15 August 2020 Independence Day Poems देशभक्ति कविता

यहाँ पर हम स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे और विद्यार्थियों के लिये भारत के स्वतंत्रता दिवस पर कई प्रकार का भाषण उपलब्ध करा रहे है। किसी भी दिये गये भाषण का इस्तेमाल कर स्वतंत्रता दिवस उत्सव में विद्यार्थी सक्रियता से भाग ले सकते है यहाँ मौजूद मेरे प्यारे दोस्तों और आदरणीय अध्यापकों को सुबह का हार्दिक नमस्कार। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ अवसर को मनाने के लिये हम सब एकत्रित हुए है। ये दिन हमलोग पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाते है क्योंकि इसी दिन ब्रिटीश शासन से 1947 में भारत को आजादी मिली थी। हमलोग यहाँ 74 वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने आये है। सभी भारतीयों के लिये ये बहुत ही महान और महत्वपूर्ण दिन है। कई वर्षों तक अंग्रेजों के क्रूर बर्तावों को भारतीय लोगों ने सहन किया। आज हमलोग लगभग सभी क्षेत्रों में आजाद है जैसे शिक्षा, खेल, परिवहन, व्यापार आदि क्योंकि ये केवल हमारे पूर्वजों के संघर्षों की वजह से संभव हो सका। भारत के कुछ महान स्वतंत्रता सेनानी है नेताजी सुभाष चनद्र बोस, गाँधीजी, जे.एल.नेहरु, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, भगत सिंह, खुदीराम बोस, चन्द्रशेखर आजाद आदि। ये प्रसिद्ध देशभक्त थे जिन्होंने अपनी जीवन के अंत तक भारत की आजादी के लिये कड़ा संघर्ष किया। हमारे पूर्वजों द्वारा संघर्ष के उन डरावने पलों की कल्पना भी नहीं कर सकते हमलोग। आजादी के वर्षों बाद हमारा देश विकास की सही राह पर है। स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है हालाँकि हर कोई इसको अपनी जगह से स्कूल, कार्यालय, या समाज में झंडा फहरा कर मनाता है। हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिये और अपने देश के सम्मान की सुरक्षा के लिये अपना बेहतर योगदान देना चाहिये।

15 August 2020 Independence Day Poems

Swatantrata Diwas Poem On Independence Day : दोस्तों हमारा राष्ट्रीय त्योहार बस कुछ ही दिनों दूर है। भारत (India) में हर साल 15 अगस्त (15 August) को स्वतंत्रता दिवस 2020 (Independence Day 2020) मनाया जाता है। इस बार 15 अगस्त को देश आजादी (Independence) की 74वीं सालगिरह मनाएगा। इस दिन स्कूलों के स्कूल के छोटे बच्चों से लेकर राजनीति के गलियारों में भी देश की आजादी का जश्न मनाया जाएगा। इस मौके पर लोग सर्च इंजन गूगल पर स्वतंत्रता दिवस पर शायरी स्वतंत्रता दिवस पर कविता (Swatantrata Diwas Pr Poems) देशभक्ति शायरी खूब सर्च कर रहे हैं। ऐसे में हम आपके लिए 5 ऐसी कविताएं, जिनसे आपको वतन की खुशबू मिलेगी। इन किवताओं को आप अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और अन्य को शेयर कर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दे सकते हैं।

बच्चा-बच्चा बन जाए सैनिक, गर बुरी नजर दुश्मन डाले
हस्ती उसकी मिलाएं खाक में, करे कभी जो हमला वे
भाईचारा रखें परस्पर, अमन चैन का नारा हो
सद्भावना, शांति रखें दिलों में, जाति, धर्म का न बंटवारा..
बनें पहिए प्रगति के रथ के,सबसे आगे बढ़ते जाएं
कर दें रौशन नाम जहां में, देश का अपने मान बढ़ाएं
आजादी की वर्षगांठ की ,छटा निराली बढ़ती जाए
खुशहाली के फूल हों बिखरे,खुश्बू से चमन महकाएं
आओ आज़ादी दिवस मनाएं, आओ आज़ादी दिवस मनाएं…

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हम बच्चे हँसते गाते हैं,
हम आगे बढ़ते जाते हैं।

पथ पर बिखरे कंकड़ काँटे,
हम चुन चुन दूर हटाते हैं।

आयें कितनी भी बाधाएँ,
हम कभी नही घबराते हैं।

धन दौलत से ऊपर उठ कर,
सपनों के महल बनाते हैं।

हम खुशी बाँटते दुनिया को,
हम हँसते और हँसाते हैं।

सारे जग में सबसे अच्छे,
हम भारतीय कहलाते हैं।

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नमो, नमो, नमो।
नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो!

नमो नगाधिराज – शृंग की विहारिणी!
नमो अनंत सौख्य – शक्ति – शील – धारिणी!
प्रणय – प्रसारिणी, नमो अरिष्ट – वारिणी!
नमो मनुष्य की शुभेषणा – प्रचारिणी!
नवीन सूर्य की नई प्रभा, नमो, नमो!

हम न किसी का चाहते तनिक अहित, अपकार।
प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार।

सत्य न्याय के हेतु, फहर-फहर ओ केतु
हम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु
पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो!

तार-तार में हैं गुँथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग!
दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग।
सेवक सैन्य कठोर, हम चालीस करोड़
कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओर
करते तव जय गान, वीर हुए बलिदान,
अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिंदुस्तान!
प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो!

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चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||

हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || 1 ||

जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || 2 ||

जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है ||

कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है
तिलक किया मस्तक चूमा बोली ये ले कफन तुम्हारा
मैं मां हूं पर बाद में, पहले बेटा वतन तुम्हारा

धन्य है मैया तुम्हारी भेंट में बलिदान में
झुक गया है देश उसके दूध के सम्मान में
दे दिया है लाल जिसने पुत्र मोह छोड़कर
चाहता हूं आंसुओं से पांव वो पखार दूं
ए शहीद की मां आ तेरी मैं आरती उतार लूं…

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घाटी के दिल की धड़कन
काश्मीर जो खुद सूरज के बेटे की रजधानी था
डमरू वाले शिव शंकर की जो घाटी कल्याणी था
काश्मीर जो इस धरती का स्वर्ग बताया जाता था
जिस मिट्टी को दुनिया भर में अर्ध्य चढ़ाया जाता था
काश्मीर जो भारतमाता की आँखों का तारा था
काश्मीर जो लालबहादुर को प्राणों से प्यारा था
काश्मीर वो डूब गया है अंधी-गहरी खाई में
फूलों की खुशबू रोती है मरघट की तन्हाई में

ये अग्नीगंधा मौसम की बेला है
गंधों के घर बंदूकों का मेला है
मैं भारत की जनता का संबोधन हूँ
आँसू के अधिकारों का उदबोधन हूँ
मैं अभिधा की परम्परा का चारण हूँ
आजादी की पीड़ा का उच्चारण हूँ

इसीलिए दरबारों को दर्पण दिखलाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

बस नारों में गाते रहियेगा कश्मीर हमारा है
छू कर तो देखो हिम छोटी के नीचे अंगारा है
दिल्ली अपना चेहरा देखे धूल हटाकर दर्पण की
दरबारों की तस्वीरें भी हैं बेशर्म समर्पण की

काश्मीर है जहाँ तमंचे हैं केसर की क्यारी में
काश्मीर है जहाँ रुदन है बच्चों की किलकारी में
काश्मीर है जहाँ तिरंगे झण्डे फाड़े जाते हैं
सैंतालिस के बंटवारे के घाव उघाड़े जाते हैं
काश्मीर है जहाँ हौसलों के दिल तोड़े जाते हैं
खुदगर्जी में जेलों से हत्यारे छोड़े जाते हैं

अपहरणों की रोज कहानी होती है
धरती मैया पानी-पानी होती है
झेलम की लहरें भी आँसू लगती हैं
गजलों की बहरें भी आँसू लगती हैं

मैं आँखों के पानी को अंगार बनाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

काश्मीर है जहाँ गर्द में चन्दा-सूरज- तारें हैं
झरनों का पानी रक्तिम है झीलों में अंगारे हैं
काश्मीर है जहाँ फिजाएँ घायल दिखती रहती हैं
जहाँ राशिफल घाटी का संगीने लिखती रहती हैं
काश्मीर है जहाँ विदेशी समीकरण गहराते हैं
गैरों के झण्डे भारत की धरती पर लहरातें हैं

काश्मीर है जहाँ देश के दिल की धड़कन रोती है
संविधान की जहाँ तीन सौ सत्तर अड़चन होती है
काश्मीर है जहाँ दरिंदों की मनमानी चलती है
घर-घर में ए. के. छप्पन की राम कहानी चलती है
काश्मीर है जहाँ हमारा राष्ट्रगान शर्मिंदा है
भारत माँ को गाली देकर भी खलनायक जिन्दा है
काश्मीर है जहाँ देश का शीश झुकाया जाता है
मस्जिद में गद्दारों को खाना भिजवाया जाता है

गूंगा-बहरापन ओढ़े सिंहासन है
लूले – लंगड़े संकल्पों का शासन है
फूलों का आँगन लाशों की मंडी है
अनुशासन का पूरा दौर शिखंडी है

मै इस कोढ़ी कायरता की लाश उठाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

हम दो आँसू नहीं गिरा पाते अनहोनी घटना पर
पल दो पल चर्चा होती है बहुत बड़ी दुर्घटना पर
राजमहल को शर्म नहीं है घायल होती थाती पर
भारत मुर्दाबाद लिखा है श्रीनगर की छाती पर
मन करता है फूल चढ़ा दूं लोकतंत्र की अर्थी पर
भारत के बेटे निर्वासित हैं अपनी ही धरती पर

वे घाटी से खेल रहे हैं गैरों के बलबूते पर
जिनकी नाक टिकी रहती है पाकिस्तानी जूतों पर
काश्मीर को बँटवारे का धंधा बना रहे हैं वो
जुगनू को बैसाखी देकर चन्दा बना रहे हैं वो
फिर भी खून-सने हाथों को न्योता है दरबारों का
जैसे सूरज की किरणों पर कर्जा हो अँधियारों का

कुर्सी भूखी है नोटों के थैलों की
कुलवंती दासी हो गई रखैलों की
घाटी आँगन हो गई ख़ूनी खेलों की
आज जरुरत है सरदार पटेलों की

मैं घाटी के आँसू का संत्रास मिटाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

जब चौराहों पर हत्यारे महिमा-मंडित होते हों
भारत माँ की मर्यादा के मंदिर खंडित होते हों
जब क्रश भारत के नारे हों गुलमर्गा की गलियों में
शिमला-समझौता जलता हो बंदूकों की नालियों में

अब केवल आवश्यकता है हिम्मत की खुद्दारी की
दिल्ली केवल दो दिन की मोहलत दे दे तैय्यारी की
सेना को आदेश थमा दो घाटी ग़ैर नहीं होगी
जहाँ तिरंगा नहीं मिलेगा उनकी खैर नहीं होगी

जिनको भारत की धरती ना भाती हो
भारत के झंडों से बदबू आती हो
जिन लोगों ने माँ का आँचल फाड़ा हो
दूध भरे सीने में चाकू गाड़ा हो

मैं उनको चौराहों पर फाँसी चढ़वाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

अमरनाथ को गाली दी है भीख मिले हथियारों ने
चाँद-सितारे टांक लिये हैं खून लिपि दीवारों ने
इसीलियें नाकाम रही हैं कोशिश सभी उजालों की
क्योंकि ये सब कठपुतली हैं रावलपिंडी वालों की
अंतिम एक चुनौती दे दो सीमा पर पड़ोसी को
गीदड़ कायरता ना समझे सिंहो की ख़ामोशी को

हमको अपने खट्टे-मीठे बोल बदलना आता है
हमको अब भी दुनिया का भूगोल बदलना आता है
दुनिया के सरपंच हमारे थानेदार नहीं लगते
भारत की प्रभुसत्ता के वो ठेकेदार नहीं लगते
तीर अगर हम तनी कमानों वाले अपने छोड़ेंगे
जैसे ढाका तोड़ दिया लौहार-कराची तोड़ेंगे

आँख मिलाओ दुनिया के दादाओं से
क्या डरना अमरीका के आकाओं से
अपने भारत के बाजू बलवान करो
पाँच नहीं सौ एटम बम निर्माण करो

मै भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन निकला हूँ ||

स्वतन्त्रता दिवस पर देशभक्ति शायरी

मुझे तन चाहिए , ना मुझे धन चाहिए,

बस अमन से भरा मेरा वतन चाहिए,

जिन्दा रहूं तो इस मातृ-भूमि के लिए,

और जब मरू तो तिरंगा कफ़न चाहिये… जय हिन्द ।।

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आओ झुकर सलाम करे उनको जिनके हिस्से मे ये मुकाम आता है,

खुसनसीब है वो खून जा देश के काम आता है

जब देश में थी दिवाली….. वो खेल रहे थे होली…

जब हम बैठे थे घरो में…… वो झेल रहे थे गोली…

क्या लोग थे वो अभिमानी…

है धन्य उनकी जवानी………

जो शहीद हुए है उनकी… ज़रा याद करो कुर्बानी…

ए मेरे वतन के लोगो… तुम आँख में भर लो पानी..!!

सीनें में ज़ुनू, ऑखों में देंशभक्ति, की चमक रखता हुँ,

दुश्मन के साँसें थम जाए, आवाज में वो धमक रखता हुँ

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आन देश की शान देश की,

देश की हम संतान हैं।

तीन रंगों से रंगा तिरंगा,

अपनी ये पहचान हैं..!!

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कर जस्बे को बुलंद जवान

तेरे पीछे खड़ी आवाम

हर पत्ते को मार गिरायेंगे

जो हमसे देश बटवायेंगे..!!

15 अगस्त पर खून उबालने वाली कविता

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से

ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिन्दा न हों

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी

किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी

यों कोई बेवफ़ा नहीं होता

बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना

जहाँ दरया समन्दर से मिला, दरया नहीं रहता

हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है

हम जहाँ से जाएँगे, वो रास्ता हो जाएगा

मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो

मेरी तरह तुम भी झूठे हो

बड़े शौक़ से मेरा घर जला कोई आँच न तुझपे आयेगी

ये ज़ुबाँ किसी ने ख़रीद ली ये क़लम किसी का ग़ुलाम है

सब कुछ खाक हुआ है लेकिन चेहरा क्या नूरानी है

पत्थर नीचे बैठ गया है, ऊपर बहता पानी है

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं

मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे

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