मुहर्रम ताजिया 2017 ताजिया का महत्व और मोहर्रम का इतिहास

सिया मुस्लिम मुहर्रम को बड़े ही शोक से मानते है | मुहर्रम के दस दिन तक बड़े ही धूम धाम से शोक मनाया जाता है और रोज़ा रखा जाता है | ग्यारहवे दिन ताजिया निकाला जाता है | इस लोग अपने आप को पिट -पिट कर दुःख मानते है | इन दिनों में इस्लाम धर्म पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी |हजरत मुहम्मद ने इस मास को अल्लाह का मास कहा है |

muharram 2017

मुहर्रम ताजिया दिन व दिंनाक Muharram Tajiya Day and Date

मुहर्रम इस्लामिक पंचांग का दूसरा पवित्र महा है | मुहर्रम को दस दिन आशुरा के रूप में मनाया जाता है इस महीने को शाहदत के रूप में मनाया जाता है इन दिनों में रोज़े रखने का महत्व होता है |

वर्ष 2017 में मुहर्रम अक्‍टूबर 1 रविवार को मनाया जायेगा |

मोहर्रम का इतिहास History of Muharram

मुहर्रम

बताया जाता है की हिजरी सवत 60 में कर्बला सीरिया के गवर्नर याजिद ने खुद को मुल्क का खलीफा घोषित कर दिया था | इस के बारे में बतया जाता है की वह इस्लाम धर्म का शहंशाह बनाना चाहता था | उसने अपने लोगो को डराना धमकाना शुरू कर दिया | परन्तु हजरत मुहम्मद के वारिसो और कुछ साथियों ने यजीद के सामने अपने घुटने नहीं टेके | और उनका जमकर मुकाबल किया | एक बार की बात है की इमाम हुसैन मदीना से इराक की और जा रहे थे | तभी याजिद ने उन पर हमला कर दिया | तब उनके पास 72 आदमी थे और यजीद के पास 8000 से ज्यादा सैनिक थे | फिर भी उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा उनमे से काफी लोग शहीद हो गए | जबकि इमाम हुसैन इस लड़ाई बच निकले और इमाम हुसैन ने अपने साथियों को कब्र में दफ़न किया | मुहर्रम के दसवें दिन जब इमाम हुसैन नमाज अदा कर रहे थे | तब यजीद ने उन्हें दोखे से मरवा दिया था | उसी दिन की याद में मुहर्रम ताजिया मनाया जाता है | क्यों की इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के रूप में मनाया जाता है |

मुहर्रम ताजिया क्या हैं Muharram what is Tajiya

मुहर्रम 2017

मुहर्रम के दिन ताजिया को बांस की लकड़ी से झाकिया सजाई जाती है | ताजिया को सजा कर मुहर्रम के दिन जुलस निकला जाता है | इस ताजिया को इमाम हुसैन की कब्र बनाकर उसमे दफनाते है | इसे शहीदों को श्रद्धाजली देना कहा गया है | इस दिन सिया मुसलिम मातम मानते है और फक्र से शहीदों को याद करते है | यह ताजिया मुहर्रम के दस दिन बाद
ग्यारहवे दिन निकला जाता है | इस दिन को पूर्वजो की कुर्बानी की गाथा ताजिये के द्वारा बताई जाती है |

मुहर्रम कैसे और क्यों मानते है How and why do Muharram

कुरान में बताया गया है की यह महिना बिल्कुल पाक है | इस दिन को इस्लाम धर्म के लोग बड़े ही धूम धाम से मानते है | इन दस दिनों में रोज़े रखे जाते है | जिन्हें इस्लाम धर्म में आशुरा कहते है | इस्लाम धर्म के अनुसार यह महिना इबादत का महिना होता है |हजरत मुहम्मद के अनुसार इन दिनों में रोजे रखने से बुरे कर्मो का अंत होता है | और उन पर अल्लहा की रहम होकर उनके किये गये गुनाहों को माफ़ कर दिया जाता है या गुनाह माफ़ होता है |

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