हैं |

kanya sakranti

 

कन्या संक्रांति का मुहर्त समय

  • सूर्योदय : -17 सितम्बर 2017 : 06:17 AM
  • सूर्यास्त : – 17 सितम्बर 2017 : 18:24 PM
  • पुण्यकाल मुहर्त :- 17 सितम्बर- 06:17 AM से 12:21 PM
  • महा पुण्यकाल मुहर्त :- 17 सितम्बर-06:17 AM से 08:18 AM
  • संक्रांति कार्य : – 17 सितम्बर : 00:44 AM

विश्वकर्मा की पूजा विधि

विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निचे दिए गए हैं

  1. सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें
  2. पूजा स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा रखें
  3. अपने औजार भी पूजा स्थान पर रखें
  4. कलश जल भी पूजा स्थान पर रखें
  5. विश्वकर्मा प्रतिमा पर पुष्प चढ़ा कर धूप और दीप जलाएं
  6. औजारों को धूप लगाएं और तिलक लगाएं
  7. प्रसाद का भोग लगाएं
  8. हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर विश्वकर्मा का ध्यान करें
  9. हवन के बाद प्रसाद बांटें

विश्वकर्मा पूजा के मंत्र : विश्वकर्मा पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए| 

ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:
ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:

विश्वकर्मा का किस्सा

कई साल पहले एक व्यापारी अपनी पत्नी के साथ रहता था। पूरे दिन दोनों लोग लुगाई मेहनत करते, लेकिन कभी उनसे धन इकट्ठा नहीं हो पाता। मर मरकर जीने के बाद भी ना तो सुख सुविधा थी और ना ही कोई संतान, इसलिए दोनों दुखी रहते थे| तभी किसी ने उन्हें विश्वकर्मा देव की शरण में जाने को कहा | उन दोनों ने बात मानी और अमावश्या के दिन विश्वकर्मा देव की पूजा की और व्रत का पालन किया| जिसके बाद उन्हें संतान भी मिली और सभी सुख भी मिले |

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विश्वकर्मा पूजा से होती हैं फल की प्राप्ति

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भगवान विश्वकर्मा की पूजा जो भी सच्चे दिन से करता है, उनका बेड़ा पार हो जाता है। कारोबार में कभी घाटा नहीं होता बल्कि रोज के रोज व्यापार बढ़ता जाता है। नौकरी में मान सम्मान मिलता है। घर में धन सम्पदा कि कोई कमी नहीं रहती। सारा जीवन सुखी हो जाता है।

भगवान् विश्वकर्मा की आरती

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥

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