क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति?


क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति?: पतंगबाजी का पर्व मकर संक्रांति सोमवार को देशभर में मनाया जा रहा हैं. पूरा देश इस दिन छत पर होगा. पुराने और नयें गानों के बीच रंग बिरंगी पतंगों को उड़ाने में मशगूल होगा. पतंगे जहाँ आसमान में दूर तक कुचांले भरेगी, वही एक दूसरे से पेंच लड़ाने की होड़ भी देखने को मिलेगी. डीजे की तेज धुनों पर वो काटा… चल लपेट का शोर सुनाई देगा. तिल के लड्डू, फ़िनी, पकौड़े सहित अन्य पकवानों को तैयार करने में गृहणियां व्यस्त रहेगी. हालांकि दान पुन्य का दिन मंगलवार रहेगा. रंग बिरंगी पतंगों से आसमान पटा देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं.

क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति?

वर्ष 2019 में मकर संक्रांति के पर्व पर अमृत योग और स्वार्थ सिद्धि योग में सिंह, हाथी पर सवार होकर मकर संक्रांति आ रही हैं. चार योग भी बन रहे हैं. वार व नक्षत्र नाम होने से आने वाला महिना उद्योगपतियों के लिए शुभफलदायक रहेगा. सूर्य का मकर संक्रांति में प्रवेश सोमवार शाम 7;53 बजे सूर्यास्त के बाद हो रहा हैं. अतः पुन्यकाल 15 जनवरी को होगा. वही उतरायण की ओर रूख करेगा. शुभ कार्यों की शुरुआत भी होगी.

खरमास के खत्म होने के साथ ही मंगलवार को संक्रांति के पुण्य काल में लोग गलता सहित अन्य जलाशयों में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्ध्य देकर दान पुण्य करेगे.

क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति? जानिये पतंगबाजी के इस पर्व के कुछ शब्दों के अर्थ

  • डोर- बच्चों की अंगुली कटने से बचाने के लिए विशेष रूप से बनाया गया सादा धागा, इसमें कांच का लेप नहीं होता है. यह धारदार नहीं होता हैं.
  • मांझा- पेंच लड़ाने के लिए कांच या अन्य चीजों से तैयार धागा. यह धारदार होता है इससे अंगुली तक कट जाती हैं.
  • चरखी- इस पर डोर व मांझा लपेटा जाता हैं. इसे पकड़ने वाले का हुनरबंद होना भी जरुरी हैं,
  • तंग- उड़ाने के लिए पहले पतंग में लगी सीधी लकड़ी की डंडी के आस-पास ऊपर नीचे छेद किये जाते हैं. इसमें धागा पिरोकर गांठे लगाई जाती हैं. तंग के तालमेल से ही पतंग की गति और संतुलन तय होता हैं. तंग गलत बंध जाए तो पतंग की चाल ढाल बदल जाती हैं. इसके ऊपर तथा नीचे की गाठों का अपना एक गणित हैं.

आप सभी पाठकों को Rkalert की पूरी टीम की तरफ से मकर संक्रांति फेस्टिवल की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

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