15 August Kavita Independence Day Poem Swatantrata Diwas Desh Bhakti Song in hindi

15 August Kavita Independence Day Poem Swatantrata Diwas Desh Bhakti Song in hindi : नमस्कार दोस्तों : आप सभी भारतवासियों को Rkalert.in परिवार की तरफ से 15 August  (Swatantrata Diwas) की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं | दोस्तों हम वर्ष 2018 में 72वा (Independence day) मानाने जा रहे है | जिसके लिए हम लेकर आये है कुछ चुनिन्दा 15 Augus t Kavita जैसे 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता  15 August Kavita ,स्वतंत्रता दिवस पर गीत  स्वतंत्रता दिवस पर शेर  स्वतंत्रता दिवस पर बाल कविता  Independence day poem by Rabindranath Tagore बच्चों के लिए स्वतंत्रता दिवस पर बाल कविताएँ हिंदी में  Desh Bhakti Ki Kavita in Hindi स्वतंत्रता सेनानियों पर कविता Independence day poem  Swatantrata Diwas Desh Bhakti Song इत्यादी | ये सभी कविताएँ 15 August पर बच्चे अपने विद्यालयों,कॉलेजों में सभी को सुना कर उन सभी का मन मोह सकते है और अपने देस के प्रति जागरूकता ला सकते है |

15 August Kavita Independence Day Poem

दोस्तों अगर आप विद्यालय और कॉलेज में (स्वतंत्रता सेनानियों पर कविता – Poem on freedom fighters) इस Swatantrata Diwas पर इस आर्टिकल में दी जा रही “स्वतंत्रता सेनानियों पर कविता” को सुना सकते है | यह 15 August Poem on freedom fighters निचे दी जा रही है |

स्वतंत्रता सेनानियों पर कविता Poem on Freedom Fighters

यारा प्यारा मेरा देश सजा सवार मेरा देश
दुनिया जिस पर गर्व करे नयन सितारा मेरा देश
चांदी सोना मेरा देश सफल सलोना मेरा देश
सुख का कोना मेरा देश फूलों वाला मेरा देश
झूलों वाला मेरा देश गंगा यमुना की माला का मेरा देश
फूलों वाला मेरा देश आगे जाए मेरा देश
नित नए मुस्कुराये मेरा देश इतिहासों में नाम लिखाया मेरा देश
यारा प्यारा मेरा देश सजा संवारा मेरा देश

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता Poem on August 15th Independence Day

दोस्तों भारत देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है | जैसे हम जानते है की स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को प्रतेक वर्ष एक खास उत्सव के रूप में मनाया जता है | आज़ादी के पावन पर्व पर सभी लोग अपने-अपने तरीके से इस का जश्न मानते है जैसे कोई 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता के माध्यम से तो कोई गीत के द्वारा इस Independence Day पर मुबारक बाद देते है इसी प्रकार हम भी आपके लिए लेकर आये है Poem on August 15th Independence Day जो आप अपनी स्कूल में छात्रों को सुनाकर अपने तरीके से जश्न मना सकते है |

पंद्रह अगस्त का दिन कहता आज़ादी अभी अधूरी है।
सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ न पूरी है
जिनकी लाशों पर पग धर कर आज़ादी भारत में आई।
वे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई
कलकत्ते के फुटपाथों पर जो आँधी-पानी सहते हैं।
उनसे पूछो, पंद्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैं
हिंदू के नाते उनका दु:ख सुनते यदि तुम्हें लाज आती।
तो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जाती

Independence day poem in Hindi

दोस्तों 72वे Independence Day [ 15 August ] की बहुत बहुत शुभकामनाएं। दोस्तों हम आपके लिए लेकर आये है | कुछ बेहतरीन स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त की कविताएँ जैसे – Independence Day Poem in Hindi For Class 2 3 4 5 6  Independence Day Poem in Hindi for Nursery Poem on Independence day in Hindi for Class LKG UKG जो आप अपने विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर सुना सकते है |

15 अगस्त 1947 को हो गए थे आजाद हम आजादी के 72 साल बाद भी क्या,
समझ पाए आजादी का मतलब हम पहले ब्रिटिश शासन में जकड़े थे
गुलामी के बेड़ियों में आज संविधान लागू होने के बाद भी,
जाति-पाति के कारण हो गए हैं अपने ही देश में गुलाम हम,
पहले रंग-भेद के जरिए गोरों ने हमको बाँटा था,
आज हमारे अपनो ने ही बाँट दिए जातिवाद और धर्मवाद के नाम पर हम,
जो भारत पहचान था कभी, एकता, अखण्डता और विविधता का,
वो भारत ही झेल रहा है दंश अब आन्तरिक अखंडता का,
बाँधा था जिन महान देशभक्त नेताओं ने अपने बलिदानों से
एकता के सूत्र में हमें अपने ही कर्मों से अब उनकी आत्माओं को,
दे रहे हैं लगातार त्राश हम,जातिवाद, आरक्षण और धर्मवाद ने,
बुद्धि हमारी को भ्रमाया है राजनेताओं ने अपने हित की खातिर,
हमको आपस में लड़वाया है बहुत हुआ सर्वनाश अपना,
कुछ तो खुद को समझाओं अब देश पर हुए शहीदों की खातिर,
समझो आजादी का मतलब अब तो मेरे देवासियो ||
जय हिन्द, जय भारत।

स्वतंत्रता दिवस पर बाल कविता Child Poem on Independence Day

हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे आजादी का मतलब नहीं है समझते,
इस दिन पर स्कूल में तिरंगा है फहराते गाकर अपना राष्ट्रगान
फिर हम तिरंगे का सम्मान करते कुछ देशभक्ति की झांकियों से
दर्शकों को मोहित है करते हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,
आजादी का अर्थ सिर्फ यही है समझते वक्ता अपने भाषणों में,
न जाने क्या-क्या है कहते उनके अन्तिम शब्दों पर,
बस हम तो ताली है बजाते।|

हम नन्हें-मुन्ने है बच्चे आजादी का अर्थ सिर्फ इतना ही है समझते।
विद्यालय में सभा की समाप्ति पर गुलदाना है बाँटा जाता,
भारत माता की जय के साथ स्कूल का अवकाश है हो जाता,
शिक्षकों का डाँट का डर इस दिन न हमको है सताता,
छुट्टी के बाद पतंगबाजी का लुफ्त बहुत ही है आता,

हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे बस इतना ही है समझते,
आजादी के अवसर पर हम खुल कर बहुत ही मस्ती है करते।।

वन्दे मातरम ,भारत माता की जय

Independence day Desh Bhakti Kavita in Hindi

सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा
हम बुलबुलें हैं उसकी वो गुलसिताँ हमारा।
परबत वो सबसे ऊँचा हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा।
गोदी में खेलती हैं जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिनके दम से रश्क-ए-जिनाँ हमारा।
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिंदी हैं हम वतन है हिंदुस्तान हमारा।

15 August Desh Bhakti Kavita जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है रोज बसेरा
वो भारत देश है मेरा जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का
पग-पग लगता डेरा वो भारत देश है मेरा

ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा

अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा

जब आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले
जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले
प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा

independence day Hindi lyrics Aye Mere Watan Ke Logon

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आए
ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी
जब घायल हुआ हिमालय खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी
जब देश में थी दिवाली वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो अपने थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी
कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पे मरने वाला हर वीर था भारतवासी
जो ख़ून गिरा पर्वत पर वो ख़ून था हिन्दुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी
थी ख़ून से लथ-पथ काया फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफर करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी
तुम भूल न जाओ उनको इस लिए कही ये कहानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी
जय हिंद ,जय हिंद ,जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर देशभक्ति कविता

जन-गण-मन की धुन को सुन कर, हुए झंकृत मन वीणा के तार
बधाई आजादी के दिवस की, भारत मां सजी सोलह श्रंगार
देखूं जब-जब लहराता तिरंगा,गुमान देश पर होता है
लिया जन्म जहां शूरवीरों ने ,सिर नतमस्तक हो जाता है
क्या इंसान थे,किस मिट्टी के थे वो,क्या उन्हें जीवन से प्यार न था
उनकी भी कुछ इच्छाएं होंगी, क्या उनका कोई परिवार न था
समझा सब कुछ देश को अपने, जंग तभी तो जीत गए
दो सौ वर्ष की गुलामी छूटी ,अंग्रेजों के दिन बीत गए
उनके इस बलिदान को क्या व्यर्थ यूंही जाने देंगे
क्यूं न हम ये कसम उठाएं,आंच देश पर न आने देंगे
बच्चा-बच्चा बन जाए सैनिक,गर बुरी नजर दुश्मन डाले
हस्ती उसकी मिलाएं खाक में, करे कभी जो हमला वे
भाईचारा रखें परस्पर, अमन चैन का नारा हो
सद्भावना, शांति रखें दिलों में, जाति, धर्म का न बंटवारा हो
बनें पहिए प्रगति के रथ के,सबसे आगे बढ़ते जाएं
कर दें रौशन नाम जहां में, देश का अपने मान बढ़ाएं
आजादी की वर्षगांठ की ,छटा निराली बढ़ती जाए
खुशहाली के फूल हों बिखरे,खुश्बू से चमन महकाएं

आओ आज़ादी दिवस मनाएं

Rabindranath Tagore Poems in Hindi : Geetanjali

मेरा शीश नवा दो अपनी
चरण-धूल के तल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।

अपने को गौरव देने को
अपमानित करता अपने को,
घेर स्वयं को घूम-घूम कर
मरता हूं पल-पल में।

देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।
अपने कामों में न करूं मैं
आत्म-प्रचार प्रभो;
अपनी ही इच्छा मेरे
जीवन में पूर्ण करो।

मुझको अपनी चरम शांति दो
प्राणों में वह परम कांति हो
आप खड़े हो मुझे ओट दें
हृदय-कमल के दल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।

रबीन्द्रनाथ टैगोर की देश की माटी देश का जल देश भक्ति कविता हिंदी में

देश की माटी देश का जल हवा देश की देश के फल
सरस बनें प्रभु सरस बने देश के घर और देश के घाट
देश के वन और देश के बाट सरल बनें प्रभु सरल बनें प्रभु
देश के तन और देश के मन देश के घर के भाई-बहन
विमल बनें प्रभु विमल बनें

Independence day poem by Rabindranath Tagor in Hindi

नहीं मांगता, प्रभु, विपत्ति से,
मुझे बचाओ, त्राण करो
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान, करो।

नहीं मांगता दुःख हटाओ
व्यथित ह्रदय का ताप मिटाओ
दुखों को मैं आप जीत लूँ
ऐसी शक्ति प्रदान करो
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान,करो।

कोई जब न मदद को आये
मेरी हिम्मत टूट न जाये।
जग जब धोखे पर धोखा दे
और चोट पर चोट लगाये –
अपने मन में हार न मानूं,
ऐसा, नाथ, विधान करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान,करो।

नहीं माँगता हूँ, प्रभु, मेरी
जीवन नैया पार करो
पार उतर जाऊँ अपने बल
इतना, हे करतार, करो।
नहीं मांगता हाथ बटाओ
मेरे सिर का बोझ घटाओ
आप बोझ अपना संभाल लूँ
ऐसा बल-संचार करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान,करो।

सुख के दिन में शीश नवाकर
तुमको आराधूँ, करूणाकर।
औ’ विपत्ति के अन्धकार में,
जगत हँसे जब मुझे रुलाकर–
तुम पर करने लगूँ न संशय,
यह विनती स्वीकार करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान, करो।

independence day poem in hindi for class 5

जब-जब पन्द्रह अगस्त आता है मन आंगन में रस बरसाता है
मन में नये अहसास नई उमंगें जगाता है,
वीरों के गुणगान गाता है जब-जब वीर रस बरसता है !
तब-तब जीवन फिर मधुमास बन जाता है !
प्रतिध्वनियों सा बज कर सोये वीरों को जगाता है !
भारत माँ की शान मै जीना-मरना सिखलाता है
वीरों का कोलाहल मन मै देश प्रेम जगाता है !
हिन्दू-मुस्लिम ,सिख, ईसाई, होने का भ्रम मिटाता है !
जब-जब पन्द्रह अगस्त आता है मन आंगन में रस बरसाता है !

15 August देश के जवानों पर कविता

दोस्तों 15 अगस्त आने वाला है सभी बच्चे स्कूल में स्वतंत्रता दिवस की कविता की तैयारी में लगे हुए है | देश के जवानों पर कविता सुननाने के लिए और देश के वीर जवानों में और जोश भरने के लिए अपनी स्कूल में 15 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम में ये 15 August देश के जवानों पर कविता “देश के जवानों आज ये बताओ कौन है कहाँ है, देश के सितारे ” यह जोश और जूनून भरने वाली कविता निचे दी जा रही है |

देश के जवानों आज ये बताओ कौन है कहाँ है, देश के सितारे !
आज हर तरफ आंधियां चल रही है माँ भारती हर तरफ जल रही है !
जो अपने लहू से सींच कर गये माँ भारती के घायल दामन को ,
क्यों भूल गये हम उन वीर जवानों को हर युग के पहरेदारों को
आज फिर वक्त की ललकार यही है कोई बन जाओ सुभाष कोई नेहरु
पढाओ देश को शान्ति का पाठ बनाओ गांधी के सपनों का संसार !
आज माँ के पुत्र ही माँ के शत्रु हो गये कोई हिन्दू कोई सिख कोई ईसाई हो गये
क्यों भूल गये हम उनका बलिदान जान-जहान कर गये जो हम पर कुर्बान

15 August तिरंगा पर कविता

दोस्तों भारत में 15 August बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है | 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को सभी जगह हमारा तिरंगा लहराता हुआ दिखाई देता है | इस दिन यानि Independence Day को सभी लोग अपने तिरंगे को सलामी देते है | इसी के उपलक्ष में हम आपके लिए लेकर आये है एक चुनिन्दा कविता “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा” जो आप इस 15 August Tiranga par Kavita को डाउनलोड कर अपने दोस्तों को सुना सकते है | अपनी स्कूल में सुना सकते है |

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला प्रेम सुधा सरसाने वाला
वीरों को हर्षाने वाला मातृभूमि का तन-मन सारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
स्वतंत्रता के भीषण रण में लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में मिट जाये भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
इस झंडे के नीचे निर्भय हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
आओ प्यारे वीरों आओ देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
इसकी शान न जाने पावे चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे |
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे ||
सभी मनाते पर्व देश का आज़ादी की वर्षगांठ है |
वक्त है बीता धीरे धीरे साल एक और साठ है ||
बहे पवन परचम फहराता याद जिलाता जीत रे |
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे |
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे ||
जनता सोचे किंतु आज भी क्या वाकई आजाद हैं |
भूले मानस को दिलवाते नेता इसकी याद हैं ||
मंहगाई की मारी जनता भूल गई ये जीत रे |
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे |
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे ||
हमने पाई थी आज़ादी लौट गए अँगरेज़ हैं |
किंतु पीडा बंटवारे की दिल में अब भी तेज़ है ||
भाई हमारा हुआ पड़ोसी भूले सारी प्रीत रे |
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे |
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे ||

15 August देश के जावानों पर कविता

एक जिगर का टूकड़ा मेरा जा रहा मुख मोड़कर .
माँ को अपने छोड़कर माँ को अपने छोड़कर
आँसुओं का जलजला तन मन में मेरे छा गया
हे विधाता क्या किया जीवन में ये विष घोलकर
एक जिगर का टूकड़ा मेरा
झुकी हुई पसलीयों में वृद्धों का कैसे हो बशर
सांसो की ये डोर पतली चला गया है तोड़कर
एक जिगर का टूकड़ा मेरा
ग़म का आया ये बवंडर रूह को झकझोरता
वक्त की आँधी चली किस्मत को मेरे फोड़कर
एक जिगर का टूकड़ा मेरा
इतना हिम्मत हौसला दे मेरे परवर दिगार
लाल मेरा जब गया जय हिन्द बोली बोलकर
एक जिगर का टूकड़ा मेरा जा रहा मुख मोड़कर
माँ को अपने छोड़कर,माँ को अपने छोड़कर

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