गोगा नवमी क्या हैं और क्यों पूजे जाते हैं गोगा जी महाराज

गोगा नवमी क्या हैं और क्यों पूजे जाते हैं गोगा जी महाराज Goga Ji Maharaj Goga Navmi About Sarpon Ke Devta Goga Ji Mela Date Time In Rajasthan : राजस्थान के लोक देवता गोगा जी महाराज के बारे में जुड़े कुछ विशेष बाते और उन के जीवन के बारे बताते हुये हम उन के विशेष कार्य का भी विवरण करेंगे | कहा जाता हैं की यह पहले इसे लोक देवता हुये हैं जीने हिन्दू और मुस्लमान दोनों धर्मो के लोग दवारा पूजा जाते हैं

सर्पो का देवता क्यों कहते हैं गोगा जी महाराज को

एक बार की बात हैं गोगा जी महाराज की पत्नी को सर्प ने डस लिया था तो गोगा जी महाराज ने मंत्रो का आहान किया और सब सर्पो को एक तेल से भरे कड़ाई में डाल दिया तो सर्पो के राजा ने आकर गोगा जी महाराज से प्राथना करने लगे और माफ़ी मांगे और कैलम देवी का जहर निकाला तब से ही इने सर्पो का देवता कहने लगे और आज भी इन के देवरे पर सर्प के डसने पर जहर निकाला जाता हैं

  • गोगाजी- सांपों के देवता,नागराज,गोगापीर,गौरक्षक देवता,जाहरपीर,सर्पदंश जन्म- ददरेवा (राजस्थान के चूरू जिले) भाद्रपद कृष्ण नवमी ,ग्यारहवीं सदी में
  • पिता-जेवर
  • माता-बाछल
  • पत्नी-केलम दे
  • पुत्र-केसरियाजी
  • गुरू-गोरखनाथ
  • गोगाजी का घोड़ी का नाम-नीली घोड़ी, गौगा बाप्पा
  • मुस्लिम पुजारी-चायल
  • थान- खेजड़ी के नीचे
  • गोगाजी का सिर ददरेवा में गिरा वह स्थान शीर्षमेड़ी या सिद्धमेड़ी और जहां धड़ गिरा गोगामेड़ी नोहर,हनुमानगढ़ में वह स्थान धुरमेड़ी कहलाता है
  • महमूद गजनवी से गायों की रक्षा खातिर लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए
  • गुरु का नाम- गोरक्षनाथ
  • गोगाजी का मंदिर-मकबरेनुमा,निर्माकर्ता- फिरोज तुगलक बिस्माल्लाह लिखा हुआ है मंदिर पर
  • किसान हल जोतने से पहले “गोगाराखड़ी” हल व बैल के बांधते है ,जिसमें नौ गांठें होती है
  • गोगाजी का मेला- भादवा कृष्ण नवमी को गोगामेड़ी में ,दूसरा मेला-ओल्डी किलौरियों की ढाणी ,सांचौर(जालौर ) में भरता है

जाहरवीर गोगा जी नाम क्यों पड़ा

गोगाजी का जन्म गुरू गोरखनाथ के वरदान से हुआ था। गोगाजी की माँ बाछल देवी निःसंतान थी। संतान प्राप्ति के सभी यत्न करने के बाद भी संतान सुख नहीं मिला। गुरू गोरखनाथ ‘गोगामेडी’ के टीले पर तपस्या कर रहे थे। बाछल देवी उनकी शरण मे गईं तथा गुरू गोरखनाथ ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया और एक गुगल नामक फल प्रसाद के रूप में दिया। प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गई और तदुपरांत गोगाजी का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम से इनका नाम गोगाजी पड़ा।

मुस्लमान क्यों पूजते हैं

श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज’’ के बारे में। इन्होने हिन्दु होते हुये भी मुस्लिम कलमा पढा और वचन टूट जाने के कारण गोगामेडी में समाधी में ली तभी से वहा पर इनकी पुजा होती हैं।

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