हिंदी दिवश 2017 का महत्व, कविता नारे और बधाई संदेश

हिंदी दिवश 2017 : भारत देश एक हिंदी भाषी देश हैं | इसलिए इसे हिदुस्तान भी कहा गया हैं | 14 सितंबर, 1949 के दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला था | तब से लेकर आज तक 14 सितंबर को हिंदी दिवश मनाते आ रहे हैं और भविष्य में मनाते रहेगे |

hindi Divash

हिंदी दिवश क्यों मनाया जाता हैं ? इसके पीछे की क्या कहानी हैं ? आइये जानते हैं |

दोस्तों हमारा भारत देश 1947 को अंग्रेजी हुकुमत से आजाद हुआ था | आजाद भारत के सामने भाषा को लेकर बहुत बड़ा बवाल खड़ा हो गया | क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती है | 6 दिसंबर 1946 को आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए एक संविधान सभा का गठन किया गया | संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारूप को मंजूरी दे दी और 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हुआ | लेकिन भारत की कौन सी राष्ट्रभाषा चुनी जाएगी ये मुद्दा काफी अहम था | काफी सोच विचार करने के बाद हिंदी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया | संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिंदी को अंग्रजों के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था | 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी |

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व समझते हुए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जायेगा , और मनाते आरहे हैं व् मनाते रहेंगे |

पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था.

हिंदी दिवस की 10 खास बातें जानिए

हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन देश भर में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और प्रोत्‍साहन दिया जाता है। इसके अलावा 10 जनवरी को विश्‍व हिंदी दिवस भी मनाया जाता है। आइये जानते हैं हिंदी दिवस क्‍यों मनाया जाता है और इससे जुड़ी कुछ खास बातें –

  1.  14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के चलते सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को पहला हिंदी दिवस मनाया गया ।
  2.  पूरे विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी का चौथा स्थान है। हिंदी भाषा पर अंग्रेजी के शब्दों का भी बहुत अधिक प्रभाव हुआ है और कई शब्द प्रचलन से हट गए और अंग्रेजी के शब्द ने उनकी जगह ले ली है।
  3. हिंदी सप्ताह 14 सितंबर को हिंदी दिवस से एक सप्ताह के लिए मनाया जाता है। इस पूरे सप्ताह अलग-अलग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। हिंदी पखवाड़ा 14 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलता है।
  4. विश्‍व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महाराष्‍ट्र के नागपुर से 1975 में हुई थी। वर्ष 2006 में इसे आधिकारिक दर्जा और विश्व स्तर पर पहचान मिली।
  5. भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। हमारे देश के 77% लोग हिंदी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं। हिंदी उनके कामकाज का भी हिस्‍सा है।
  6. हिंदी की खास बात यह है कि इसमें जिस शब्‍द को जिस प्रकार से उच्‍चारित किया जाता है, उसे लिपि में लिखा भी उसी प्रकार जाता है।
  7. हिंदी शब्‍द मूल रूप से फारसी से उत्‍पन्‍न हुआ है। यह सिंधी सभ्‍यता से आए शब्‍द सिंध का अपभ्रंश है जो कालांतर में हिंद हो गया।
  8. अंग्रेजी भाषा हिंदी पर हावी है लेकिन रोचक बात यह है कि अंग्रेजी की रोमन लिपि में शामिल कुछ वर्णों की संख्‍या 26 है, जबकि हिंदी की देवनागरी लिपि के वर्णों की संख्‍या ठीक इससे दोगुनी यानी 52 है।
  9. अमीर खुसरो पहले व्‍यक्ति थे जिन्‍होंने हिंदी में कविता लिखी थी। हिंदी भाषा के इतिहास पर आधारित काव्‍य रचना सर्वप्रथम एक फ्रांस के लेखक ने की थी। इस रचना का नाम‍ था ‘ग्रासिन द तैसी’।
  10. हिंदी का नमस्‍ते शब्‍द ऐसा शब्‍द माना जाता है जिसे सर्वाधिक बार बोला जाता है। एक अनुमान के अनुसार हर पांच में से एक व्‍यक्ति हिंदी में इंटरनेट का उपयोग करता है।

हिंदी दिवश बधाई संदेश

हिन्दुस्तान की है शान हिंदी, हर हिन्दुस्तानी की है पहचान हिंदी, एकता की अनुपम परम्परा है हिंदी, हर दिल का अरमान है हिंदी. हैप्‍पी हिंदी दिवस

हिन्दी है भारत की आशा, हिन्दी है भारत की भाषा.हिंदी दिवस की बधाई
हर भारतीय की शक्ति है हिन्दी, एक सहज अभिव्यक्ति है हिन्दी.हिंदी दिवस की बधाई

हिंदी का महत्व

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प्यारे भारतीय नागरिको,किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और उसकी संस्कृति से होती है और पूरे विश्व में हर देश की एक अपनी भाषा और अपनी एक संस्कृति है जिसकी छाव में उस देश के लोग पले बड़े है यदि कोई देश अपनी मूल भाषा को छोड़कर दुसरे देश की भाषा पर आश्रित होता है उसे सांस्कृतिक रूप से गुलाम माना जाता है क्यूकी जिस भाषा को लोग अपने पैदा होने से लेकर अपने जीवन भर बोलते है लेकिन आधिकारिक रूप से दुसरे भाषा पर निर्भर रहना पड़े तो कही न कही उस देश के विकास में उस देश की अपनाई गयी भाषा ही सबसे बड़ी बाधक बनती है क्यूकी आप कल्पना कर सकते है जिस भाषा को हम बचपन से बोलते है और उसी भाषा में अपने सारे कार्य करने पढ़े तो आपको आगे बढने में ज्यादा परेशानी नही होगी लेकिन यदि आप जो बोलते है उसे छोड़कर कोई दूसरी भाषा में आपको कार्य करना पड़े तो कही न कही यही दूसरी भाषा हमारे विकास में बाधक जरुर बनती है

हिंदी का महत्व | Hindi Ka Mahatva

भले ही आज हमारी सारी पढाई लिखाई और सारे कार्य अंग्रेजी में होता है लेकिन भारत के लोगों की मात्रभाषा हिंदी है और आप भारत के किसी भी कोने में चले जाईये अगर आपको हिंदी आती है तो आपको रहने कार्य करने में कोई परेशानी नही होगी और हिंदी एक ऐसी भाषा है जो पूरे भारत को एकता में जोड़ता है तो

“ कोस कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वानी ”

अर्थात हमारे देश भारत में हर एक कोस की दुरी पर पानी का स्वाद बदल जाता है और 4 कोस पर भाषा यानि वाणी भी बदल जाती है लेकिन इन सभी भाषाओ में सबसे अधिक भाषा बोले जाने वाली हिंदी है

हिंदी दिवस पर नारे : Hindi Diwas Slogans

हिन्दी है भारत के एकता और अखंडता की पहचान
हिन्दी हीं तो है मेरे भारत की जान.

जब भारत करेगा हिन्दी का सम्मान
तभी तो आगे बढ़ेगा हिन्दुस्तान.

हिन्दी है भारत की आशा
हिन्दी है भारत की भाषा.

हर भारतीय की शक्ति है हिन्दी
एक सहज अभिव्यक्ति है हिन्दी.

जब तक हिन्दी नहीं बनेगी, गरीबों की शक्ति
तब तक देश को नहीं मिलेगी, गरीबी से मुक्ति

हिन्दी दिवस पर कविता

hindi festival 2017

हिन्दी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। हिन्दी दिवस पर कविता, हम अपनी राष्ट्रीय भाषा को सम्मान देने के लिये बोलते हैं लिखते हैं। हिन्दी दिवस कविता, अपनी मातृभाषा के लिये पाठकों के मन में प्रेम जागृत करने के लिये लिखी गयी है।

हिन्दी-हिन्दु-हिन्दुस्तान,

कहते है, सब सीना तान,

पल भर के लिये जरा सोचे इन्सान

रख पाते है हम इसका कितना ध्यान,

सिर्फ 14 सितम्बर को ही करते है

अपनी राष्टृ भाषा का सम्मान

हर पल हर दिन करते है हम

हिन्दी बोलने वालो का अपमान

14 सितम्बर को ही क्यों

याद आता है बस हिन्दी बचाओं अभियान

क्यों भूल जाते है हम

हिन्दी को अपमानित करते है खुद हिन्दुस्तानी इंसान

क्यों बस 14 सितम्बर को ही हिन्दी में

भाषण देते है हमारे नेता महान

क्यों बाद में समझते है अपना

हिन्दी बोलने में अपमान

क्यों समझते है सब अंग्रेजी बोलने में खुद को महान

भूल गये हम क्यों इसी अंग्रेजी ने

बनाया था हमें वर्षों पहले गुलाम

आज उन्हीं की भाषा को क्यों करते है

हम शत् शत् प्रणाम

हिंदी दिवस -हास्य कविता :Hindi Divash Kavita

पोते ने कहा दादा से
‘पापा ने उस कार्यक्रम में
साथ ले जाने से मना कर दिया
जिसमें हर वर्ष
हिंदी दिवस पर भाषण करने जाते।
आप ही समझाओ
मैं तो पढ़ रहा हूं अंग्रेजी माध्यम स्कूल में
हिंदी के बारे में सुनना है मुझे भी
मैं भी पढ़ूंगा
बहुत से माता पिता अपने बच्चों को पढ़ाते।’
…………………………

सुनकर दादाजी हंसे और बोले
‘बेटा, जो माता पिता गरीब हैं
वही अपने बच्चों को हिंदी पढ़ाते।
जिनके पास पैसा है बहुत
वह तो अंग्रेजी सभ्यता बच्चों को सिखाते,
अच्छा भविष्य तो होता अपने कर्म के हाथ
पर वह अपने को ऐसे सभ्य दिखाते
इस देश में अच्छे भविष्य और विकास का नारा
इस तरह लगता रहा है कि लोग
एक दूसरे को उसमें बहा रहे हैं।
कुछ लोग कहते हैं कि हिंदी गरीबों की भाषा
सच ही लगता है क्योंकि
असली संस्कृति तो गरीब ही बचा रहे हैं।
उनमें फिर भी है माता पिता का सम्मान
वरना तो अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ा चुके पालक
अब उनकी उपेक्षाओं का गाथा गाते।
कुछ लोग वृद्धाश्रम में बस जाते।
संस्कृति और संस्कार तो बचाना चाहते हैं
ताकि रीतियों के नाम पर
स्वयं को लाभ मिलता रहे
भाषा ही इसका आधार है
सच उनसे कौन कहे
वेतन की गुलामी आसानी से मिल जायेगी
इस भ्रम में अंग्रेजी को लोग अपनी मान लेते
हिंदी से दूरी रखकर गौरव लाने की ठान लेते
तुम्हारे बाप को डर है कि
कहीं गरीबों की भाषा के चक्कर में
तुम भी गरीब न रह जाओ
इसलिये तुम्हें हिंदी से दूर भगाते
पर जमाना गुलाम रहे हमारा
इसलिये उसे जगाते।

सेवा करने वाले स्वामी बन गये-
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