14 September 2018 Hindi Day Speech Importance of Hindi language

Hindi Day Speech 2018 Importance of Hindi language: हिंदी भारत की राज भाषा हैं. भारतीय संविधान द्वारा 14 सितम्बर 1949 को इसे भारत की राष्ट्र भाषा के रूप में संविधान के द्वारा स्वीकार किया गया था. 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने के साथ ही हिंदी भारत के शासन की भाषा बन गई. 14 सितम्बर 1953 को पहली बार हिंदी दिवस (Hindi Day) मनाया गया था. इस दिन को मनाने के पीछे उद्देश्य यह हैं, कि भारत के लोगों को हिंदी के महत्व (Hindi language Importance) बताई जाए. हम आपके लिए आज के आर्टिकल में 2018 के राष्ट्रीय हिंदी दिवस अवसर पर हिंदी के महत्व पर भाषण (Hindi Day Speech) प्रस्तुत कर रहे हैं. जिन्हें आप अपने विद्यालय के हिंदी दिवस कार्यक्रम में प्रस्तुत कर सकते हैं.

14 September 2018 Hindi Day Speech Importance of Hindi language

Speech On Hindi Day 14 September 2018: हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि भारत के जन जन को जाग्रत किया जाए. हर देश की अपनी राष्ट्र भाषा होती हैं. इस तरह हिंदी भी भारत की राष्ट्र भाषा बने. हिंदी इस सम्मान की हकदार हैं. 1000 साल पुराना हिंदी का साहित्य हमेशा से समाज को सही राह दिखाता आया हैं.

14 सितम्बर को हम राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाते हैं. इस दिन स्कूलों व महाविद्यालयों में भांति भांति के कार्यक्रमों का आयोजन होता हैं. जिसमें विद्यार्थी हिंदी दिवस पर भाषण, कविता, निबंध, शायरी आदि प्रस्तुत करते हैं. बहुत से लोगों द्वारा इस दिन हिंदी को अपनी नित्य की बोलचाल की भाषा बनाने का संकल्प भी किया जाता हैं.

What Is Importance of Hindi language Hindi Day Speech

हिंदी इस देश की सबसे प्राचीन भाषा हैं. आज के समय में यही एकमात्र भाषा है जो सम्पूर्ण देश की माध्यम अथवा सम्पर्क भाषा का दायित्व निभा रही हैं. उदहारण के तौर पर एक गुजराती व्यक्ति यदि पश्चिम बंगाल में जाता हैं. तो वह बांगला भाषी से हिंदी में बात करेगा. यहाँ गौर करने योग्य बात यह है कि इन दोनों में से किसी की मातृभाषा हिंदी न होते हुए भी सम्पर्क की भाषा के रूप में दोनों को समझने में मदद करती हैं.

भारत में कई भाषाभाषी लोग निवास करते हैं. इस कारण अपनी अपनी भाषा के लिए भाषावाद का टकराव देखा जा सकता हैं. जिसका दुष्परिणाम आज हिंदी को भुगतना पड़ रहा हैं. जब संविधान में हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी को भारत की राजभाषा बनाया तो उद्देश्य यह था कि भारत का सम्पूर्ण तन्त्र आज अंग्रेजी में फसा पड़ा है इसे इतने जल्दी बाहर नही निकाला जा सकता हैं. अतः अगले 15 वर्षों तक हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी को भारत की शासन व्यवस्था की भाषा का दर्जा दिया जाए.

बड़े दुर्भाग्य की बात हैं, कि कुछ दक्षिणी राजनीतिज्ञों ने अपने निजी स्वार्थी के चलते लोगों में भाषावाद का जहर घोला और हिंदी का विरोध कर एक ऐसी भाषा के समर्थन में नजर आए जो ना कभी इस देश की थी, ना कभी होगी. अतः अब वक्त आ चूका हैं. हिंदी को न सिर्फ अपने घर में सम्मान मिले बल्कि इसे विश्व भर में भी प्रसारित करने में भारत अग्रणी भूमिका निभाएं.

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