विवाह पंचमी 2017 श्रीराम सीता के विवाह के दिन की कथा

विवाह पंचमी 2017 : विवाह पंचमी को एक पर्व के रूप में मनाया जाता है | पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की इस दिन भगवान श्रीराम और सीता माता का विवाह हुआ था | इस दिन को श्रीराम और सीता माता की शादी की सालगिरह के रूप में भी मनाया जाता है | यह त्यौहार सबसे ज्यादा नेपाल में मनाया जाता है | क्योकि सीता माता मिथिला नरेश राजा जनक की पुत्री थी | मिथिला (नेपाल )में यह त्यौहार परम्परागत तरीके से मनाया जाता है |

विवाह पंचमी 2017

कब मनाई जाती हैं विवाह पंचमी दिन व दिंनाक Vivah Panchami Day and Date

बताया जाता है की (मार्गशीर्ष )अगहन मास की शुक्ल पंचमी के दिन दुनिया का सबसे अनूठा स्वयंबर हुआ था | यह स्वयंबर दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंबर था | इस स्वयंबर का वर्णन पुराणों में मिलता हैं | विवाह पंचमी वर्ष 2017 में 23 नवम्बर 2017 को मनाया जाएगा |

पंचमी तिथि की शुरुवात 22 नवंबर 2017 को = 16:24
पंचमी तिथी समाप्त 23 नवंबर 2017 को = 1 9 04

विवाह पंचमी की कथा Vivah Panchami Katha in Hindi

 श्रीराम सीता के विवाह का दिन

पुराणों में बताया गया है की भगवान् श्रीराम और माता सीता भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के रूप में पैदा हुए थे | राजा दशरथ के घर पैदा हुए रामजी और राजा जनक की पुत्री के रूप में सीता पैदा हुए थे | बताया जाता है की सीता माता का जन्म धरती से हुआ था | जब राजा जनक हल जोत रहे थे तब उन्हें एक नन्ही सी बच्ची मिली थी | यह जनक पुत्री के नाम से जनि गई | एक बार की बात है सीता ने मंदिर में रखे धनुष को उठा लिया था | जिस धनुष को परशुराम के अलावा किसी ने नहीं उठाया था | तब से राजा जनक ने निर्णय लिया की जो भगवान विष्णु के इस धनुष को उठाएगा उसी से सीता की शादी होगो |

उसके बाद स्वयंबर का दिन निश्चित किया गया और सभी जगह सन्देश भेजा गया की इस स्वयंबर में हिसा ले | इस स्वयंबर में महर्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्षमण भी दर्शक के रूप में शामिल हुए | कई राजाओं ने प्रयास किया | लेकिन कोई भी उस धनुष को हिला ना सका | प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर की बात हैं | राजा जनक ने करुणा भरे शब्दों में कहा की मेरी लड़की के लिए कोई योग्य नहीं है | तब जनक की इस मनोदशा को देख कर महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने को कहा |

Vivah Panchami katha

गुरु की आज्ञा की पालना करते हुए भगवान श्रीराम ने धनुष को उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे | प्रत्यंचा चढाते वक्त धनुष टूट गया | इस प्रकार यह स्वयंबर जीत उन्होंने सीता से विवाह किया | इस विवाह से धरती,पाताल एवम स्वर्ग लोक में खुशियों की लहर दोड़ पड़ी |आसमान से फूलों की बौछार की गई | पूरा ब्रह्माण्ड गूंज उठा चारों तरफ शंख नाद होने लगा | इसी प्रकार आज भी विवाह पंचमी को सीता माता एवम भगवान राम के विवाह के रूप में हर्षो उल्लास से मनाया जाता हैं | मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-सीता के शुभ विवाह के कारण ही यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दम्पत्ति माने गए हैं।

कैसे मनाई जाती हैं विवाह पंचमी

कैसे मनाई जाती हैं विवाह पंचमी

जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा पालन करके पुरुषोत्तम का पद पाया था | उसी तरह माता सीता ने सारे संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पावन दिन सभी को राम-सीता की आराधना करते हुए अपने सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए प्रभु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। विवाह पंचमी उत्सव खासतौर पर नेपाल एवम भारत के अयोध्या में मनाया जाता हैं | पुरे रीती रिवाज के साथ आज भी लोग इस उत्सव का आनंद लेते हैं |

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