क्या हैं 15 अगस्त और क्यों मनाते हैं

How to 15 August  The story behind India’s independence, Azad has forgotten in India, the hero’s saga does not know the meaning of freedom. Why does India consider August 15 every year as Independence Day? This question is in many minds. I want to tell those people that India became independent on 15 August 1947. And independence is celebrated every year on 15 August. You all should know how India’s independence and India became independent. Through this page we tell you about independent India. People have so much love for the country. क्या हैं 15 अगस्त जो हमारे देश में बड़े धूम धाम से इस पर्व को मनाया जाता हैं आइएये हमारे साथ हम बताते हैं क्यों मनाते हैं 15 अगस्त हमारे देश को 15 अगस्त, 1947 को रात 12 बजे स्वतंत्रता मिली थी इसलिए हम इस दिन को आजादी के रूप में मनाते हैं और इसे स्वतंत्रता दिवस के नाम से जाना जाता हैं

भारत की आजादी के पीछे की कहानी

इस छोटे से शब्द “आजादी” के पीछे बहुत बड़ी कहानी हैं अगर हमारी आजादी की गाथा सुने तो आज भी हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं भारत ही एक ऐसा देश हैं जहाँ देश की मिट्टी को माँ का दर्जा दिया गया हैं और इसी लिये यहाँ जन्म लिये वीरो ने अपनी धरती माँ की आजादी के लिये ये जो आजादी शब्द हैं इसे अपने लहू से सिंचा हैं तब जाकर ये भारत माता आजाद हुई थी |भारत ने गुलामी के 100 साल कैसे काटे हैं और कितना बलिदान दिया हैं | पहले मुगलों के गुलाम फिर अंग्रेजो के गुलाम भारत कई वर्षो तक गुलामी की जंजीरों से बंदा रहा था | जब भारत के लोगो में बगावत के शुरू छिडे तो पुरे भारत में इन गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिये कोशिश की और पुरे भारत में हर तपके के लोगो ने आजादी की इस लडाई में हिस्सा लिया और अपने पप्राणों की आहुति दी हैं तब जाकर भारत को आजादी मिली थी | बहुत से ऐसे वीर हैं जिनका इतिहास के पन्नो में कई जीकर तक नही हैं लिकिन उनकी देश आजादी में अहम भूमिका रही हैं | आज जो आजाद भारत हैं उसमें लोग भूल गये हैं की किन की वजह से हम आजाद सांसे ले रहे हैं | जब तक हर आदमी अपने देशा के लिये नही सोचता हैं तब तक देश उनत्ती नही कर सकता | आज लोगो में राजनेती के कारण से अपने वजूद को भूल कर निजी हित के लिये कार्य करतेहैं चाये उस में देश का अहित ही क्यों ना हो |

आजाद भारत में भूल चुके हैं वीरो की गाथा नही पता हैं आजादी का मतलब

लेकिन आज इस बलिदान को भूल कर इस दिन हर व्यक्ति खुशी और जश्न मनाते हैं लेकिन ऊनको इस दिन के बारे में पूंछने पर उन्हें ये नही पता हैं 15 अगस्त क्या हैं लोगो के अलग अलग उतर सुनने को मिलते हैं आधे से ज्यादा नेताओं को तो ये नही पता की हमारा देश आजाद कब हुआ था और सविधान कब लागु हुआ था ऐसे व्यक्तियो को देखता हों तो मुझे शर्म आती हैं और सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ की ये सब उसी देश के नागरिक हैं जिस देश की पहचान ही देश भक्ति और बलिदान से की जाती हैं |लोगो के पास राष्ट्रगान के समान के लिये टाइम नही मतलब नही पता हैं की राष्ट्रगान गाते क्यों हैं | काफी लोगो को तो ये नही पता की देश आजाद कब हुआ था और सविधान कब लिखा गया था | बहुत से लोगो से पूछने पर बताया हैं की 26 जनवरी को देश आजाद हुआ था और 15 अगस्त को सविधान लागु हुआ था |अब आप सोच रहे होंगे की देश की हालात क्या हैं | कितनी शिक्षा की जरूरत हैं |

याद करो उन वीर जवानो को जिन्होंने आजादी के लिये बलिदान दिया था

भारत में वीरो और वीरांगनाओ की बहुत सी कहानियाँ मिल जाएगी जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी हैं अपनी आन और शान बचाने के लिये | ये वो ही भारत हैं जहाँ महाराणा प्रताप और शिवाजी जेसे सपूतो  ने आजादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दी हैं | चंद्रशेखर आजाद जैसे वीरो ने कसम खाई थी गुलामी ना करने की | वीर सावरकर, सुभास चन्द्र बोस, तिलक, और बहुत से ऐसे वीर थे जिन्हें आज भुला दिया गया हैं इन में कुछ तो ऐसे हैं जिनका वजुद ही खत्म हो गया हैं. ऐ मेरे  प्रिय राजनेताओ जरा अपने देश के बारे में भी सोचो .य़े पावन  धरा,ये महान राष्ट्र हमारा है  य़े जांबाज जवान हमारे है. कैसे आप इनकी शहादत पर घडियाली आंसू बहाते हो?कैसे आप इन वीर जवानो के लहू से राजनीती में रंग भरते हो? आप इन्सान हो,इन्सान की तरह जिओ.   दरिंदगी करने वाले हमारे दुश्मनों पर  इतना रहम ना करो .जनता  के सब्र का इम्तहान ना लो. इंट का जबाब पत्थर से दो वर्ना एक दिन हम फिर एक बार गुलामी की अंधियारी गलियों में भटकने को मजबूर होगे . हमारे वीर बहादुर  जवानो आपको हमारा सलाम .आपकी  शहादत कभी व्यर्थ ना जाएगी .इस मिटटी में इतना गुरुर तो अभी भी है.  ए मेरे वतन के लोगो,राजनेताओ ,जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी .

देश वासियों याद करो तुम उन महान बलिदानों को।

देश के खातिर जान लुटाई, देश की उन संतानों को।

जिनके कारण तान कर छाती खड़ा यह पर्वतराज है।

जिनके चलते सबके सर पर आज़ादी का ताज है।

महाकाल भी काँपा जिनसे मौत के उन परवानों को।

देश वासियों याद करो…

देख कर टोली देव भी बोले देखो-देखो वीर चले।

गर पर्वत भी आया आगे, पर्वत को वो चीर चले।

जिनसे दुश्मन डर कर भागे ऐसे वीर जवानों को।

देश वासियों याद करो…

जिनने मौत का गीत बजाया अपनी साँसों की तानों पर।

पानी फेरा सदा जिन्होंने दुश्मन के अरमानों पर।

मेहनत से जिनने महल बनाया उजड़े हुए वीरानों को।

देश वासियों याद करो…

हँस-हँस कर के झेली गोली जिनने अपने सीनों पर।

अंत समय में सो गए जो रख कर माथा संगीनों पर।

शत-शत नमन कर रहा है मन मेरा ऐसे दीवानों को।

देश वासियो याद करो…

हमें आज बदलने की जरूरत हैं

हम आज खुल कर जी रहें हैं ये आजादी उन वीरो के बलिदान की जिन्हें हम आज याद नही करते हैं | अगर आज भी हम नही बदले तो वापस गुलाम होने में समय नही लगेगा | हमें आज बदलने की जरूरत हैं और अपने देश के प्रति सब कुछ नोछावर कर दे और अपने देश के प्रति हमेशा आदर और दिल में देश भक्ति का जूनून होना चाहियें और हमारे देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाये |

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