दशहरा 2017 विजयदशमीं की तिथि मुहर्त पूजन विधि भगवान राम और रावण की कहानी

विजयदशमीं 2017 : दशहरा का त्योंहार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी 30 सितम्बर को विजयदशमी अथवा दशहरे के रुप में देशभर में मनाया जाता है | वहीं दशहरा के दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिये भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है और मां दूर्गा की पूजा भी की जाती है।दशहरा एक ऐसा त्योंहार हैं जिस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत होती हैं |

happy dashra 2017

इस दिन आदमी अपने बुरे कर्मो को त्याग कर अच्छाई के मार्ग की और अग्रसर होता हैं | दशहरा एक उस खाश दिन का नाम हैं जिस दिन रावण की सभी बुराइयों का अंत होता हैं और अच्छाई की जीत होती हैं | रावण जो एक घोर पापी और दुष्ट राक्षस था,जिसने माता सीता जैसी नारी का अपहरण कर बंदी बना लिया था और कई दिनों तक उसके साथ अत्याचार करता रहा | रावण एक महान पापी होने के बाद भी उसने भगवान् शिव की कठोर तपस्या करके,अपने दस शिशो को शिव को अर्पित कर दिए थे | भगवान् शिव रावण की भक्ति से खुश होकर उसे अमर होने का वरदान दे डाला और रावण के दस सर वापस लगा दिए | इस प्रकार रावण को दशानन कहा गया | भगवान् शिव की भक्ति और शास्त्रों के ज्ञाता रावण विश्व के प्रकांड पंडित कहलाये ,लेकिन भगवान् शिव से मिले वरदान के बाद रावण का घमंड बढ़ गया और घमंडी रावण बन गया ,अपनी मान मर्यादा को भूल कर राज और प्रजा के साथ अत्याचार करने लगा,देवताओं को अपने वश मैं कर स्वर्ग लोक पर शासन करने की सोची और देवताओं के साथ बार बार युद्ध किया लेकिन हर बार मुह की खानी पड़ी | लेकिन एक दिन ऐसा आया की रावण के बुरे कर्मो का और रावण का अंत हुआ | विजय दसवीं के दिन भगवान् श्री राम ने रावण का अंत कर बुराई पर अच्छाई की जित हाशिल की ,इसलिए विजयदशमीं का त्योंहार हर साल मनाया जाता हैं |


दशहरा 2017 तिथि मुहर्त

30 सितम्बर 2017 (शनिवार)
विजय मुहूर्त- 14:08 से 14:55
अपराह्न पूजा समय- 13:21 से 15:42
दशमी तिथि आरंभ- 23:49 (29 सितंबर)
दशमी तिथि समाप्त- 01:35 (01 अक्तूबर)


दशहरा 2017 पूजन विधि

vijay dasmi pooja vidhi
पूजा करते समय गाय के गोबर से 10 कंडे बनाएं और उस पर दही लगाएं। कंडो पर उस जौ को रखें जो नौ दिनों तक मां की मूर्ति के पास रखा था। इसके पश्चात धूप-दीप जलाकर आरती करें। विजयदशमी का त्यौहार काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, अहंकार के त्याग की प्रेरणा देता है।सामान्यजन को चाहिए कि इस दिन प्रातःकाल देवी का विधिवत पूजन करके नवमीविद्धा दशमी में विसर्जन तथा नवरात्र का पारण करें। अपराह्न बेला में ईशान दिशा में शुद्ध भूमि पर चंदन, कुंकुम आदि से अष्टदल कमल का का निर्माण करके संपूर्ण सामग्री जुटाकर अपराजिता देवी के साथ जया तथा विजया देवियों का पूजन करें। शमी वृक्ष के पास जाकर विधिपूर्वक शमी देवी का पूजन कर शमी वृक्ष के जड़ की मिट्टी लेकर वाद्य यंत्रों सहित वापस लौटें। यह मिट्टी किसी पवित्र स्थान पर रखें। इस दिन शमी के कटे हुए पत्तों अथवा डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए।


दशहरा पर क्षत्रीय पूजाविधि 

kshtriya pooja in deshrah
दशहरा के दिन क्षत्रिय शस्त्र पूजन करते हैं जबकि इस दिन ब्राह्मण शास्त्रों का पूजन करता है। वहीं व्यापार से जुड़े यानी वैश्य वर्ग के लोग अपने प्रतिष्ठान आदि का पूजन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है, उसमें जीवनभर निराशा नहीं मिलती। यानी वह काम जीवनभर अच्छा फल देता है।


सांस्कृतिक एकता का प्रतीक दशहरा

भारत एक विशाल भू भाग वाला देश है। इसी भौगोलिक संरचना जितनी विशाल है, उतनी ही विशाल है इसकी संस्कृति। यह इस भारत की सांस्कृतिक विशेषता ही है कि कोई भी त्योंहार समस्त भारत में एक जैसी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, भले ही उसे मनाने की विधि भिन्न हो। ऐसा ही एक पावन पर्व है दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है।


अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व है विजयदशमी,

ma durge pooja on deshehra
सत्य की जीत और अधर्म का नाश ही विजयदशमी पर्व का मूल सार है। आश्विन मास की दशमी तिथि को ही भगवान श्रीराम ने लंकाधिपति रावण का वध किया था। उस दिन से ही यह तिथि विजयदशमी के नाम से जानी जाती है। नौ दिन मां दुर्गा शक्ति की उपासना के बाद दशहरे का त्यौहार कई मायनों में खास है। किसी भी नये कार्य की शुरुआत के लिये विजयदशमी सबसे उपयुक्त तिथि है।


विजयदशमी (दशहरा) बुराई पर अच्छाई की जीत

Ram Win on Raavan
विजयदशमी के दिन दुर्गा पूजा त्योहार की समाप्ति होती है। इस दिन को विजयादशमी कहते हैं। बुराई पर अच्छाई के प्रतीक रावण का पुतला इस दिन समूचे देश में जलाया जाता है।इस दिन भगवान राम ने राक्षस रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से छुड़ाया था। रावण को मारने से पूर्व राम ने दुर्गा की आराधना की थी। मां दुर्गा ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें विजय का वरदान दिया था।


विजय पर्व दशहरे की कहानी

दशहरे का उत्सव शक्ति और शांति का समन्वय बताने वाला उत्सव है। नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की उपासना करके शक्तिशाली बना हुआ मनुष्य विजय प्राप्ति के लिए उतावला रहता है। इस दृष्टि से दशहरे अर्थात विजय के लिए प्रस्थान का उत्सव आवश्यक भी है।
भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। प्रत्येक व्यक्ति और समाज के रुधिर में वीरता का प्रादुर्भाव हो कारण से ही दशहरे का उत्सव मनाया जाता है। यदि कभी युद्ध अनिवार्य ही हो तब शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला कर उसका पराभव करना ही कुशल राजनीति है। भगवान राम के समय से यह दिन विजय प्रस्थान का प्रतीक निश्चित है। भगवान राम ने रावण से युद्ध हेतु इसी दिन प्रस्थान किया था। मराठा रत्न शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन प्रस्थान करके हिन्दू धर्म का रक्षण किया था। भारतीय इतिहास में अनेक उदाहरण हैं जब हिन्दू राजा इस दिन विजय-प्रस्थान करते थे।


दशहरे पर शस्त्र और शास्त्र पूजन का महत्व 

shastar pooja on vijaydashmi


विजयादशमी के दिन रावण को मारते हुए राम का चित्रण

ram died to raam on dashehra
इस दिन को भगवान श्रीराम से जोड़कर विजय दशमी के उपलक्ष्य में मनाते हैं। दूसरा इस दिन दशानन यानी दस सिर वाले रावण का वध हुआ था, इसलिए इस दिन को दशहरा के रूप में मनाते हैं।

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