शिक्षक दिवश सायरी 2017 टीचर्स डे पर सायरी और कबीर दास के दोहे

Latest Update 2017 : आज 5 सितम्बर हैं ,एक साल से मैं शिक्षक दिवश का बड़ा ही इन्तजार कर रहा था |आज मैं अपने पूज्य शिक्षक के बारे में स्कुल में अपने विचार व्यक्त करूंगा ,क्योंकि मेरे वो शिक्षक जिन्होंने मुझे एक काबिल इंसान बनाया,मुझे कुमार्ग से सुमार्ग की और चलना सिखाया ,मेरा अंधकार से रौशनी की और प्रस्थान करवाया,आज उस गुरु को में शत शत नमन करता हूँ |और में अपने गुरु का जिन्दगी भर ऋणी रहूँगा | उनका अहसान कभी नहीं भूलूंगा |

शिक्षक दिवश की शुभकामनाएँ 

शिक्षक दिवश 2017 : हर साल शिक्षक दिवश 5 सितम्बर को मनाया जाता हैं | शिक्षक दिवश नजदीक आ रहा हैं | पांच सितम्बर को शिक्षक दिवश हैं | सभी स्कूलों के छात्र और छात्राएँ टीचर्स डे पर अपने गुरु के बारे मैं कुछ स्पेशल बोलने के लिए अभी से ही तैयारियां करना शरू कर दी हैं |शिक्षक दिवश पर सायरी , शिक्षक दिवश पर निबन्ध ,शिक्षक दिवश पर भाषण आदि के माध्यम से सभी छात्र अपनी अपनी वाणी से शब्दों को बया करेंगे | शिक्षक दिवश पर सभी छात्र अपने अपने गुरु के गुणों का बखान करेंगे ,वैसे तो गुरु के गुणों का बखान करना असम्भव है , लेकिन फिर भी गुरु के बारे मैं दो शब्द जरुर बोले | एक दोहे के माध्यम से कबीर दास जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा हैं कि ”


शिक्षक दिवश पर कबीर दास जी के दोहे


यह तन विष की बेल री, गुरु अमृत की खान
शीश दिए जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान ।

अथार्थ : यह शारीर एक विष से भरे पौधे के सामान है जिसे एक गुरु रूपी अमृत ही स्वच्छ कर सकता है, गुरु रूपी अमृत प्राप्त करने के लिए यदि अपने शीश को भी कटाना पड़े तो भी सस्ता हैं | इसलिए गुरु को पाना बहुत ही मुस्किल हैं | कबीर दास जी ने अपने एक दोहे के माध्यम से गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए ,लिखा हैं –

गुरु गोविन्द दोउ खड़े ,काके लागु पाय,बलिहारी गुरु आपनो गोविन्द दियो मिलाए , ! कबीरा …..

अथार्थ : कबीर दास जी ने गुरु को भगवान् से भी बढकर माना हैं | क्योंकि भगवान् तक पहुँचाने का रास्ता गुरु ही बताता हैं | इसलिए गुरु को भगवान से बढकर माना गया हैं |

सात समुन्द्र मसी करू लेखनी बनराय
धरती का कागद करू गुरु गुन लिखे न जाय … कबीरा |

अथार्थ : कबीर दास जी ने गुरु की महिमा इतनी बड़ी बताई है की अगर मैं पूरी धरती का कागज करू और पूरे जंगले की लकड़ी की लेखनी और सात समुन्द्र की स्याही करू तो भी गुरु के गुणों को नहीं लिख सकता हूँ |


शिक्षक दिवश की सायरी


गुरूदेव के श्रीचरणों में
श्रद्धा सुमन संग वंदन
जिनके कृपा नीर से
जीवन हुआ चंदन
धरती कहती, अंबर कहते
कहती यही तराना
गुरू आप ही वो पावन नूर हैं
जिनसे रौशन हुआ जमाना

गुरू बिना ज्ञान कहाँ,
उसके ज्ञान का आदि न अंत यहाँ।
गुरू ने दी शिक्षा जहाँ,
उठी शिष्टाचार की मूरत वहाँ।


टीचर्स डे सायरी 2017


गुमनामी के अंधेरे में था
पहचान बना दिया
दुनिया के गम से मुझे
अनजान बना दिया
उनकी ऐसी कृपा हुई
गुरू ने मुझे एक अच्छा
इंसान बना दिया

जीवन का रास्ता कठिन हैं
सत्य का विचार कठिन हैं
लेकिन जो सत्य सिखाये वही सच्चा शिक्षक हैं |


शिक्षक दिवस पर गुरु शिष्य की सायरी


शिक्षक हैं एक दीपक की छवि
जो जलकर दे दूसरों को रवि
न रखता वो कोई चाहत बड़ी
बीएस शिष्यों की सफलता ही हैं उसकी लड़ी


शिक्षक दिवस पर गुरु के लिय सायरी


भीड़ मैं हैं बस एक गुरु अपना
दिखाए जो जीवन का सपना
पग पग पर देते वो दिशा निर्दश
गुरु से ही सजे सजे जीवन परिवेश

बिना गुरु नहीं होता जीवन साकार
सर पर होता जब गुरु का हाथ
तभी बनता जीवन का सही आधार
गुरु ही हैं सफल जीवन का आधार

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