शरद पूर्णिमा 2017 क्यों मनाई जाती है शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा का यह त्यौहार आश्विन मास की पूर्णिमा को सम्पूर्ण भारत के हिन्दुओ द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है | इस त्यौहार के आने के साथ ही वर्षा काल की समाप्ति और शरद ऋतू का आगमन माना जाता है | शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहते हैं |पौराणिक मानयता के अनुसार एक वर्ष में केवल इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है | बाकि पूर्णिमा के दिन ऐसा कभी नहीं होता है |

 शरद पूर्णिमा

Sharad purnimaशरद पूर्णिमा 2017 तिथि तथा समय

शरद पूर्णिमा का यह त्यौहार इस वर्ष 5 अक्टूबर 2017 को मनाया जायेगा तथा चन्द्र दर्शन का समय साय: 6:20 बजे है।|

शरद पूर्णिमा का व्रत

शरद पूर्णिमा की खीर

शरद पूर्णिमा हिन्दुओ का प्रमुख त्योहारों में सुमार है | शरद पूर्णिमा का व्रत भी रखा जाता है | इस व्रत को हम कई नामो से जानते है |जैसे कोजागर व्रत और कौमुदी व्रत है | शरद पूर्णिमा की व्रत की कथा मने बताया गया है | की इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महारास रचा था | और यह भी बताया गया है की इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत झाडता है | और उत्तर भारत में रात को खीर बनाकर रात को चांदनी में रखा जाता है |

शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथा

एक बार एक साहूकार के दो लडकिया थी | दोनों लड़किया सरद पूर्णिमा का उपवास करती थी | उनमे बड़ी लड़की जो सम्पूर्ण उपवास करती थी और छोटी लड़की अधुरा उपवास करती थी | साहूकार ने दोनों लडकियों का विवहा कर दिया | उनमे छोटी लड़की के पुत्र प्राप्त होता और वह मर जाता था | उसने पंडित से इस का कारण पूछा तो पंडित ने लड़की को बताया की आपने पूर्णिमा उपवास अधुरा किया था | जिसके कारण तुम्हारी सन्तान होते ही मर जाती है |अगर तुम पूर्णिमा का विधिपूर्वक उपवास करोगी तो तुम्हारी सन्तान जीवित रह सकती है।

शरद पूर्णिमा त्योहार

तब से लड़की ने विधि पूर्वक उपवास किया | उसके लड़का पैदा हुआ | परन्तु वह तुरंत ही मर गया | उसने लड़के को चोकी पर लेटा दिया और कपडे से ढक दिया | वह तुरंत बड़ी बहन के पास गई और उसे बुलाकर लाई और बेठने के लिए वही चोकी दे दी | चोकी पर बड़ी बहन ज्योही बेठने लगी तो उसके लहगे की लावन उस लड़के के लग गई | तो लड़का रोने लगा | उसकी बड़ी बहन ने कहा की तू मुझे कलंकित करना चाहती थी ये मेरे बेठने से मर जाता तो छोटी बहन ने कहा ये तो पहले से ही मारा हुआ था | तेर ही भाग्य और पुण्य से जीवित हुआ है | उसके बाद पुरे गाँव में पूर्णिमा का उपवास करने का ऐलान करवा दिया |

क्यों मनाई जाती है शरद पूर्णिमा

Laxmi Puja

नारदपुराण के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी अपने हाथों में वर और अभय लिए घूमती हैं। इस दिन वह अपने जागते हुए भक्तों को धन-वैभव का आशीष देती हैं। | भक्त मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं | शाम के समय चन्द्रोदय होने पर मिट्टी के दीपक जलाने चाहिए | इस दिन घी और चीनी से बनी खीर चंद्रमा की रोशनी में रखनी चाहिए | खीर को वहा पर रखना चाहिए जहा चन्द्रमा की रोशनी ठीक ढंग से पड़े | इसके बाद रात 12 बजे बाद माता लक्ष्मी को अर्पित करनी चाहिए |

You Must Read

Rajasthan Police Constable Application Form Last date 2017-1... Hello Friends, The latest News for Rajasthan Polic...
Rose Day HD Wallpapers Images Photos Gallery for Lover and G... Rose Day 2018 Images Wallpaper Download : Friends ...
Sapna Choudhary Live Stage Dance in Gudha Jhunjhunu Raj on 6... नमस्कार मित्रो : आपको यह जानकर बड़ा हर्ष होगा की आप...
कजरी तीज 2017 का दिन व्रत पूजा कहानी फल और महत्व... कजरी तीज का त्यौहार उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर ...
Jio Phone Online Booking Rs 1500 Jio.com Starting 24 August ... Hello greeting to my all friend I'm giving you the...
नेल्सन मंडेला के विचार, और उन के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य... नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस 18 जुलाई को मना...
छोटी दिवाली 2017 नरक चतुर्दशी की पूजा विधि और राजा बलि की कथ... छोटी दिवाली 2017 : धनतेरस के अगले दिन और बड़ी दिवाल...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *