गणगौर पर्व 2018 दिनांक पूजा विधि कथा व राजस्थानी गीत एवं प्रसिद्ध मेले

गणगौर का त्यौहार Gangaur Festival 2018 Date Time Puja Muhurat :  प्रतेक वर्ष चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तीज को मनाया जाता है | गणगौर का त्यौहार Gangaur Festival मुख्यतः राजस्थान,गुजरात,मध्यप्रदेश,पशिमबंगाल में मनाया जाता है | गणगौर Gangaur Festival के दिन कंवारी लड़किया और नवविवाहित महिलाये भगवान शिव (ईशरजी) की और पार्वती (गौरी) की पूजा Puja करती है | पूजा के समय महिलाये शिवजी Shivji गौरी Gouri को दूब से पानी के छीटे लगाकर गीत गाती है |

Gangour

Gangaur गणगौर Festival त्यौहार Date Time 2018

हिन्दुओ का प्रमुख त्यौहार गणगौर जो वर्ष 2018 में दिनांक 20 मार्च 2018 को राजस्थान ,गुजरात ,मध्यप्रदेश में बड़े धूम धाम से मनाया जायेगा |

क्यों करती है कुंवारी लड़किया गणगौर की पूजा

गणगौर भगवान शंकर का रूप ( ईशर ) और पार्वती (गणगौर) की पूजा की जाती है |कहा जाता है की पार्वती ने शंकर भगवान को पाने के लिए व्रत और गहन तपस्या की थी | भगवान शंकर पार्वती की इस तपस्या से खुश होकर उन्हें वरदान मांगने को कहा | पार्वती ने उन्हें अपने वर के रूप में मांग लिया | इस तरह पार्वती की मनोकामना पूर्ण हो गई और दोनों की शादी हो गई | इस दिन के बाद कुंवारी लड़कियां मन इच्छित वर पाने के लिए ईशर और गणगौर की पूजा करती है |

सुहागिन स्त्रियाँ अपने पती की दीर्घ आयु के लिए पूजा करती है | गणगौर पूजा की चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया से प्रारंभ होती है | गणगौर पूजा की पूजा सोलह दिन तक चलती है | कुंवारी लड़किया और सुहागिन स्त्रियाँ सुबह जल्दी उठ कर बगीचे में जाती है दूब व फूल लेकर आती है | उस दूब से दूध के छींटे मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देती है | थाली में दही पानी सुपारी और चांदी का छल्ला आदी सामग्री से गणगौर माता की पूजा की जाती है |

गणगौर माता की पूजा विधि

गणगौर माता की पूजा विधि : गणगौर माता की पूजा 16 दिन तक की जाती है | गणगौर की पूजा दूब से की जाती है सुबह जल्दी उठकर लडकिया दूब लाती है | एक थाली में दही पानी सुपारी और चांदी का छल्ला आदी सामग्री लेती है और मिट्टी की बनी गणगौर को दूब से छीटे लगाती है | इसके बाद 8वे दिन ईशरजी अपनी पत्नी गणगौर के साथ अपने ससुराल जाते है | इस दिन लड़किया कुम्हार से मिट्टी की बनी झाँवली एवं गणगौर की मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी लाती है | उसी मिट्टी से ईशर जी ,गणगौर , मालन, छोटी मूर्तिया बनाती है | जिस स्थान पर पूजा की जाती उस स्थान को गणगौर का पीहर कहा जाता है और जहा मूर्तियों को विसर्जित किया जाता है उस स्थान ससुराल कहा जाता है |

गणगौर की विदाई का दिन

चैत्र मास की तीज को गणगौर माता को चूरमे का भोग लगाया जाता है | शाम के समय गणगौर को ससुराल से विदाई दी जाती है | या विसर्जन किया जाता है | गणगौर के विसर्जन का स्थान कुआ,जोहड़ या तालाब होता है | शादी शुदा स्त्री अगर इस व्रत करती है और इस व्रत का उधापन करती है उधापन करने के बाद सोलह सुहागन स्त्री को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं भेट देकर भोजन करवाती है |

गणगौर की पूजा के राजस्थानी गीत

गणगौर की पूजा में गाये जाने वाले लोकगीत इस अनूठे पर्व की शान हैं। इस पर्व में गवरजा और ईसर की बड़ी बहन और जीजाजी के रूप में गीतों के माध्यम से पूजा की जाती है तथा उन गीतों के बाद अपने परिजनों के नाम गीतों में लिए जाते हैं। राजस्थान के कई प्रदेशों में गणगौर पूजन आवश्यक वैवाहिक रस्म के रूप में भी प्रचलित है | गणगौर पूजते समय का गीत जो निम्न प्रकार से है |

गोर रे, गणगौर माता खोल ये , किवाड़ी
बाहर उबी थारी पूजन वाली,
पूजो ये, पुजारन माता कायर मांगू
अन्न मांगू धन मांगू , लाज मांगू लक्ष्मी मांगू
राई सी भोजाई मंगू .
कान कुवर सो, बीरो मांगू इतनो परिवार मांगू ..

सोलह बार गणगौर को पूजने का गीत

गौर-गौर गणपति ईसर पूजे, पार्वती
पार्वती का आला टीला, गोर का सोना का टीला .
टीला दे, टमका दे, राजा रानी बरत करे .
करता करता, आस आयो मास
आयो, खेरे खांडे लाडू लायो,
लाडू ले बीरा ने दियो, बीरों ले गटकायों .
साडी मे सिंगोड़ा, बाड़ी मे बिजोरा,
सान मान सोला, ईसर गोरजा .
दोनों को जोड़ा ,रानी पूजे राज मे,
दोनों का सुहाग मे .
रानी को राज घटतो जाय, म्हारों सुहाग बढ़तों जाय
किडी किडी किडो दे,
किडी थारी जात दे,
जात पड़ी गुजरात दे,
गुजरात थारो पानी आयो,
दे दे खंबा पानी आयो,
आखा फूल कमल की डाली,
मालीजी दुब दो, दुब की डाल दो
डाल की किरण, दो किरण मन्जे
एक,दो,तीन,चार,पांच,छ:,सात,आठ,नौ,दस,ग्यारह,बारह,
तेरह, चौदह,पंद्रह,सोलह |

पाटा धोने का गीत

पाटो धोय पाटो धोय, बीरा की बहन पाटो धो,
पाटो ऊपर पीलो पान, म्हे जास्या बीरा की जान .
जान जास्या, पान जास्या, बीरा ने परवान जास्या
अली गली मे, साप जाये, भाभी तेरो बाप जाये .
अली गली गाय जाये, भाभी तेरी माय जाये .
दूध मे डोरों , म्हारों भाई गोरो
खाट पे खाजा , म्हारों भाई राजा
थाली मे जीरा म्हारों भाई हीरा
थाली मे है, पताशा बीरा करे तमाशा
ओखली मे धानी छोरिया की सासु कानी
ओडो खोडो का गीत
ओडो छे खोडो छे घुघराए , रानियारे माथे मोर .
ईसरदास जी, गोरा छे घुघराए रानियारे माथे मोर
(इसी तरह अपने घर वालो के नाम लेना है )

गणगौर माता की कथा Gangaur mata Katha

एक बार राजा ने जो-चना बोया और माली ने दूब लगाईं परन्तु राजा के जो चने बढ़ते ही जारहे थे | और माली की दूब घटती जा रही थी | एक दिन माली अपनी हरी भरी दूब में कम्बल ओठ के सो गया | तभी लड़किया आई और दूब तोडके ले जाने लगी | तब माले ने उनका हार और डोरा लेने लगा | लड़किया बोली आप क्यों हमारा हार डोरा लेना चाहता है | सोलह दिन गणगौर के पूरे हो जायेंगे तो हम आपको पुजापा दे जायेंगे | जब सोलह दिन पूरे हुए तो लड़किया पुजापा देने आई और उसकी माँ से कहा तुम्हारा लड़का कहा है | माँ बोली वो तो गाया चराने गया है | तो लडकियों ने कहा यह पुजापा कहा रखे तो माँ ने कहा हमारी अलमारी में रख दो | थोड़ी देर बाद माँ का लड़का आया और बोला लड़किया आई थी और पुजापा लाई थी | माँ ने कहा लाई थी और अलमारी में रखा है |बेटे ने अलमारी के दो तीन लात मारी अलमारी नहीं खुली तब उसने माँ को आवाज़ लगाई और कहा माँ अलमारी नहीं खुली माँ ने कहा जब तेरे से अलमारी न खुले खुले तो पराई जाई कैसे रुकेगी | उसके बाद माँ ने अपनी आँख से काजल ,मांग से सिंदूर और चिटली अंगुली से महेंदी निकली और अलमारी के छीटा लगाया तो अलमारी खुल गई | उस अलमारी में ईश्वर गणगौर बैठे थे | सभी चीजो के भंडार भरे पड़े थे | जिस तरह से गणगौर माता ने माली के बेटे को दिया उसी तरह से सबको देना कहता न सुनता न |

राजस्थान में गणगौर के भरने वाले प्रसिद्ध मेले

राजस्थान में जयपुर की गणगौर का मेला बहुत प्रसिद्ध है | सबसे ज्यादा प्रसिद्ध मेला जयपुर की गणगौर और कोटा की गणगौर इसके अलावा नाथद्वारा का गणगौर,जोधपुर में लोटियों का गणगौर मेला ,बीकानेर की गणगौर का मेला भी राजस्थान में पसिद्ध मेले है |

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