Dhirubhai Ambani Biography धीरूभाई अंबानी का जीवन परिचय और उनकी सफलता की वास्तविक कहानी

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Dhirubhai Ambani Biography History धीरूभाई अंबानी का जीवन परिचय और उनकी सफलता की वास्तविक कहानी

धीरूभाई अंबानी(Dhirubhai Ambani) एक महान उद्योगपति और रिलायंस इण्डस्ट्रीज़ के संस्थापक थे। उनके द्वारा स्थापित रिलायंस इंडस्ट्रीज़ आज भारत की प्रमुख कंपनियों में से एक है और लाखों लोग उससे रोजगार प्राप्त करके अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। अपने कार्यकाल में धीरूभाई अंबानी ने अनेक व्यवसायिक क्षेत्रों जैसे कपड़ा, रसायन, पूंजी बाजार, सूचना प्रौद्योगिकी, फुटकर, प्रचालन तंत्र को विविधता प्रदान की है। आईए जानते हैं धीरूभाई अंबानी के जीवन की कहानी और उनके द्वारा कहे गए अनमोल विचारों के बारे में। After completing his initial five years of education in a village school he went to Junagadh to pursue further studies. Despite being the son of a school teacher Dhirubhai showed great interest in formal education however he grew up to be a hardworking, intelligent and ascetic young man. Even as a teenager, Dhirubhai showed great skill in retailing selling oil and setting up fritter stalls, thus earning money to help his poor family. Socialism and politics attracted 16-year-old Dhirubhai, who started dreaming about a new and progressive India, where industries would develop at an unprecedented rate and larger-than-life dreams of industrious young men would come true. Dhirubhai was determined to do his bit for his country and for himself. Dhirubhai Ambani first job When he was sixteen he moved to Aden, Yemen. He worked with one. Basie and Co. A. Besse & Company with a salary of 300 rupees. The Dhirubhai is a good man and Life is hard work. The all Gays can check Dhirubhai life full information on this web page.

Dhirubhai Ambani धीरूभाई अंबानी का जीवन परिचय

Ambani began a business trading in spices in the late 1950 calling his nascent venture Reliance Commercial Corporation. He soon expanded into other commodities, following a strategy of offering higher-quality products and accepting smaller profits than his competitors. Leaving aside his political pursuits, he concentrated on academics and gave his matriculation exams. However, due to the ill health of his father and impoverished living condition of the family, he had to give up on his education and take up a job offered in Aden. Curious to learn the tricks of the trade, he soon started working simultaneously for a Gujarati trading firm. It was there that he learnt accounting, book keeping and preparing shipping papers and documents. He also acquired the skill of dealing with banks and insurance companies. His business grew quickly. After deciding that the corporation had gone as far as it could with commodities, Ambani turned his attention to synthetic textiles. He made his first foray into backward integration with the opening of the first Reliance textile mill in 1966. Continuing a policy of backward integration and diversification, he gradually shaped Reliance into a petrochemicals behemoth and later added plastics and power generation to the company’s businesses.

धीरूभाई अंबानी का जीवन परिचय 
जन्म 28 दिसंबर 1932 – चोरवाड़, जूनागढ़, गुजरात, भारत
नाम धीरूभाई अंबानी
पूर्ण नाम धीरज लाल हिराचंद अम्बानी
माता पिता हिराचंद गोर्धनभाई अंबानी, जमनाबेन
पत्नी कोकिलाबेन अंबानी
पुत्र मुकेश अंबानी, और अनिल अंबानी
पुत्री नीना कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर
मृत्यु 6 जुलाई 2002, मुम्बई
व्यवसाय उद्योगपति

Dhirubhai Ambani  Date of Birth & Education धीरुभाई अंबानी का जन्म और शिक्षा

धीरुभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर, 1933, को जूनागढ़ (जो की अब भारत के गुजरात राज्य में है) चोरवाड़ में हिराचंद गोर्धनभाई अंबानी और जमनाबेन के बहुत ही सामान्य मोध परिवार में हुआ था। यद्यपि वे गुजरात में जन्मे थे, जो की एक सामाजिक-धार्मिक समूह से सम्बन्ध रखता है और पहले उत्तर पश्चिमी भारत का प्रांत था और विभाजन के बाद अब हिन्‍दुस्‍तान के अधिकार में है।वे एक शिक्षक के दूसरे बेटे थे। नवम्बर 2000 में केमटेक संस्था और विश्व रसायन अभियांत्रिकी द्वारा उन्हें ‘सदी का मानव’ सम्मान। अगस्त 2001 में दि इकोनोमिक टाइम्स द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान। भारत सरकार द्वारा पदम विभूषण सम्मान। धीरूभाईअंबानी ने अपने जीवन में कई पड़ाव देखे हैं | छोटी सी उम्र में बहुत कुछ सीख लिया था और कुछ कर गुजरने के सपने ने उन्हें आज एक सफल इन्सान बना दिया |

धीरुभाई अंबानी जॉब

जब वे सोलह वर्ष के थे तो एडन, यमन चले गए। उन्होंने अ के साथ काम किया। बेस्सी और कं. (A. Besse & Co.) के साथ 300 रूपये के वेतन पर काम किया। दो साल उपरांत, अ.बेस्सी और कं. शेल (Shell) उत्पादन के वितरक बन गए और एडन (Aden) के बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिल्लिंग स्टेशन के प्रबंधन के लिए धीरुभाई को पदोन्नति दी गई।1958 में, धीरुभाई भारत वापस आ गए और 15000.00 की पूंजी के साथ रिलायंस वाणिज्यिक निगम (Relianc Commercial Corporation) की शुरुआत की. रिलायंस वाणिज्यिक निगम का प्राथमिक व्यवसाय पोलियस्टर के सूत का आयात और मसालों का निर्यात करना था।
वे अपने दुसरे चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी जो उनके साथ ही एडन , यमन में रहा करते थे, के साथ साझेदारी में व्यवसाय शुरू की.रिलायंस वाणिज्यिक निगम का पहला कार्यालय मस्जिद बन्दर के नर्सिनाथ सड़क पर स्थापित हुयी. यह एक टेलीफोन, एक मेज़ और तीन कुर्सियों के साथ एक 350 वर्ग फुट का कमरा था। आरंभ में, उनके व्यवसाय में मदद के लिए दो सहायक थे। 1955 में, चंपकलाल दिमानी और धीरुभाई अंबानी की साझेदारी खत्म हो गयी और धीरुभाई ने स्वयं शुरुआत की. यह माना जाता है की दोनों के स्वभाव अलग थे और व्यवसाय कैसे किया जाए इस पर अलग राय थी। जहां पर श्री दमानी एक सतर्क व्यापारी थे और धागे की फैक्ट्रियों/भंडारों के निर्माण में विश्वास नही रखते थे, वहीं धीरुभाई को जोखिम लेनेवाले के रूप में जानते थे और वे मानते थे कि मूल्य वृद्धि कि आशा रखते हुए भंडारों का निर्माण भुलेश्वर, मुंबई इस्टेट में किया जाना चाहिए, ताकि लाभ बनाया जाए/मुनाफा बनाया जाए. 1968 में वे दक्षिण मुंबई के अल्टमाउंट सड़क को चले गए। 1960 तक अंबानी की कुल धनराशि 10 लाख रूपये आंकी गयी।

धीरूभाई अंबानी की जीवन कहानी – आत्मकथा

कुछ लोग सिल्वर स्पून के साथ जन्म लेते हैं तो कुछ अपनी मेहनत से जीवन को आदर्श बना दते हैं और लोग उनसे प्रेरणा लेते हैं।ऐसी ही शख्सियतों में एक नाम स्व. धीरूभाई अंबानी का भी आता है।गुजरात के एक छोटे से गांव चोरवाड के एक स्कूल में शिक्षक के पद पर पदस्थ हीराचंद गोवरधनदास अंबानी के तीसरे बेटे धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 को हुआ।पांच भाई-बहनों में धीरूभाई तीसरे नंबर के थे। परिवार की पांच संतानों में रमणिकलाल, नटवर लाल, धीरूभाई और दो बहनें त्रिलोचना और जसुमती शामिल हैं।आर्थिक तंगी के कारण धीरूभाई को हाईस्कूल के बाद ही पढ़ाई छोड़ना पड़ गई।धीरूभाई ने बालपन में ही घर की आर्थिक मदद करनी शुरू कर दी थी। इस समय वे गिरनार के पास भजिए की दुकान लगाया करते थे, दुकान की आय यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या पर सीमित थी।धीरूभाई की पहली जॉब की बात करें तो 1949 में 17 वर्ष की उम्र में काबोटा नामक शिप से वे यमन के एडेन शहर पहुंचे थे।यहां उनके बड़े भाई रमणिकलाल ने उनके लिए सारी व्यवस्थाएं कर रखी थीं, इसलिए उन्हें विदेश में जॉब मिलने में कोई परेशानी नहीं हुई।लेकिन धीरूभाई के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। इसलिए 1954 में वे वतन वापस आ गए।सन् 1955 में जेब में 500 रुपए रखकर किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए। और यहीं से शुरू हुई उनकी व्यावसायिक यात्रा।यहां से धीरूभाई अंबानी ने ऐसे कदम बढ़ाए कि फिर कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। उनका नाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हुआ।उनके पिता एक स्कूल में शिक्षक थे. धीरूभाई अंबानी सप्ताहांत पर माउंट गिरनार में तीर्थयात्रियों के लिए भाजी बेचकर अपनी उद्यमशीलता कैरियर शुरू किया है.उन्होंने 1966 में रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की हैसमय के साथ वह अतिरिक्त दूरसंचार,सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, बिजली, रिटेल, कपड़ा, बुनियादी सेवाओं, पूंजी बाजार, और रसद के साथ पेट्रोरसायन में एक प्रमुख विशेषज्ञता है |आज कंपनी के 85,000 से अधिक कर्मचारियों शामिल है और भारत की केन्द्रीय सरकार को कुल कर राजस्व का लगभग 5 प्रतिशत की प्रदाता मिलती है | गत 6 जुलाई 2002 को धीरूभाई अंबानी ने दुनिया से विदा ली। इस समय वे 62000 करोड़ रुपए के मालिक थे।वर्तमान में उनके बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी उनकी सल्तनत को संभाले हुए हैं। पिता की तरह आज इन दोनों भाईयों का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यवसायियों में शुमार है।

पकौड़े बेचने वाला कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस टाइकून जाने –

धीरजलाल हिराचंद अम्बानी (धीरूभाई अम्बानी) एक प्रसिद्ध भारतीय व्यवसायी थे जिन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की। धीरुभाई की कहानी एक छोटे व्यापारी से बहुत बड़े व्यावसायिक टाइकून बनने की कहानी है | धीरजलाल हीरालाल अंबानी गुजरात के एक बेहद ही मामूली शिक्षक के परिवार में (28 December 1932) जन्मे थे। उन्होंने मात्र हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण की थी पर अपने दृढ-संकल्प के बूते उन्होंने स्वयं का विशाल व्यापारिक और औद्योगिक साम्राज्य स्थापित किया।कहा जाता है की धीरुभाई अंबानी ने अपना उद्योग व्यवसाय सप्ताहंत में गिरनार कि पहाड़ियों पर तीर्थयात्रियों को पकौड़े बेच कर किया था।फर्श ये अर्श तक का सफर तय करने वाले देश के मशहूर इंड्रस्टलिस्ट स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी ने 1950 में यमन में नौकरी भी की थी। तब उन्हें 300 रुपए महीने सैलरी मिलती थी। फिर उन्होंने कारोबार शुरू किया और बड़े औद्योगिक ग्रुप की स्थापना की।उन्होंने अपना करियर अमन के एक पेट्रोल पंप पर एक सामान्य पेट्रोल फिलर के रूप में शुरू किया था। बहुत जल्दी ही उन्होंने अपने रिश्ते के भाई के साथ टेक्सटाईल धागों का व्यापार शुरू कर दिया। दोनों भाई अपने बीच आपसी वैचारिक मतभेद तथा व्यापार के तरीकों के चलते अलग हो गए। इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने आक्रामक ढंग से अपने व्यापार का विस्तार शुरू किया और देखते ही देखते उनकी कंपनी का विमल ब्रांड पूरे देश पर छा गया।उनकी कंपनी देश के हर घर में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रही। इस दौरान उन्होंने कई बेहद जटिल समस्याओं का सफलतापूर्वक सामना किया और अपनी कंपनी रिलायंस को देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी में बदल दिया।
हालाँकि कारोबार की सफलता में धीरुभाई अम्बानी ने आसमान की बुलंदियों को छू लिया था पर उनपर लचीले मूल्यों और अनैतिक प्रवृति अपनाने के आरोप भी लगे। उनपर यह आरोप लगा कि उन्होंने सरकारी नीतियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुकूल चालाकी से बदलवाया और अपने प्रतिद्वंदियों को भी सरकारी नीतियों के सहारे पठखनी दी।
धीरूभाई अंबानी भारत के मशहूर इंड्रस्टलिस्ट में से एक थे। लेकिन कभी इन्हें किराए के मकान में रहना पड़ा था। छोटे इन्वेस्टमेंट से कारोबार शुरु करने वाले कारोबारी धीरूभाई के बेटे के पास आज दुनिया का सबसे महंगा घर है।नब्बे के दशक में उनकी खराब तबियत के चलते उन्होंने अपना व्यापार अपने दोनों बेटों मुकेश अंबानी तथा अनिल अंबानी को सौंप दिया। 6 जुलाई 2002 को उनकी एक मेजर स्ट्रोक के कारण मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में मृत्यु हो गई। धीरुभाई ने ये व्यवसाय केवल 15, 000 रूपये से शुरू किया था, लेकिन धीरुभाई के मरने के समय, रिल्यांस समूह की सालाना राशि रूपये 75,000 करोड़ थी।

धीरूभाई अंबानी के अनमोल विचार

1: फायदा कमाने के लिए किसी निमन्त्रण की ज़रुरत नहीं होती.

2: कठिन समय में अपने लक्ष्य को मत छोड़िये अपनी विपत्ति को अवसर में बदलिए.

3: मेरी सफलता का राज़ मेरी महत्वाकांक्षा और अन्य पुरुषों का मन जानना है.

4: सही व्यापार जोखिम लेने से ही आता है.

5: बड़ा सोचो, जल्दी सोचो और आगे की सोचो. विचारों पर किसी का भी एकाधिकार नहीं है.

6: हमारे सपने विशाल होने चाहिए. हमारी इच्छाएं बड़ी होनी चाहिए.

7: हम अपने शासको को नहीं बदल सकते लेकिन हम पर वे कैसा शासन करते हैं उसे बदल सकते हैं.

8: रिलायंस में विकास करने की कोई सीमा नहीं है इसीलिए मैं हमेशा अपने लक्ष्यों को दोहराता रहता हूँ और यह सपने देखकर ही पूरा किया जा सकता है.

9: यदि आप दृढ संकल्प और पूरी मेहनत के साथ काम करेंगे तो आपको सफलता ज़रूर मिलेगी.

10: समय सीमा के अन्दर काम खत्म करना काफी नहीं है, मैं समय सीमा से पहले काम खत्म करने में यकीन करता हूँ.

11: हम भारतीयों की समस्या यह है कि हमने बड़ा सोचना बंद कर दिया है.

12: मैं हमेशा भारत को एक महान आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना देखता हूँ.

13: जो सपने देखने का साहस करते हैं, वो पूरी दुनिया को जीत सकते हैं.

Dheerubhai Ambani धीरूभाई अंबानी

 धीरुभाई अम्बानी के महान विचार – GREAT QUOTES OF DHIRUBHAI AMBANI IN HINDI

  • अगर आप स्वंय अपने सपनों का निर्माण नहीं करोगे तो कोई दूसरा आपका उपयोग अपने सपनों का निर्माण करने में करेगा|
  • यदि आप दृढ़ संकल्प और पूर्णता के साथ काम करते हैं, तो सफलता आपका पीछा करेगी।
  • हम दुनिया को साबित कर सकते हैं कि भारत सक्षम राष्ट्र है। हम भारतीयों को प्रतियोगिता से डर नहीं लगता। भारत उपलब्धियां प्राप्त करने वालों का राष्ट्र है।
  • कठिनाईयों के समय अपने लक्ष्यों का पीछा करना न छोड़ें। कठिनाईयों को अवसरों में बदले।
  • अवसर आपके चारों ओर हैं इन्हें पहचानिए और इनका लाभ उठाइए।
  • बड़ा सोचो, दूसरों से पहले सोचो और जल्दी सोचो क्योंकि विचारों पर किसी एक का अधिकार नहीं धीरूभाई अंबानी / Dhirubhai Ambani

धीरूभाई अंबानी के प्रसिद कथन

  • 30 मिलियन निवेशकों के साथ RIL को “विश्व की सबसे बड़ी कंपनी का खिताब मिल जाएगा
  • मैं न सुनने का आदि नही”/ मैं ना शब्द के लिए बहरा हूँ.
  • रिलायंस के विकास की कोई सीमा नही.
  • मैं अपना दृष्टिकोण बदलता रहता हूँ. ये आप तभी कर सकते हैं जब आप सपना देखेंगे.
  • यह मेरा सपना है रिलायंस और भारत के लिए मुनाफा/लाभ बनाने के लिए आपको आमंत्रण की आवश्यकता नहीं |
  • अगर आप दृढ़ता और पूर्णता के साथ काम करें, तो कामयाबी ख़ुद आपके कदम चूमेगी,सफलता आपका अनुसरण करेगी |
  • मुश्किलों में भी अपने लक्ष्यों को ढूँढिये और आपदाओं को अवसरों/मौकों में तब्दील कीजिये/बदलिए.युवाओं को उचित माहौल दीजिये.उन्हें प्रेरित कीजिये. उन्हें जो जरुरत हैं उसकी मदद कीजिये. प्रत्येक में अनंत उर्जा का स्रोत है। वे फल देंगे/वे देंगे.
  • मेरे भूत, वर्तमान और भविष्य में एक समान पहलू है: समबन्ध और आस्था। ये हमारे विकास की नींव है।
    हम लोगों पर दांव लगते हैं’
  • समय सीमा को छू लेना ही ठीक नही है, समय सीमा को हरा देना मेरी आशा है/चाह है।हारें ना, हिम्मत ही मेरा विश्वास है।
  • हम अपने शाशकों को नही बदल सकते, पर हम उनके शाशन के नियम को बदल सकते हैं।
  • धीरुभाई एक दिन चला जाएगा. पर रिलायंस के कर्मचारी और शेयरधारक इसे चलाते रहेंगे/ बचाए रखेंगे. रिलायंस अब एक ऐसी अवधारण है जहाँ पर अब अंबानी अप्रासंगिक हो गए हैं।

नसली वाडिया के साथ संघर्ष

बॉम्बे डाइंग (Bombay Dyeing) के नसली वाडिया (Nusli Wadia) एक समय में धीरुभाई और रिलायंस उद्योग के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी थे। नसली वाडिया और धीरुभाई दोनों अपनी राजनितिक क्षेत्र/घेरे में अपनी पहुच के लिए जाने जाते थे और उनमें योग्यता थी कि वे मुश्किल से मुश्किल लाइसेंस को भी उदारीकरण-पूर्व अर्थव्यवस्था में अनुमोदित करा लेते थे।

धीरुभाई अंबानी के बाद रिलायंस

नवंबर 2004, को मुकेश अम्बानी एक साक्षात्कार में अपने भाई से ‘प्रभुत्व के मुद्दों’ को लेकर मतभेद स्वीकारते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मतभेद निजी कार्यक्षेत्र में आते हैं . उनकी राय यह थी कि इसका कोई प्रभाव कंपनी के कार्यप्रणाली पर नहीं पड़ेगा, यह कहते हुए की रिलायंस पेशेवरों द्वारा प्रबंधित मजबूत कंपनियों में से एक है। रिलायंस उद्योग की भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्ता को मानते हुए, इस मुद्दे को मीडिया में विस्तृत विज्ञापन मिला.

कुंडापुर वामन कामथ (Kundapur Vaman Kamath), आईसीआईसीआई बैंक के प्रबंध निदेशक जो अंबानी परिवार के करीबी दोस्त हैं, को इस मुद्दे को निपटाते हुए मीडिया में देखा गया। भाइयों ने अपनी माँ कोकिलाबेन अंबानी को इस मुद्दे का हल निकलने का काम सौंपा. 18 जून 2005, को कोकिलाबेन अंबानी ने कहा की एक विज्ञप्ति के द्वारा मामले का निपटान होगा.

रिलायंस साम्राज्य अंबानी भाइयों में बंट गया, मुकेश अंबानी को RIL और IPCL और छोटे भाई अनिल अंबानी को रिल्यांस पूंजी, रिलायंस उर्जा और रिल्यांस इन्फोकॉम का सरनामा मिला. मुकेश अंबानी द्वारा चलायी जा रही संस्था को रियायंस उद्योग लिमिटेड के नाम से अभिहित किया गया जबकि अनिल समूह का नाम पुनः अनिल धीरुभाई अंबानी समूह (ADAG) में बदल दिया गया।

धीरुभाई अम्बानी के बारे मैं रोचक तथ्य

आर्थिक तंगी की वजह से करनी पड़ी नौकरी की तलाश

Dhirubhai Ambani धीरुभाई के मैट्रिक परीक्षा के परिणाम आने से पहले ही उनके पिता ने नौकरी के लिए उनके बड़े भाई रमणीक भाई के यहाँ अदन जाने को कहा | धीरुभाई आगे पढना चाहते थे लेकिन पिता की आर्थिक तंगी के आगे उनको पढाई छोडनी पड़ी थी | अब वो पासपोर्ट बनवाने राजकोट गये और उसके बाद वीजा भी बनवाया | अब सारी तैयारी के बाद वो मुम्बई पहुचे जहा से अदन के लिए जहाज जाता था | जब वो जहाज पर अदन जा रहे थे तब एक गुजराती समाचार पत्र में उनके मैट्रिक परीक्षा का नतीजा आया था जिसमे वो द्वितीय श्रेणी से उतीर्ण हुए थे |इस तरह (Dhirubhai Ambani) धीरुभाई अम्बानी 16 साल की उम्र में ही यमन देश के अदन चले गये | अदन में उन्होंने A. Besse & Co. के लिए 300 रूपये प्रतिमाह सैलरी में काम किया जहा पर पढ़े लिखे होने के कारण उन्हें क्लर्क की नौकरी मिल गयी थी उन दिनों लन्दन के बाद अदन ही सबसे बड़ा व्यापरिक तेल बदंरगाह था जहा से हर साल 6300 जहाज और 1500 स्टीमर जाते थे | ये कम्पनी बुकिंग से लेकर माल पहुचने की सारी जिम्मेदारी रखती थी | धीरुभाई ने यहा रहते हुए व्यापार के सारे गुर सीख लिए थे वो छुट्टी के दिनों में अदन के बड़े व्यापरियों के काम को गौर से देखा करते थे |

किराये के मकान से रखी रिलायंस की नींव

25 वर्षीय Dhirubhai Ambani धीरूभाई अम्बानी ने भारत लौटने पर 50000 रूपये की पूंजी से Reliance Commercial Corporation की स्थापना की और इसके लिए उन्होंने ICICI से पहला ऋण लिया था | इस कम्पनी का मुख्य उद्देश्य यार्न को आयात करना और मसालों को निर्यात करना था | धीरुभाई ने किराए के मकान से व्यापार शुरू किया था जिसमे एक टेलीफोन ,एक मेज और तीन कुर्सिय थी | शुरुवात में उन्होंने व्यापार सँभालने के लिए दो सहायक भर्ती किये थे | 1965 में उनके व्यापार के सांझेदार चंपकलाल दमानी ने उनके साथ सांझेदारी खत्म कर दी जिससे सारा व्यापार अब वो अकेले सँभालने लग गये |

रिलायंस बनी देश की बड़ी कम्पनी

1958 और 1965 तक सात सालो के अंदर उन्होंने अपनी कम्पनी को शीर्ष तक पहुचाया | धीरे धीर उनके व्यापार में कई बड़े व्यापारी भी शामिल हो गये थे | साठ के दशक में उन्होंने विस्कोस बेस्ड धागा “चमकी बनाया था जिससे उन्हें खूब शोहरत मिली थी | इसके बाद उन्होंने रिलायंस फैब्रिक को उन्होंने “विमल ” नाम से बाजार में उतारा और बिना किसी विज्ञापन में उन्होंने बाजार में पकड़ बना ली थी | विमल को बाद में ओनली विमल नाम से व्यापार में प्रसिद्धि मिलना शुरू हो गयी थी | 1972-73 तक उनकी बुनाई की लूमो की संख्या 154 हो गयी थी |Dhirubhai Ambani धीरूभाई अम्बानी की बढती लोक्रप्रियता को देखते हुए उन्हें Polyester Prince कहा जाने लगा था | 1960 के दशक में ही उनकी कम्पनी का टर्नओवर 10 लाख पहुच गया था जो 1970 के दशक में बढकर 70 करोड़ हो गया था और उनकी मृत्यु तक उनका साम्राज्य 75000 करोड़ तक पहुच गया था | वर्तमान में उनके बेटो द्वारा चलाई जा रही रिलायंस कम्पनी में लगभग 1 लाख कर्मचारी है जो पुरे देश में अलग अलग जगहों पर फैले हुए है | यही नही रिलायंस कम्पनी केंद्र सरकार को सालाना पुरे देश के टैक्स का 5 प्रतिशत अकेला भरता है |

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