दशहरा 2017 विजयदशमी पर्व तिथि व मुहूर्त और रावण की लीला का अंत

विजय का प्रतीक र्त्योंहार विजयदशमी, दशहरा 2017 : एक ऐसा उत्सव और त्योंहार जिस दिन विजय और जीत का जश्न मनाया जाता हैं, वो हैं विजयदशमी, दशहरा | सतयुग से चले आ रहे विजयदशमी के त्योंहार की कई अनोखी दास्ताँ हैं | दशहरा का त्योंहार मनाने के पीछे कई जीत की कहानियां हैं |

(i) दशहरा के दिन भगवान राम ने महान पापी रावण का नाश किया था | और विजयदशमी का त्योंहार मनाया गया |
(ii) विजयदशमी के दिन माँ दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इस दिन राजा लोग विजय की प्रार्थना करके युद्ध के लिए रवाना होते हैं | बुराई पर अच्छाई की जीत और झूंठ पर सत्य की विजय के लिए दशहरा , विजयदशमी का पर्व मनाया जाता हैं | दशहरा के दिन जगह जगह मेलों का आयोजन किया जाता हैं | नवरात्रा स्थापना से लेकर विजयदशमी तक राम लीला का आयोजन किया जाता हैं राम और रावण की लीलाओं को दिखाया जाता हैं | राम सीता और लक्ष्मण के वनवास से लेकर लंका के रावण के वध करने तक की लीलाओं को दिखाया जाता है माता सीता और हनुमान जी के संवाद ,राम के द्वारा सबरी के झूंठे बेर खाना,लखमन का मुर्छित होना,हनुमान जी का सरजीवन बूंटी लाना और लक्ष्मण के प्राणों को बचाना,माता सीता को हनुमान जी द्वारा राम का संदेश देना आदि घटनाएँ राम लीला मैं हमे देखने को मिलती हैं और अंत मैं रावण का राम द्वारा अंत होता हैं और साथ ही राम लीला का भी अंत होता हैं |

विजयदशमी, दशहरा पर्व तिथि व मुहूर्त

विजयदशमी का त्योंहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार 30 सितम्बर 2017, वार – शनिवार को विजयदशमी, दशहरा का त्योंहार मनाया जायेगा | दशहरा पर्व का शुभ मुहर्त तिथि और समय हम आपको निचे दिखाने जा रहे हैं जिसकी सहायता से आप विजयदशमी का उत्सव मना सकते हैं |

दशहरा तिथि व मुहूर्त

  • विजय मुहूर्त = 14:47 से 15:34
  • वधि = ० घण्टे 16 मिनट्स
  • अपराह्न पूजा का समय = 14:02 से 16:20
  • अवधि = २ घण्टे 18 मिनट्स

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मैं दशहरा एक अलग अंदाज मैं मनाया जाता हैं कुल्लू का दशहरा पूरे भारत देश मैं बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ पर एक सप्ताह पूर्व इस पर्व की तैयारी शरू हो जाती है। स्त्रियाँ और पुरुष सभी सुंदर वस्त्रों से सज्जित होकर तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े, बाँसुरी आदि की तर्ज पर विजयदशमी का त्योंहार मनाया जाता है | पहाड़ी क्षेत्र के लोग अपने ग्रामीण देवता का बड़े ही धूम धाम से जुलूस निकाल कर पूजन करते हैं। देवताओं की मूर्तियों को एक आकर्षक पालकी में सुंदर ढंग से सजाया जाता है।और फिर पूरे गाँव मैं जुलुश निकला जाता हैं | कुल्लू नगर में देवता रघुनाथजी की वंदना से दशहरे के त्योंहार का प्रारंभ होता हैं और दशमी के दिन रावण दहन के साथ खत्म होता है।

दशहरा का महत्त्व

दशहरा का त्योंहार मनाने का बड़ा ही महत्व हैं | भारत एक क्रषि प्रदान देश हैं भारत की 70 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर करती हैं | किशान की खेती मैं जब अच्छी फशल होती हैं तो वह बहुत ही खुश होता हैं | और अपने देवी देवताओ को याद करता हैं और देवताओ के लिए प्रसाद का आयोजन करता हैं | दशहरा भी एक एसा ही त्योंहार हैं | जब किशान अपनी खेती मैं अच्छी पैदावार करके अनाज रूपी धन को घर लेकर आता हैं तो उसे बड़ी ख़ुशी होती हैं | और इस उपलक्ष में दशहरा की पूजा की जाती हैं और बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता हैं |

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