Desh Bhakti Kavita 2022 [ Top 20 ] Patriotism Poems in Hindi English For School & College Students जोश भर देने वाली देशभक्ति कविताए – यहाँ पढ़े

Desh Bhakti Kavita 2022 Poem Josh Bhar Dene Wali Desh Bhakti Kavita देशभक्ति कविता 2022 Desh Bhakti Poem in Hindi English Patriotism Poems in Hindi For School & College Students हिंदी में देशभक्ति कविता Josh Bhar Dene Wali Desh Bhakti Hindi Kavita Poem For Class 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 : इस लेख में आपके लिए देश की आजादी में शहीद हुए सभी सैनिको व स्वतंत्र सेनानियों की वीर गथाओ का संक्षेप में वर्णन करते हुए बहुत ही सुन्दर और सरल शब्दों में जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता Desh Bhakti Kavita Poem देशभक्ति कविता लेकर आये है |

आप इन Desh Bhakti Kavita 2022 Patriotism Poems in Hindi को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) एवं गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन आयोजित कार्यक्रम में बोलकर या गाकर सुना सकते है | आइये पढ़ते है – जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता Desh Bhakti Kavita 2022 Poem.

Desh Bhakti Kavita Poem

Desh Bhakti Kavita 2022 Poem Short / Long Patriotism Poems in Hindi जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता

Contents

अगर आप Desh Bhakti Kavita Desh Bhakti Poem Patriotism Poems in Hindi खोज रहे है तो आपको बतादे की इस पेज में प्रसिद्ध कवियों द्वारा लिखी गई Desh Bhakti Kavita Poem हिंदी में देशभक्ति कविता का संग्रह तैयार कर शेयर की है | इन Desh Bhakti Poetry Desh Bhakti Kavita में उन सभी वीर सपूतो की यादो संजोया गया है जिन्होंने देश पर अपनी जान न्योछावर कर दी थी | यह देश भक्ति कविता Desh Bhakti Kavita Poem हमे स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों की याद दिलाती हैं और हमारे अन्दर देशप्रेम की भावना को जागृत करती हैं |

यदि आपको यह Desh Bhakti Kavita Patriotism Poems in Hindi पसंद आये तो इन्हें अपने दोस्तों व प्रियजनों के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करे | बिना वक्त जाया करे हम पढना शुरू करते है Desh Bhakti Kavita जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता.

देशभक्ति कविता 2022 | Desh Bhakti Kavita in Hindi | New Patriotism Best Poems

( देश भक्ति कविता – मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है )
चिश्ती ने जिस ज़मीं पे पैग़ामे हक़ सुनाया
नानक ने जिस चमन में बदहत का गीत गाया
तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया
जिसने हेजाजियों से दश्ते अरब छुड़ाया
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

सारे जहाँ को जिसने इल्मो-हुनर दिया था
यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था
मिट्टी को जिसकी हक़ ने ज़र का असर दिया था
तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

टूटे थे जो सितारे फ़ारस के आसमां से
फिर ताब दे के जिसने चमकाए कहकशां से
बदहत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकां से
मीरे-अरब को आई ठण्डी हवा जहाँ से
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

बंदे किलीम जिसके, परबत जहाँ के सीना
नूहे-नबी का ठहरा, आकर जहाँ सफ़ीना
रफ़अत है जिस ज़मीं को, बामे-फलक़ का ज़ीना
जन्नत की ज़िन्दगी है, जिसकी फ़िज़ा में जीना
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

गौतम का जो वतन है, जापान का हरम है
ईसा के आशिक़ों को मिस्ले-यरूशलम है
मदफ़ून जिस ज़मीं में इस्लाम का हरम है
हर फूल जिस चमन का, फिरदौस है, इरम है
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

देशभक्ति कविताएं | Desh Bhakti Kavitayen | New Patriotism Poems in Hindi 2022

हरी भरी धरती हो, नीला आसमान रहे
फहराता तिरँगा, चाँद तारों के समान रहे
त्याग शूर वीरता, महानता का मंत्र है
मेरा यह देश, एक अभिनव गणतंत्र है

शांति अमन चैन रहे, खुशहाली छाये
बच्चों को बूढों को सबको हर्षाये

हम सबके चेहरो पर फैली मुस्कान रहे
फहराता तिरँगा चाँद तारों के समान रहे

Desh Bhakti Kavita in Hindi image Download देशभक्ति कविता की फोटो

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Patriotism Poems | देशभक्ति कविता बच्चों के लिए | Desh Bhakti Kavita Bacchon Ke Liye

जय जय प्यारा, जग से न्यारा
शोभित सारा, देश हमारा
जगत-मुकुट, जगदीश दुलारा
जग-सौभाग्य सुदेश
जय जय प्यारा भारत देश

प्यारा देश, जय देशेश
जय अशेष, सदस्य विशेष
जहाँ न संभव अध का लेश
केवल पुण्य प्रवेश
जय जय प्यारा भारत देश

स्वर्गिक शीश-फूल पृथ्वी का
प्रेम मूल, प्रिय लोकत्रयी का
सुललित प्रकृति नटी का टीका
ज्यों निशि का राकेश
जय जय प्यारा भारत देश

जय जय शुभ्र हिमाचल शृंगा
कलरव-निरत कलोलिनी गंगा
भानु प्रताप-चमत्कृत अंगा
तेज पुंज तपवेश
जय जय प्यारा भारत देश

जगमें कोटि-कोटि जुग जीवें
जीवन-सुलभ अमी-रस पीवे
सुखद वितान सुकृत का सीवे
रहे स्वतंत्र हमेश
जय जय प्यारा भारत देश

देशभक्ति कविता हिंदी में | Desh Bhakti Kavita 2022 | Latest Patriotism Hindi Poems

क्या हुआ गर मर गए अपने वतन के वास्ते
बुलबुलें कुर्बान होती हैं चमन के वास्ते।

तरस आता है तुम्हारे हाल पे, ऐ हिंदियो
ग़ैर के मोहताज हो अपने कफ़न के वास्ते

देखते हैं आज जिसको शाद है, आज़ाद है
क्या तुम्हीं पैदा हुए रंजो-मिहन के वास्ते?

दर्द से अब बिलबिलाने का ज़माना हो चुका
फ़िक्र करनी चाहिए मर्जे़ कुहन के वास्ते

हिंदुओं को चाहिए अब क़स्द काबे का करें
और फिर मुस्लिम बढ़ें गंगो-जमन के वास्ते

Swatantrata Diwas Shayari स्वतंत्रता दिवस पर शायरी फोटो बधाई संदेश शुभकामनाएं

Azadi Par Shayari Photo Images Whatsapp Status आजादी पर शायरी फोटो स्टेटस

देशभक्ति कविता इन हिंदी | Desh Bhakti Ke Upar Ek Kavita | Desh Bhakti Kavita 2022

जिसे देश से प्यार नहीं हैं
जीने का अधिकार नहीं हैं

जीने को तो पशु भी जीते
अपना पेट भरा करते हैं
कुछ दिन इस दुनिया में रह कर
वे अन्तत: मरा करते हैं
ऐसे जीवन और मरण को
होता यह संसार नहीं है
जीने का अधिकार नहीं हैं

मानव वह है स्वयं जिए जो
और दूसरों को जीने दे
जीवन-रस जो खुद पीता वह
उसे दूसरों को पीने दे
साथ नहीं दे जो औरों का
क्या वह जीवन भार नहीं है?
जीने का अधिकार नहीं हैं

साँसें गिनने को आगे भी
साँसों का उपयोग करो कुछ
काम आ सके जो समाज के
तुम ऐसा उद्योग करो कुछ
क्या उसको सरिता कह सकते
जिसम़ें बहती धार नहीं है?
जीने का अधिकार नहीं हैं

15 अगस्त कविता हिंदी में – यंहा पढ़ें

देशभक्ति तिरंगा शायरी – झंडे पर शायरी

स्वतंत्रता दिवस पर स्टेटस हिंदी में – पढ़ें

A to Z तिरंगा Name फोटो वॉलपेपर – यंहा से डाउनलोड करें

15 अगस्त 2022 के Full HD Wallpaper Image फोटो डाउनलोड करें

Desh Bhakti Par Kavita Hindi Mein | Best Desh Bhakti Poems on Hindi

ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों क्या कहना, ये देश है दुनिया का गहना

यहाँ चौड़ी छाती वीरों की, यहाँ भोली शक्लें हीरों की
यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में, मचती में धूमें बस्ती में

पेड़ों में बहारें झूलों की, राहों में कतारें फूलों की
यहाँ हँसता है सावन बालों में, खिलती हैं कलियाँ गालों में

कहीं दंगल शोख जवानों के, कहीं करतब तीर कमानों के
यहाँ नित नित मेले सजते हैं, नित ढोल और ताशे बजते हैं

दिलबर के लिये दिलदार हैं हम, दुश्मन के लिये तलवार हैं हम
मैदां में अगर हम डट जाएं, मुश्किल है कि पीछे हट जाएं

देशभक्ति की कविताएं हिंदी में | Desh Bhakti Par Ek Kavita in Hindi Class 1 To 12

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से
आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है

Patriotic Poetry Written By Bamous Poets Desh Bhakti Kavita By Kumar Vishwas, Harivansh Rai Bachchan, Atal Bihari Vajpayee

यहाँ आप प्रसिद्द कवियों जैसे कुमार विश्वास, हरिवंश राय बच्चन, रामधारी सिंह दिनकर इत्यादि द्वारा लिखी गई देश भक्ति कविता पढ़ रहे है Desh Bhakti Kavita Atal Bihari Vajpayee Desh Bhakti Kavita By Kumar Vishwas Desh Bhakti Kavita Bhagat Singh Desh Bhakti Kavita By Harivansh Rai Bachchan Desh Bhakti Kavita By Famous Poets in Hindi Desh Bhakti Kavita By Ramdhari Singh Dinkar

हिंदी में देशभक्ति कविता | Desh Bhakti Se Judi Kavita | सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता

अलग अलग गलियों कुचों में लोग कोन गिनता है
साथ खड़े हों रहने वाले, देश तभी बनता है

बड़ी बड़ी हम देश प्रेम की बात किये जाते हैं
वक्त पड़े तो अपनों के भी काम नही आते हैं

सरहद की रखवाली को सेना अपनी करती है
पर अंदर सडकों पर लड़की चलने में डरती है

युवा शक्ति का नारा सुनने में अक्सर आता है
सही दिशा भी किसी युवा को नहीं दिखा पाता है

खेत हमारी पूँजी है, और फसल हमारे गहने
क्यों किसान फिर कहीं लगे हैं जान स्वयं की लेने

थल सजा है कहीं परन्तु भूख नहीं लगती है
किसी की बेटी भूख के मारे रात रात जगती है

क्या सडसठ सालों में ये आजाद वतन अपना है
क्यायही भगत सिंह और महात्मा गाँधी का सपना है

क्या इसीलिए आज़ाद गोली खुद को मारी
क्या इसीलिए रण में कूदी वह नन्ही सी झलकारी

क्याइसीलिए बिस्मिल ने ‘फिर आऊंगा’ कह डाला था
क्या ऊधम सिंह ने क्रोध को अपने इसलिए पाला था

गर नहीं तो फिर कैसे चूके हम राष्ट्र नया गढ़ने में
जिस आज़ादी के लिए लड़े उसकी इज्जत करने में

जो फूल सूख कर बिखर गया वह फिर से नही खिलेगा
जो समय हाथ से निकल गया वह वापस नहीं मिलेगा

पर अक्लमंद को एक इशारा ही काफ़ी होता है
सुधार ही हर गलती के लिए असली माफ़ी होता है

देश प्रेम और राष्ट्रवाद के गान नहीं गाओ तुम
अपने अंदर बसे भगत सिंह को जरा जगाओं तुम

मंजिल दूर नहीं राही जब करले अटल इरादा
अपना हाथ उठा कर ख़ुद से आज करो ये वादा

मेरे सामने कोई कभी भी भूख से नही मरेगा
मेरे रहते अन्याय से कोई नहीं डरेगा

मैं पहले उसका जिसकी तत्काल मदद करनी है
अपने आगे हर पीड़ित की हर पीड़ा हरनी है

शपथ गृहण कर आज़ादी का उत्सव आज मनाते हैं
देश बुलाता है आओ कुछ काम तो इसके आते हैं

|| वन्दे मातरम् – भारत माता की जय ||

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15 August Speech In Hindi स्वतंत्रता दिवस पर भाषण स्पीच हिंदी में

नई देशभक्ति कविता | Desh Bhakti Par Aadharit Kavita Hindi Mein | Desh Bhakti Poem

जाग रहे हम वीर जवान
जियो जियो अय हिन्दुस्तान
हम प्रभात की नई किरण हैं, हम दिन के आलोक नवल
नवीन भारत के सैनिक, धीर,वीर,गंभीर, अचल
हम प्रहरी उँचे हिमाद्रि के, सुरभि स्वर्ग की लेते हैं
हम हैं शान्तिदूत धरणी के, छाँह सभी को देते हैं
वीर-प्रसू माँ की आँखों के हम नवीन उजियाले हैं
गंगा, यमुना, हिन्द महासागर के हम रखवाले हैं
तन मन धन तुम पर कुर्बान
जियो जियो अय हिन्दुस्तान

हम सपूत उनके जो नर थे अनल और मधु मिश्रण
जिसमें नर का तेज प्रखर था, भीतर था नारी का मन
एक नयन संजीवन जिनका, एक नयन था हालाहल
जितना कठिन खड्ग था कर में उतना ही अंतर कोमल
थर-थर तीनों लोक काँपते थे जिनकी ललकारों पर
स्वर्ग नाचता था रण में जिनकी पवित्र तलवारों पर
हम उन वीरों की सन्तान
जियो जियो अय हिन्दुस्तान

हम शकारि विक्रमादित्य हैं अरिदल को दलनेवाले
रण में ज़मीं नहीं, दुश्मन की लाशों पर चलनेंवाले
हम अर्जुन, हम भीम, शान्ति के लिये जगत में जीते हैं
मगर, शत्रु हठ करे अगर तो, लहू वक्ष का पीते हैं
हम हैं शिवा-प्रताप रोटियाँ भले घास की खाएंगे
मगर, किसी ज़ुल्मी के आगे मस्तक नहीं झुकायेंगे
देंगे जान , नहीं ईमान,
जियो जियो अय हिन्दुस्तान

अय देश! कि पहरे पर ही जगे हुए हैं हम
वन, पर्वत, हर तरफ़ चौकसी में ही लगे हुए हैं हम
हिन्द-सिन्धु की कसम, कौन इस पर जहाज ला सकता
सरहद के भीतर कोई दुश्मन कैसे आ सकता है ?
पर की हम कुछ नहीं चाहते, अपनी किन्तु बचायेंगे
जिसकी उँगली उठी उसे हम यमपुर को पहुँचायेंगे
हम प्रहरी यमराज समान
जियो जियो अय हिन्दुस्तान

देशभक्ति पर कविता हिंदी में | Desh Bhakti Kavita Hindi Mein Likhi Hui | सरल देशभक्ति कविता

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा

ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा

ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा

यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा

कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा

‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा

देशभक्ति कविता Bachon Ke Liye | Desh Bhakti Poems Hindi | जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता

भारत तुझसे मेरा नाम है
Bharat तू ही मेरा धाम है

भारत मेरी शोभा शान है
Bharat मेरा तीर्थ स्थान है

भारत तू मेरा सम्मान है
Bharat तू मेरा अभिमान है

भारत तू धर्मो का ताज है
Bharat तू सबका समाज है

भारत तुझमें गीता सार है
Bharat तू अमृत की धार है

भारत तू गुरुओं का देश है
Bharat तुझमें सुख सन्देश है

भारत जबतक ये जीवन है
Bharat तुझको ही अर्पण है

भारत तू मेरा आधार है
Bharat मुझको तुझसे प्यार है

भारत तुझपे जा निसार है
Bharat तुझको नमस्कार है

सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता | देशभक्ति की कविताएँ | Desh Bhakti Kavita Chhote Bacchon Ke Liye

अमरपुरी से भी बढ़कर के जिसका गौरव-गान है
तीन लोक से न्यारा अपना प्यारा हिंदुस्तान है
गंगा, यमुना सरस्वती से सिंचित जो गत-क्लेश है
सजला, सफला, शस्य-श्यामला जिसकी धरा विशेष है
ज्ञान-रश्मि जिसने बिखेर कर किया विश्व-कल्याण है
सतत-सत्य-रत, धर्म-प्राण वह अपना भारत देश है

यहीं मिला आकार ‘ज्ञेय’ को मिली नई सौग़ात है
इसके ‘दर्शन’ का प्रकाश ही युग के लिए विहान है
वेदों के मंत्रों से गुंजित स्वर जिसका निर्भ्रांत है
प्रज्ञा की गरिमा से दीपित जग-जीवन अक्लांत है
अंधकार में डूबी संसृति को दी जिसने दृष्टि है
तपोभूमि वह जहाँ कर्म की सरिता बहती शांत है
इसकी संस्कृति शुभ्र, न आक्षेपों से धूमिल कभी हुई
अति उदात्त आदर्शों की निधियों से यह धनवान है

योग-भोग के बीच बना संतुलन जहाँ निष्काम है
जिस धरती की आध्यात्मिकता, का शुचि रूप ललाम है
निस्पृह स्वर गीता-गायक के गूँज रहें अब भी जहाँ
कोटि-कोटि उस जन्मभूमि को श्रद्धावनत प्रणाम है
यहाँ नीति-निर्देशक तत्वों की सत्ता महनीय है
ऋषि-मुनियों का देश अमर यह भारतवर्ष महान है

क्षमा, दया, धृति के पोषण का इसी भूमि को श्रेय है
सात्विकता की मूर्ति मनोरम इसकी गाथा गेय है
बल-विक्रम का सिंधु कि जिसके चरणों पर है लोटता
स्वर्गादपि गरीयसी जननी अपराजिता अजेय है
समता, ममता और एकता का पावन उद्गम यह है
देवोपम जन-जन है इसका हर पत्थर भगवान है

Independence Day Speech In Bengali Gujarati

Short/Long 15 August Independence Day Speech In English

Desh Bhakti Par Kavita in Hindi | Desh Bhakti Sambandhit Kavita

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है

करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है

ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है

खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है

यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है

वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है

हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है

है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है

हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है, राम प्रसाद बिस्मिल

Poem on Patriotism Hindi Desh Bhakti Hindi Kavita Poem

इन देशभक्ति कविताओ को आप इस प्रकार से सर्च कर भी पढ़ सकते है जैसे – सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता सरल देशभक्ति कविता जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता 2022 देशभक्ति का कविता देशभक्ति के कविता देशभक्ति कविता in Hindi देशभक्ति पर कविताएँ in Hindi देशभक्ति की कविता देशभक्ति पर कविता देशभक्ति पर कविता सुनाइए देशभक्ति पर कविता सुनाओ देशभक्ति पर कविताएं Desh Bhakti Par Adharit Kavita Desh Bhakti Kavita Class 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 Desh Bhakti Kavita Chhoti Si Desh Bhakti Par Aadharit Ek Kavita Desh Bhakti Kavita For Class 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 Desh Bhakti Kavita in Hindi For Class 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12

All Desh Bhakti Kavita in Hindi | Desh Bhakti Kavita Written in Hindi

तूने गर ठान लिया जुल्म ही करने के लिए
हम भी तैयार हैं अब जी से गुज़रने के लिए

अब नहीं हिंद वह जिसको दबाए बैठे थे
जाग उठे नींद से, हां हम तो सम्हलने के लिए

हाय, भारत को किया तूने है ग़ारत कैसा
लूटकर छोड़ दिया हमको तो मरने के लिए

भीख मंगवाई है दर-दर हमंे भूखा मारा
हिंद का माल विलायत को ही भरने के लिए

लाजपत, गांधी व शौकत का बजाकर डंका
सीना खोले हैं खड़े गोलियां खाने के लिए

तोप चरख़े की बनाकर तुम्हें मारेंगे हम
अब न छोड़ेंगे तुम्हें फिर से उभरने के लिए

दास, शौकत व मुहम्मद को बनाकर कै़दी
छेड़ा है हिंद को अब सामना करने के लिए

बच्चे से बूढ़े तलक आज हैं तैयार सभी
डाल दो हथकड़ियां जेल को भरने के लिए

उठो, आओ, चलो, अब फौज में भर्ती हो लो
भारत-भूमि का भी तो कुछ काम करने के लिए

ख़ां साहब और राय बहादुर की पदवी लेकर
जी-हुजूरी और गुलामी ही है करने के लिए

ईश्वर से प्रार्थना करता है यही आज ‘वहीद’
शक्ति मिल जाए हमें देश पे मरने के लिए

15 August Tiranga Shayari Message Independence Day Flage Shayari In Hindi

15 August Essay In English For Class 1 To 12 In 100, 200, 500 Words

Chhote Bachho Ke Desh Bhakti Kavita | Desh Bhakti Ke Liye Kavita

हम ऐसे आज़ाद, हमारा
झंडा है बादल

चांदी, सोने, हीरे, मोती
से सजतीं गुड़ियाँ
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँ

इनसे सज-धज बैठा करते
जो, हैं कठपुतले
हमने तोड़ अभी फैंकी हैं
बेड़ी-हथकड़ियाँ

परम्परा पुरखों की हमने
जाग्रत की फिर से
उठा शीश पर हमने रक्खा
हिम किरीट उज्जवल
हम ऐसे आज़ाद, हमारा
झंडा है बादल

Patriotism Poems in Hindi | Desh Bhakti Geet Kavita in Hindi

बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से
लटकते आए अक्सर पैकरे-ईसार फांसी से

लबे-दम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी
तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी से

खुली है मुझको लेने के लिए आग़ोशे आज़ादी
ख़ुशी है, हो गया महबूब का दीदार फांसी से

कभी ओ बेख़बर तहरीके़-आज़ादी भी रुकती है?
बढ़ा करती है उसकी तेज़ी-ए-रफ़्तार फांसी से

यहां तक सरफ़रोशाने-वतन बढ़ जाएंगे क़ातिल
कि लटकाने पड़ेंगे नित मुझे दो-चार फांसी से

Latest Desh Bhakti Kavita | Desh Bhakti Ki Kavita in Hindi

आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम …

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से …

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मि नियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से …

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से …

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से …

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से …

Independence Day Essay In Hindi स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर निबंध हिंदी में

15 August Slogan Nare भारतीय स्वतंत्रता के जोश जूनून से भरे देशभक्ति नारे

Dry Day Funny Jokes Quotes Shayari शराबियो के लिए शुष्क दिवस पर मजेदार चुटकुले

Desh Bhakti Ki Kavita Hindi Mein | Desh Bhakti Ki Kavita Hindi Me

उठो, धरा के अमर सपूतों
पुन: नया निर्माण करो
जन-जन के जीवन में फिर से
नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो
नई प्रात है नई बात है
नया किरन है, ज्योति नई
नई उमंगें, नई तरंगें
नई आस है, साँस नई
युग-युग के मुरझे सुमनों में
नई-नई मुस्कान भरो

उठो, धरा के अमर सपूतों
पुन: नया निर्माण करो

डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ
नए स्वरों में गाते हैं
गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें
मस्त उधर मँडराते हैं
नवयुग की नूतन वीणा में
नया राग, नव गान भरो

उठो, धरा के अमर सपूतों
पुन: नया निर्माण करो

कली-कली खिल रही इधर
वह फूल-फूल मुस्काया है
धरती माँ की आज हो रही
नई सुनहरी काया है
नूतन मंगलमय ध्वनियों से
गुँजित जग-उद्यान करो

उठो, धरा के अमर सपूतों
पुन: नया निर्माण करो

सरस्वती का पावन मंदिर
शुभ संपत्ति तुम्हारी है
तुममें से हर बालक इसका
रक्षक और पुजारी है
शत-शत दीपक जला ज्ञान के
नवयुग का आह्वान करो

उठो, धरा के अमर सपूतों
पुन: नया निर्माण करो

Kavita on Desh Bhakti in Hindi | Desh Bhakti Ke Upar Kavita in Hindi

बेरोजगारी आम रोजगार हो गई
शिक्षा रट्टा मार हो गई
कृषक, श्रमिक की किस्मत सोई
खुदकूशी नया समाचार हो गई
थानेदार की लूटमार का
बचा नहीं अब कोई सानी
जनता तरसे पानी-पानी

सत्ताधारी सम्राट हुए हैं
पत्रकारिता नौकरानी हो गई
संसद मे सांसद सोते हैं
राजनीति भी धंधा-पानी हो गई
ईमानदारी ईद का चाँद हुई
भ्रष्टाचार अब नई कहानी
जनता तरसे पानी-पानी

मानवता अत्याचार हो गई
दुष्टता शिष्टाचार हो गई
अत्याचार कहानी हो गई
जातक कथा पुरानी हो गई
जनता भी नहीं बहुत सयानी
हिन्दुस्तान हो रहा पानी-पानी

Veer Ras Ki Desh Bhakti Kavita | Desh Bhakti Ke Bare Mein Kavita

देश-देश की स्वतंत्रता देवी
आज अमित प्रेम से उतारती

निकटपूर्व, पूर्व, पूर्व-दक्षिण में
जन-गण-मन इस अपूर्व शुभ क्षण में
गाते हों घर में हों या रण में
भारत की लोकतंत्र भारती

गर्व आज करता है एशिया
अरब, चीन, मिस्र, हिंद-एशिया
उत्तर की लोक संघ शक्तियां
युग-युग की आशाएं वारतीं

साम्राज्य पूंजी का क्षत होवे
ऊंच-नीच का विधान नत होवे
साधिकार जनता उन्नत होवे
जो समाजवाद जय पुकारती

जन का विश्वास ही हिमालय है
भारत का जन-मन ही गंगा है
हिन्द महासागर लोकाशय है
यही शक्ति सत्य को उभारती

यह किसान कमकर की भूमि है
पावन बलिदानों की भूमि है
भव के अरमानों की भूमि है
मानव इतिहास को संवारती

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