अनंत चौदस पूजा विधि 2017 गणेश चतुर्थी व्रत शुभ मुहर्त और गणपति विसर्जन

गणेश चतुर्थी 2017 : हिन्दुओं के सभी देवी देवताओं मैं गणेशजी का प्रमुख स्थान हैं | हम कोई भी शुभ कार्य करते हैं ,चाहे वो शादी का मुहर्त हो ,मकान का मुहर्त हो या दुकान का मुहर्त हो या हम अपने घर या रिश्तेदारी मैं कोई शुभ कार्य करते हैं तो सबसे पहले श्री गणेश वन्दना करते हैं अथार्थ सबसे पहले गणेशजी की पूजा की जाती हैं | इसलिय देवताओं मैं गणेशजी को सर्वमान्य स्थान दिया गया हैं | गणेश चतुर्थी पर विधन्हारता, विध्न्विनाशक, मंगल मूर्ति आदि नामों से प्रसिद्ध गणेश भगवान की पूजा सिर्फ घरों में ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक राष्ट्रीय पर्व की तरह की जाती है। गणेश चतुर्थी सबसे ज्यादा महाराष्ट्र मैं बड़े ही जोर सोर से मनाई जाती हैं | भादो के महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती हैं, और विनायक चतुर्थी हर महीने मनाई जाती है | इस दिन से दस दिनों तक गणेश पूजा की जाती हैं, गणेश चतुर्थी का  महत्व देश के महाराष्ट्र राज्य में अधिक देखा जाता हैं | महाराष्ट्र में गणेश जी का एक विशेष स्थान होता हैं | वहाँ पुरे रीती रिवाजों के साथ गणेश जी की स्थापना की जाती हैं उनका पूजन किया जाता हैं पूरा देश गणेश उत्सव मनाता हैं गणेश चतुर्थी 25 अगस्त 2017 को मनाई जाएगी

ganesh chturthi 2017

गणेश चतुर्थी शुभ मुहर्त समय :

मध्याह्न गणेश पूजा का समय = 10:22 से 12:54
अवधि = 2 घण्टे 31 मिनट
25 अगस्त को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय = 08:23 से 20:36
अवधि = 12 घण्टे 13 मिनट

गणेश चतुर्थी 2017 पूजा विधि

भाद्रपद की गणेश चतुर्थी में सर्वप्रथम पचांग में मुहूर्त देख कर गणेश जी की स्थापना की जाती हैं | सबसे पहले एक ईशान कोण में स्वच्छ जगह पर रंगोली डाली जाती हैं, जिसे चौक पुरना कहते हैं|उसके उपर पाटा अथवा चौकी रख कर उस पर लाल अथवा पीला कपड़ा बिछाते हैं,उस कपड़े पर केले के पत्ते को रख कर उस पर मूर्ति की स्थापना की जाती हैं | इसके साथ एक पान पर सवा रूपये रख पूजा की सुपारी रखी जाती हैं कलश भी रखा जाता हैं एक लोटे पर नारियल को रख कर उस लौटे के मुख कर लाल धागा बांधा जाता हैं. यह कलश पुरे दस दिन तक ऐसे ही रखा जाता हैं | दसवे दिन इस पर रखे नारियल को फोड़ कर प्रशाद खाया जाता हैं | सबसे पहले कलश की पूजा की जाती हैं जिसमे जल, कुमकुम, चावल चढ़ा कर पुष्प अर्पित किये जाते हैं | कलश के बाद गणेश देवता की पूजा की जाती हैं. उन्हें भी जल चढ़ाकर वस्त्र पहनाए जाते हैं फिर कुमकुम एवम चावल चढ़ाकर पुष्प समर्पित किये जाते हैं गणेश जी को मुख्य रूप से दूब चढ़ायी जाती हैं इसके बाद भोग लगाया जाता हैं | गणेश जी को मोदक प्रिय होते हैं फिर सभी परिवार जनो के साथ आरती की जाती हैं | इसके बाद प्रशाद वितरित किया जाता हैं |

गणेश चतुर्थी की कथा

ganesh chturthi story

शिव-पार्वती के पुत्र गणेश जन्म की कथा वर्णन से पता चलता है की गणेश का जन्म न होकर निर्माण बल्कि पार्वती जी की शरीर के मैल से हुआ था। स्नान पूर्व गणेश को अपने रक्षक के रूप में बैठा कर वो चली गईं और शिव जी इस बात से अनभिज्ञ थे। पार्वती से मिलने में गणेश को अपना विरोधी मानकर उनका सिर काटकर अपने रास्ते से हटा दिया | जब वास्तविकता का ज्ञान हुआ तो अपने गणो को उन्होंने आदेश दिया की उस पुत्र का सिर लाओ जिसके ओर उसकी माता की पीठ हो। शिव-गणो को एक हाथी का पुत्र जब इस दशा में मिला तो वो उसका सिर ही ले आए और शिव जी ने हाथी का सिर उस बालक के सिर पर लगाकर बालक को पुनर्जीवित कर दिया। यह घटना भाद्रमास मास की चतुर्थी को हुई थी इसलिए इसी को गणेश जी का जन्म मानकर इस तिथि को गणेश चतुर्थी माना जाता है। सबसे अलग शरीर होने के कारण सभी देवताओं ने गणेश को सभी देवताओं का अग्र्ज़ बना दिया और तब से गणेश वंदना हर पूजा से पहले करी जाती है।

गणेश चतुर्थी क्यूँ मनाई जाती हैं ?

सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने वाला एकमात्र उत्सव, गणेश चतुर्थी, राष्ट्रीय एकता का जीता जागता प्रतीक है। इतिहास उठा कर देखें तो पता चलता है की गणेश चतुर्थी का पूजन चालुक्य सातवाहन और राशट्रूक्ता शासनकाल से यह पूजन चलता आ रहा है। स्पष्ट विवरण तो छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल से मिलता है जब उन्होंने राष्ट्रीय संस्कृति और एकता को बढ़ावा देने के लिए गणेश वंदना का पूजन शुरू किया था। उसी दिन से महाराष्ट्र के हर घर मैं गणेश चतुर्थी बड़ी ही धूम धाम से मनाई जाती हैं |

भगवान गणेश वन्दना का मंत्र

“ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।”

भगवान गणेश जी की आरती

ganeshji ki pooja

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदन्त दयावन्त चार भुजाधारी,

माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।

(माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी)

पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,

(हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा),

लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

अँन्धे को आँख देत कोढ़िन को काया

बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया।

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

(दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी )

(कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी)॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

अनंत चौदस 2017

anant chturdashi 2017

अपने भक्तों की संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्र बंधन का त्यौहार अनंत चतुर्दशी भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चौदस तिथि को मनाया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी का पर्व 05 सितंबर 2017 को मनाया जाएगा।

अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त

इस साल अनंत चतुदर्शी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:04 से लेकर दोपहर 12:41 तक चलेगा।

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा

खा जाता हैं की पांडव राजपाट हार कर जब जंगल में भटक रहे थे और कई प्रकार के कष्टों को झेल रहे थे तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी और उसी व्रत के प्रभाव से पांडव सभी कष्टों से मुक्त हुए और महाभारत के युद्ध में उन्हें विजयी की प्राप्ति हुई थी। अनंत चतुर्दशी का व्रत किया जाता हैं और इसकी खानी सुनी जाती हैं |

अनंत चतुर्दशी व्रत विधि

इस दिन व्रत करने वाले को प्रातः काल स्नान कर कलश की स्थापना कर कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करना चाहिए और फिर शास्त्रानुसार भगवान अनंत के साथ- साथ भगवान विष्णु और गजानन गणेश जी का मन्त्रो का उचारण करना चाहिए ।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.