दिवाली 2018 लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहर्त समय और पूजा विधिं

Latest Update News for Deepawali Muhurat and Poooja Time 2018 : Hello Friends Greeting To All Indian Peoples Also Out of Country Peoples All of you Very Very Happy Diwali 2018 To You This Wishes From My Heart. Friends This Year Diwali Pujan Very Best Muhurat Time at Evening 07.30 PM to 09.00 PM. The Pujan Time is Very Important Time For Deepawali And Laxmi Poojan.

1. Diwali Pooja Ka Muhurat & Time दिवाली पूजा का शुभ समय

Hello Lovely Friends We Are Going Update With Best Diwali Schedule For Diwali Pujan Time Laxmi Puja Or Keeping Update To Light Up Your Deepawali.

Deepawali Laxmi Pooja Muhrat Time  : प्रिय दोस्तों,दिवाली पर लक्ष्मी की पूजा का बड़ा ही महत्व होता हैं | सभी लोग अपने अपने घरों में सुख शांति लाने के लिए अपने बिज़नेस में तरकी करने के लिए हर वर्ष दिवाली के दिन लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं Diwali के दिन Diwali laxmi pooja Muhrat के अनुसार होनी चाहिए | उचित मुहर्त में कि गई पूजा से ही उचित फल की प्राप्ति होती हैं | दीपावली पूजन मुहरत का श्रेष्ठ समय, तारीख ,और वार निचे दिए गये हैं ,आप ध्यानपूर्वक Diwali Laxmi Pooja Time और Deepawali Pooja Muhrat  देख ले और उस हिसाब से माता Laxmi Ki Pooja  करे | सही समय और सही मुहर्त में की गई पूजा ही फलदाई होती हैं और पूजा से माता लक्ष्मी खुश होती हैं | दिवालिन के दिन लक्ष्मी की पूजा में परिवार के सभी सदस्यों को शामिल होना चाहिए ,क्योंकि साल में एक ही दिन आता हैं जिस दिन लक्ष्मी की पूजा होती हैं | इसलिए पूरे परिवार को एक साथ बैठकर पूजा करनी चाहिए और माँ लक्ष्मी Pooja के मन्त्रो का उचारण करना चाहिए |

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07 November 2018 बुधवार को हैं दीपावली 

2. दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ समय | Diwali Pooja Best Time

प्रात:
प्रातःकाल मुहूर्त (लाभ, अमृत) = 16:41 से 09:23
प्रातःकाल (शुभ) = 10:44 से 12:05

रात्रि- 07.30 से 09.00 (लाभ)
रात्रि 10.00 से 12.00 तक।

देर रात्रि पूजन करने वालों के लिए
रात्रि 12.00 से 01.30 तक।

लग्न अनुसार-

  • सुबह 06.44 से 09.01 (वृश्चिक-लग्न),
  • 09.01 से 11.06 (धनु-लग्न),
  • दोपहर 12.54 से 02.26 (कुंभ-लग्न),
  • 17:27 से 20:06 तक (मेष-लग्न),
  • 17:57 से 19:53 तक (वृषभ-लग्न)
  • सिंह लग्न में पूजन का समय है रात्रि 24:28+ से 26:45+ तक।

3. दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त | Diwali Pooja Muhurat Time

  1. लाभ का चौघड़िया : 10:44 से 12:05।
  2. अमृत का चौघड़िया : 14:46 से 17:28।
  3. लाभ का चौघड़िया (सायंकाल) : 19:07 से 21:31।

लग्न मुहूर्त :

  1. कुंभ 1.3 मिनट से 2.26 मिनट
  2. वृषभ : 5.48 मिनट से 7.46 मिनट।
  3. सिंह लग्न : रात्रि 12.15 मिनट से 2.31 मिनट तक।

4. कार्यालयों और दुकानों के लिए दीपावली पूजन का समय :-

1. 14:30 बजे (स्थिर लग्न मीन) के लिए 13.10 बजे तक

2. 17:28 बजे से 20:10 बजे तक

घर के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ समय :

19:30 बजे से 21:36 (स्थिर लग्न वृषभ, प्रदोष काल और लाभ का चौघडि़या)

लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ समय :

  • प्रदोष काल: 17:28 बजे से 20:10 बजे तक
  • पूजा के लिए उत्तम समय (वृश्चिक लगन): 19:30 बजे से 17:35 बजे
  • उत्तम में लाभ का चौघडि़या पूजा समय : 20:36 बजे से 19:02 बजे
  • निशीथ काल जो समय ऊपर याद है, इस समय में कर सकते हैं – 20:10 बजे से 22:52 बजे तक
  • निशीथ काल में शुभ लाभ का चौघडि़या : 23:44 बजे से 22:10 बजे
  • महानिशीथ काल : 25:34 बजे से 22:52 बजे
  • अमृत का चौघडि़या महा निशीथ काल समय: 25:18 बजे से 23:44 बजे

5. Deepawali Pooja Vidhi | दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि 2018

Diwali Pooja Vidi

  1. सर्वप्रथम माँ लक्ष्मी व गणेशजी की प्रतिमाओं को चौकी पर रखें। ध्यान रहें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रहें और लक्ष्मीजी की प्रतिमा गणेशजी के दाहिनी ओर रहें।
  2. कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेट कर उसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक होता है।
  3. एक दीपक को घी और दूसरें को तेल से भर कर और एक दीपक को चौकी के दाईं ओर और दूसरें को लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं के चरणों में रखें।
  4. लक्ष्मी-गणेश के प्रतिमाओं से सुसज्जित चौकी के समक्ष एक और चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। उस लाल वस्त्र पर चावल से नवग्रह बनाएं। साथ ही रोली से स्वास्तिक एवं ॐ का चिह्न भी बनाएं।
  5. पूजा करने हेतु उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे।
  6. तत्पश्चात केवल प्रदोष काल में ही माता लक्ष्मी की पूजा करें। माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान भी अवश्य करें।
  7. लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण करते रहें – “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:”
  8. लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में ही करना चाहिए और यह समय संध्याकाळ के पश्चात आरंभ होगा। हालाँकि इसमें भी स्थिर लग्न में माँ लक्ष्मी की पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है। स्थिर लग्न में पूजन कार्य करने से माँ लक्ष्मी घर में वास करती है। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है।

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