Teachers Day 2018 शिक्षक दिवस का महत्व भाषण और निबंध

शिक्षक दिवस डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस जो प्रति वर्ष 05 सितम्बर को मनाया जाता है | डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जो भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति के पद पर रहे चुके है । डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षाविद और महान दार्शनिक थे | इसी कारण 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न ने पुरस्कृत किया था | डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन 05 सितम्बर को हुआ था | इसी के उपलक्ष में भारत ने उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में घोषित किया है।

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शिक्षक दिवस का महत्व : teacher’s day Importance

हम शिक्षक दिवस 05 सितम्बर को मानते है | क्या आप इसका महत्व समझते है | शिक्षक दिवस के दिन विद्यर्थी द्वारा शिक्षकों को गुलाब का फूल या कोई उपहार देने से नहीं होता है | शिक्षक दिवस का मतलब तभी सार्थक होगा जब आपके अन्दर अपने शिक्षक के प्रति सही नजरिया यानि सम्मान की भावना होगी | परन्तु आजकल के शिक्षक भी कुछ इस प्रकार के हो गए है की उनके लिए सम्मान की भावना कम होती नजर आती है | परन्तु सभी का नजरिया एक जैसा नहीं होता है | पिछले कुछ समय में ऐसी कई घटनाएँ देश दुनिया में घटी है जो आपके व्यवहार, वातावरण और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। किसी शिक्षक द्वारा बच्चे के कपड़े उतारकर उसे दंडित करना हो। या और बहुत सारी घटनाये जिन्हें हु रोज़ सुनते या देखते है | शिक्षक वो शिक्षक नहीं रहे जो अपने छात्रों को सही संस्कार दे सकें। इन सब बातो को हमें समझना बहुत जरुरी है |

हम देखते है की छात्रों द्वारा शिक्षको को अपमानित करना उनके साथ मारपीट करना क्या यह सही है | 11 कक्षा का विद्यर्थी अपने शिक्षक की पिटाई करता है | छात्र ने ऐसा क्यों किया यह सोचने वाला पहलु है | शिक्षक विद्या देने वाला होता है जिसे हम भगवान का दर्जा देते है | शिक्षक के प्रति अपार प्यार रहता है | छात्र द्वारा अपने शिक्षक के साथ किया गया यह व्यवहार कैसा ये सब जानना जरुरी है | परन्तु आजकल के बच्चों को स्कूलों में सही शिक्षा का वातावरण नहीं मिल रहा है | कहा जाये तो आपके घर के संस्कारो में कमी साफ दिखाई देती है | इसी का कारण है की आप जरा-जरा सी बात पर अपने शिक्षक को मरने-मारने पर उतारूँ हो जाते है।

असल में आप शिक्षक दिवस का सही महत्व समझना चाहते हो तो आप इस बात पर अम्ल करे की में एक विद्यर्थी हु | और शिक्षक को पिता तुल्यं समझता हु | हमरे संस्कारो में भी यही सिखाया जाता है | की हमें बड़ो का आदर कर्ण चाहिए। अपने गरुजनो का आदर करना चाहिए। गरुजनो बात को ध्यान पूर्वक सुनानी और समझना चाहिए। अगर आपने अपने क्रोध, ईर्ष्या को त्याग कर अपने अंदर के व्यवहार कोमल और नर्म बनाना चाहिए यह आपको बहुत ऊँचाइयों पर ले जाएगा। तभी हमको शिक्षक दिवस मनाने का महत्व भी समझ आयेगा ।

शिक्षक दिवस पर भाषण : Teacher’s Day Speech

कहा जाता है की हमारे जीवन को नई उचाई प्रदान करने के लिए शिक्षक की महत्वपर्ण भूमिका होती है | शिक्षक हमारी सफलता की कुंजी होता है शिक्षक हमारी कई तरह से मदद कर सकता है | शिक्षक हमारे ज्ञान ,कोसल, स्तर ,विश्वास को बढ़ावा देता है | हमें सही ढाचे में ढालने का काम करता है | इसलिए हमारी भी शिक्षक के प्रति कुछ जिमेदारी बनती है | की हम एक
आज्ञाकारी विद्यार्थी के रुप में अपने शिक्षक का सामान करे | शिक्षक अपने जीवन में अपने निस्स्वार्थ भाव से छात्रों का जीवन सवारने में और उनको नई दिशा दिखाने में कोई कमी नहीं रखता है | सही रास्ता दिखाने के उपलक्ष में छात्रों का भी कर्म बनता है की शिक्षक का भी समाना एवं आदर करना चाहिये | शिक्षक दिवस जो प्रतेक वर्ष 05 सितम्बर को पुरे भारत में एक साथ मनाया जाता है | इस लिए हमारा भी कर्तव्य बनता है की शिक्षक दिवस पर अपने शिक्षक का सामान और आदर करे और यह एक दिन उनके लिये एक महान अवसर से कम नहीं होता है।

शिक्षक दिवस पर निबंध : Essay on teacher’s day

5 सितंबर यानि शिक्षक दिवस जो प्रतेक वर्ष 05 सितम्बर को सम्पूर्ण भारत में शिक्षाको के सामान के लिए मनाया जाता है | भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जिन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष अध्यापन में बिताये | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जो विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षकों के योगदान और उनकी भूमिका के लिये प्रसिद्ध थे। उनकी याद को हमेश बनाये रखने के लिए और उनके जन्म दिवस के रूप में प्रतेक वर्ष इसे 05 सितम्बर को मनाया जाता है | भारत देश में शिक्षकों के योगदान के साथ ही अध्यापन की महानता को उल्लेखित करने के लिये हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को समर्पित किया गया है।

कहा जाता है की डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक ही नहीं बल्लिक एक महान दर्शनशास्त्री भी थे | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था | उन्होंने अपने केरियर की शुरुवात 1909 में चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज से की थी | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने दर्शनशास्त्र विषय के शिक्षक के रुप में अपने करियर की शुरुआत की थी ।उन्होंने कहा की शिक्षा के बिना जीवन अधुरा है | इसलिये वो ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति थे जिन्होंने शिक्षकों के बारे में सोचा और हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाने का अनुरोध किया।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने बनारस, चेन्नई, कोलकाता, मैसूर जैसे कई विख्यात विश्वविद्यालयों तथा लंदन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों में भी दर्शनशास्त्र पढ़ाया था | इस अध्यापन के प्रति लगन और समर्पण के चलते डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1949 में विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति कमीशन के अध्यक्ष के रुप में चुना गया। इसके बाद 1962 को शिक्षक दिवस के रुप में 5 सितंबर को मनाने की शुरुआत हुई। अपने महान कार्यों के लिए और शिक्षक के रूप में देश की लंबे समय तक सेवा करने के बाद 17 अप्रैल 1975 को डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पंचतत्व में विलीन हो गये।

कहा जाता है की शिक्षक विद्यार्थियो का वास्तविक निर्माणकर्ता होता है | शिक्षक जो विद्यार्थियो के जीवन की आधार या नीव मजबूत बनता है और उसे इस काबिल बनता है | शिक्षक विद्यार्थियो के अंधकार मय जीवन से दूर लेजाकर प्रकाश रूपी किरण को पैदा करता है | और नये राष्ट्र का निर्माण करता है | इसलिये देश में सभी शिक्षकों को सम्मान दिया जाता है। अपने शिक्षकों के महान कार्यों एवं बलिदान के लिए हम उन्हें कुछ भी नहीं दे सकते हालाँकि हम उन्हें सम्मान दे सकते हैं। हमें पूरे आत्म विश्वाश से ये प्रतिज्ञा करनी चाहिये | कि हम अपने शिक्षक का सम्मान करेंगे | “जय भारत जय हिन्द”

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