धन तेरस की खरीददारी का शुभ मुहर्त समय और महत्व : ये वस्तु खरीदने से मिलेगा 2018 में उत्तम लाभ

धन तेरस 2017 : धन तेरस के दिन भगवान् धन्वन्तरी का जन्म हुआ था इसलिए इसे धन तेरस के नाम से जाना जाता हैं | धन तेरस का त्योंहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तेरस को 17 अक्टूबर रविवार को मनाया जायेगा | इस दिन गहनों और बर्तन की खरीदारी जरूर की जाती है। वैसे तो धनतेरस के पूरे दिन लोग खरीरदारी करते हैं लेकिन मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में खरीददारी करने से वस्तुओं में तेरह गुना वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसलिए हर कोई चाहता है कि मां लक्ष्मी और भगवान धन्वतरि की कृपा उन पर बनी रहे। dhan terash pooja धन तेरस पर खरीददारी का शुभ मुहर्त समय : इस दिन स्थिर लग्न में की गयी खरीदारी अति शुभ फलदायक होती है।त्रयोदशी तिथि में स्थिर लग्न दोपहर 0:44 से शाम 05:34 बजे तक और रात 08:12 बजे तक होने के कारण इस बीच की गयी खरीदारी शुभफल दायी होती है।

धनतेरस पर पीतल के बर्तन खरीदना होता है शुभ :

dhan terash khrid कहा जाता हैं कि भगवान धनवंतरी को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है | इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे शंख और चक्र धारण किए हुए हैं। दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है क्योंकि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है। इसलिए हमे खाश तोर पर पीतल की धातु या बर्तन ही खरीदने चाहिए | और उस बर्तन की पूजा करनी चहिये |

धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहर्त, समय और उत्तम खरीद दारी की वस्तु

उत्तम खरीद करने के लिए 7.19 बजे से 8.17 बजे तक का सबसे अच्छा है. जानिए कब करें किस चीज की खरीदारी.

  • काल- सुबह 7.33 बजे तक दवा और खाद्यान्न.
  • शुभ- सुबह 9.13 बजे तक वाहन, मशीन, कपड़ा, शेयर और घरेलू सामान.
  • चर- 14.12 बजे तक गाड़ी, गतिमान वस्तु और गैजेट.
  • लाभ- 15.51 बजे तक लाभ कमाने वाली मशीन, औजार, कंप्यूटर और शेयर.
  • अमृत- 17.31 बजे तक जेवर, बर्तन, खिलौना, कपड़ा और स्टेशनरी.
  • काल- 19.11 बजे तक घरेलू सामान, खाद्यान्न और दवा.

धनतेरस पर खरीददारी का महत्व :

dhan terash mahtv भगवान धनवंतरी के पूजन का बहुत ही बड़ा महत्व हैं मना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान तेरस के दिन भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन को धन तेरस कहा जाता है | धन और वैभव देने वाली इस तेरस का विशेष महत्व माना गया है।कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय बहुत ही दुर्लभ और कीमती वस्तुओं के अलावा शरद पूर्णिमा का चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी के दिन कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवंतरी और कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को भगवती लक्ष्मी जी का समुद्र से अवतरण हुआ था | यही कारण है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन और उसके दो दिन पहले धनतेरस को भगवान धनवंतरी का जन्म दिवस धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धन तेरस के दिन पीतल या ताम्बे के बर्तन में ही भगवन धन्वन्तरी या माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं |

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