स्वतंत्रता दिवस 2020 जानिए भारत के तिरंगे का इतिहास महत्व और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम

Independence Day 2020 Independence Day is annually celebrated on 15 August, as a national holiday in India commemorating the Nations independence from the United Kingdom on 15 August 1947 the day when the UK Parliament passed the Indian Independence Act 1947 transferring legislative sovereignty to the Indian Constituent Assembly. 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था। इस दिन को हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन भारत के सभी सरकारी संस्थानों,सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और घरों में झंडा फहराया जाता है। इस दिन हर हिन्दुस्तानी आजादी के इस जश्न को अपने-अपने अंदाज में मनाता है। कोई इस दिन अपने शरीर पर तिरंगे का टैटू बनवाता है तो कोई तिरंग या तीन रंगों वाला कपड़ा पहनता है तो कोई तिरंगे के रंग को मेकअप के रूप में इस्तेमाल करता है। Every year, the Prime Minister of India hoists the national flag at Delhi’s Red Fort and makes an address to the nation, which is followed by a military parade. The President of India also delivers the ‘address to the nation’ speech. In honour of the occasion, twenty-one gun shots are fired.The day is annually observed on August 15 as a national holiday in the country.

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा वंदेमातरम् वंदेमातरम्

15 august jhanda divsh

तो आइए आज हम आपको बताते हैं क्या है तिरंगे का इतिहास। आजादी के पहले और फिर आजादी के बाद भारत का झंडा कैसा था और इसमें कितने रंग थे।

तिरंगा का इतिहास

पहला झंडा : पहला भारतीय झंडा 7 अगस्त 1906 में कलकत्ता के पारसी बगान स्कवॉयर में फहराया गया था। इस झंडे में हरे, पीले और लाल रंग की तीन पट्टियां थी। झंडे की बीच की पट्टी पर वंदेमातरम लिखा हुआ था। नीचे की पट्टी पर सूर्य और चांद का चिन्ह बना हुआ था।

दूसरा झंडा

भारत का दूसरा झंडा 1907 में मैडम कामा और निर्वासित क्रांतिकारियों के उनका संगठन ने पेरिस में फहराया था। यह झंडा पहले वाले से ज्यादा अलग नहीं था । इसमें हरे, पीले और नारंगी रंग की तीन पट्टियां थी। इस झंड़े की बीच की पट्टी पर भी वंदेमातरम लिखा हुआ था। नीचे की पट्टी पर सूर्य और चांद का चिन्ह बना हुआ था।

तीसरा झंडा

इस भारतीय झंडे को डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने होम रूल आन्दोलन 1917 के दौरान फहराया था। इस झंडे में ऊपर की तरफ यूनियन जैक था। झंडे में बिग डिपर या सप्तर्षि नक्षत्र और अर्धचंद्र चंद्र और सितारा भी था।

चौथा झंडा

1916 में लेखक और भूभौतिकीविद् पिंगाली वेंकैया ने देश की एकजुटता के लिए एक झंडा डिजाइन किया था। इस झंडे को डिजाइन करने से पहले उन्होंने महात्मा गांधी से अनुमति ली थी। गांधीजी ने उनको भारत का आर्थिक उत्थान दर्शाते हुए झंडे में चरखा शामिल करने की सलाह दी थी। गांधी जी ने इस झंड़े को 1921 में फहराया था। इसमें सबसे ऊपर सफेद, बीच में हरी और सबसे नीचे लाल रंग की पट्टियां थी। ये झंडा सभी समुदायों का प्रतीक माना जाता था।

पांचवां झंडा

1931 में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में ऐतिहासिक बदलाव किया गया था। कांग्रेस कमेटी बैठक में पास हुए एक प्रस्ताव में भारत के तिंरगे को मंजूरी मिली थी। इस तिरंगे में केसरिया रंग ऊपर, सफेद बीच में और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टी थी। सफेद रंग की पट्टी पर नीले रंग का चरखा बना हुआ था।

छठा झंडा

आजाद भारत के लिए संविधान सभा ने इसी भारतीय झंडे को स्वीकार कर लिया था। हालांकि चरखे की जगह इसमें सम्राट अशोक के धर्म चक्र शामिल कर लिया गया था। यही झंडा 1947 से भारत का राष्ट्रीय ध्वज है।

जानिए क्या हैं राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कायदे-कानून

1. झंडा हाथ से काते और बुने गए ऊनी, सूती, सिल्क या खादी से बना होना चाहिए। झंडे का आकार आयताकार होना चाहिए। इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होना चाहिए। केसरिया रंग को नीचे की तरफ करके झंडा लगाया या फहराया नहीं जा सकता।

तिरंगा फहराने का समय

सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही तिरंगा फहराया जा सकता है। झंडे को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जा सकता। झंडे को आधा झुकाकर नहीं फहराया जाएगा सिवाय उन मौकों के जब सरकारी इमारतों पर झंडे को आधा झुकाकर फहराने के आदेश जारी किए गए हों।

एसे होता हैं तिरंगे का अपमान

1. झंडे को कभी पानी में नहीं डुबोया जा सकता। किसी भी तरह फिजिकल डैमेज नहीं पहुंचा सकते। झंडे के किसी भाग को जलाने, नुकसान पहुंचाने के अलावा मौखिक या शाब्दिक तौर पर इसका अपमान करने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

2. झंडे का कमर्शल इस्तेमाल नहीं कर सकते। किसी को सलामी देने के लिए झंडे को झुकाया नहीं जाएगा। अगर कोई शख्स झंडे को किसी के आगे झुका देता हो, उसका वस्त्र बना देता हो, मूर्ति में लपेट देता हो या फिर किसी मृत व्यक्ति (शहीद आर्म्ड फोर्सेज के जवानों के अलावा) के शव पर डालता हो, तो इसे तिरंगे का अपमान माना जाएगा।

3. तिरंगे की यूनिफॉर्म बनाकर पहनना गलत है। अगर कोई शख्स कमर के नीचे तिरंगे को कपड़ा बनाकर पहनता हो तो यह भी अपमान है। तिरंगे को अंडरगार्मेंट्स, रुमाल या कुशन आदि बनाकर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

4. झंडे पर किसी तरह के अक्षर नहीं लिखे जाएंगे। खास मौकों और राष्ट्रीय दिवसों जैसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडा फहराए जाने से पहले उसमें फूलों की पंखुड़ियां रखने में कोई आपत्ति नहीं है।

5. किसी कार्यक्रम में वक्ता की मेज को ढकने या मंच को सजाने में झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। गाड़ी, रेलगाड़ी या वायुयान की छत, बगल या पीछे के हिस्से को ढकने में यूज नहीं कर सकते। झंडे का इस्तेमाल किसी इमारत में पर्दा लगाने के लिए नहीं किया जा सकता।

6. फहराए गए झंडे की स्थिति सम्मानजनक बरकरार होनी चाहिए। फटा या मैला-कुचैला झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए। झंडा फट जाए, मैला हो जाए तो उसे एकांत में मर्यादित तरीके से पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए।
7. यदि झंडे को किसी मंच पर फहराया जाता है, तो उसे इस प्रकार लगाया जाना चाहिए कि जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो झंडा उसके दाहिनी ओर रहे। एक तरीका यह भी है कि झंडे को वक्ता के पीछे दीवार के साथ और उससे ऊपर लेटी हुई स्थिति में प्रदर्शित किया जाए।

8. किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या उससे ऊपर या उसके बराबर नहीं लगाया जा सकता। इसके अलावा, फूल, माला, प्रतीक या अन्य कोई वस्तु झंडे के पोल के ऊपर रखी जाए।

राष्ट्रीय ध्वज अशोक चक्र की विशेषता

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राष्ट्रीय ध्वज में यह गहरे नीले रंग के रूप में शामिल किया गया है और इसके अंदर 24 लाइनें होती है जिसका अर्थ है जीवन और विकास निरंतर चलता रहता है। तिरंगे के अंतिम में गहरा हरा रंग होता है जो भारत भूमि की पवित्रता और उनकी हरयाली का प्रतीक है। राष्ट्रीय ध्वज का अनुपात 2:3 होता हो तो भारतीय ध्वज संहिता नियम अनुसार भारतीय झंडा खादी में ही बना होना चाहिए।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में चरखे की जगह अशोक चक्र लगाने पर गांधीजी का आपतिजनक ब्यान

gandhiji ka charkha

भारत के राष्ट्रीय ध्वज में चरखे की जगह अशोक स्तंभ से लिए गये अशोक चक्र को चुनने से महात्मा गाँधी खफा हो गये थे और 6 अगस्त 1947 को अपनी नारजगी वह यह तक कह गये कि भारतीय संघ के झंडे में चरखा नहीं हुआ तो मैं उसे सलाम नही करूंगा इसके पीछे उनका तर्क था कि चक्र अशोक की लाट से चुना है और यह हिंसा को दर्शाता है और उन्होंने आजादी की सम्पूर्ण लड़ाई अहिंसा के सिद्धांत पर लड़ी है। नेहरु और पटेल को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने गाँधी जी तिरंगे में चक्र का मतलब विकास बताया और यें भी कहा कि तिरंगे में अशोक चक्र अहिंसा का प्रतीक चरखे का ही एक रूप है जिसके बाद गाँधी जी ने पूर्ण सहमत ना होते हुए भी अशोक चक्र वाले तिरंगे के लिए मान गयें।

Long years ago we made a tryst with destiny, and now the time comes when we will redeem our pledge, not wholly or in full measure, but very substantially. At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom. The Independence Day is celebrated with great enthusiasm in all over the India. On this day tributes are paid to the freedom fighters who sacrificed their lives to gain the freedom for India. The main event takes place in New Delhi, where the Prime Minister hoists the National Flag at the Red Fort accompanied with the gun shots, parade, amazing live performances and music

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