Guru Nanak Wikipedia Biography Jivani Life History In Hindi Gurunank Dev Ji Ke Updesh गुरु नानक देव जी के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य व उपदेश

Guru Nanak Biography Wikipedia In Hindi Guru Nanak Jivani / Jivan Kahani Life History Guru Nanak Teachings in Hindi : गुरु नानक देव जी को सिख धर्म के प्रथम गुरु माने जाते है | इनका जन्म 1469 कार्तिक पूर्णिमा को तलवंडी नाम गाँव में हुआ था | नानक जी को विवाह के 16 वर्ष पश्चात् पुत्र प्राप्ति का सुख मिला | आज हम आपको यहाँ गुरुनानक देव जी के जीवन से जुडी कहानी जीवनी व कुछ रोचक तथ्य बताएँगे |

यहाँ गुरुनानक की जन्म दिनांक Guru Nanak Birthday गुरु नानक के माता-पिता का नाम व जीवनी Guru Nanak Mother & Father Name Life history Jivani गुरु नानक का विवाह कब व किसके साथ हुआ Guru Nanak Ka Vivah Kab or Kisake Sath Hua गुरु नानक के उपदेश Guru Nanak Dev Ji ke Updesh गुरु नानक के उतराधिकारी का नाम Guru Nanak Ke Utradhikari Ka Naam व गुरु नानक की मृत्यु दिनांक Guru Nanak Death Date आदि की जानकरी हिंदी में बताई गई है | इनके अलावा अगर आपको गुरु नानक देव जी के जीवन से जुडी बाते या तथ्य जानना चाहते है तो आप अपना प्रश्न कमेंट करे |

Biography of Guru Nanak गुरु नानक देव जी की जीवनी

Guru Nanak Dev Ji Di Jivani Life Story Guru Nanak Ke Updesh in Hindi : अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी गुरु नानक देवजी सिखों के पहले गुरु थे | गुरुनानक देव जी का जन्म (Guru Nanak Dev Ji Ki Date of Birth) कार्तिक पूर्णिमा, संवत् १५२७ अथवा 15 अप्रैल 1469 को पंजाब (पाकिस्तान) क्षेत्र में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नाम गांव में एक किसान के घर हुआ था | जोकि पाकिस्तान के लाहौर से 30 मील पश्चिम में स्थित है | गुरुनानक देव जी का 16 वर्ष की उम्र में गुरदासपुर जिले के लाखौकी नाम स्‍थान की रहने वाली कन्‍या सुलक्‍खनी से विवाह हुआ | इनके दो पुत्र थे श्रीचंद और लख्मी चंद |

गुरुनानक देवी जी दोनों पुत्रों के जन्म के बाद अपने चार साथी मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े | मुख्यत: भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब में भ्रमण किया | 1521 तक इन्होंने तीन यात्राचक्र पूरे किए और चारों ओर घूमकर उपदेश देने लगे | नानक जी की मृत्यु [ Guru Nanak Death Date ] 22 सितंबर 1539 को हुआ | इन्‍होंने अपनी मृत्यु से पहले अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी बनाया जो बाद में गुरु अंगद देव नाम से जाने गए | सनातन हिन्दू धर्म के लोग गुरुनानक जी के जन्म दिवस को गुरुनानक जयंती { Guru Nanak Jayanti } के रूप में मनाते है | इस वर्ष गुरुनानक जयंती 2020, ( Guru Nanak Jayanti 2020 ) 30 नवम्बर को मनाई जावेगी |

Guru Nanak Biography Wikipedia in English

Guru Nanak Wikipedia Biography Jivan Kahani in English Guru Nanak Dev Ji Ki Jivani In English : Guru Nanak Jayanti is celebrated every year on Kartik Purnima. Mainly: Guru Nanak Jayanti is celebrated as a festival in Punjab. According to Guru Nanak Dev Ji, God is not somewhere outside but inside us. Changes occurred in the society due to the thoughts & teachings of Guru Nanak. Nanak Ji settled a city at Kartarpur (Pakistan) and also built a Dharamshala. Guru Nanak Dev’s father’s name was Lala Kalyan Rai (Mehta Kalu ji), mother’s name was Trupta Devi ji, wife’s name was Sulkhani. He had two sons Srichand and Lakhmi Chand. After the birth of his two sons, Nanak went out on a journey with his companions. And he completed three travel cycles by 1521. Nanak’s forehead had a bright aura since birth. From childhood, he started showing signs of sharp intellect. Guru Nanak Dev Ji is considered the first Guru of Sikhs. Guru Nanak Dev considered idolatry meaningless and always opposed to stereotypes and misconceptions. Seeing the changing society from the teachings of Nanakji, Abraham Lodi even imprisoned him. And when Ibrahim was defeated in the battle of Panipat and the kingdom came into the hands of Babur. Then Guru Nanak was freed from captivity.

Guru Nanak Dev Short Biography in Hindi

गुरु नानक देव जी
जन्म कार्तिक पूर्णिमा, संवत् १५२७ अथवा 15 अप्रैल 1469
राय भोई की तलवंडी, (वर्तमान ननकाना साहिब, पंजाब, पाकिस्तान, पाकिस्तान)
मृत्यु 22 सितंबर 1539 करतारपुर
स्मारक समाधि करतारपुर
पूर्वाधिकारी जन्म से
उत्तराधिकारी गुरु अंगद देव
धार्मिक मान्यता सनातन हिन्दू धर्म (जन्म के समय) सिख धर्म की स्थापना
जीवनसाथी बीबी सुलखनी
माता-पिता लाला कल्याण राय (मेहता कालू जी), माता तृप्ता देवी जी
अंतिम स्थान करतारपुर

Life Story Biography of Guru Nanak गुरुनानक जी का जीवन परिचय जीवन कहानी

Guru Nanak Dev Date of Birth And Place of Birth गुरुनानक देव जी की जन्म दिनांक व जन्म स्थान

Guru Nanak Jayanti In Hindi : गुरु नानक जी का जन्म 1469 संवत् १५२७ में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव में एक खत्रीकुल में हुआ था | कुछ विद्वान इनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल 1469 मानते हैं किंतु प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है जो अक्टूबर-नवंबर में दीवाली के 15 दिन बाद पड़ती है |

Childhood of Guru Nanak गुरु नानक का बचपन

गुरुनानक देव जी बचपन से ही प्रखर बुद्धि वाले व गंभीर प्रवृत्ति के थे | बाल्यकाल में जब उनके अन्य साथी खेल कूद में व्यस्त होते थे तो वह अपने नेत्र बंद कर चिंतन मनन में खो जाते थे | लड़कपन ही से ये सांसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे | नानकजी का पढ़ने – लिखने मन नहीं होने के कारन 7-8 साल की उम्र में ही स्कूल छुट गया था | गुरुनानक जी अपना सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में बिताने लगे | ये देख गुरुनानक देव जी के माता – पिता चिंतित रहने लगे | नानक जी के पिता ने उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए पंडित हरदयाल और मौलवी कुतुबुद्दीन के पास पढ़ने के लिए भेजा लेकिन वे दोनों नानक जी के प्रश्नों पर निरुत्तर हो जाते थे | पंडित हरदयाल और मौलवी कुतुबुद्दीन उनके ज्ञान को देखकर समझ गए कि नानक को स्वयं ईश्वर ने पढ़ाकर संसार में भेजा है | उन्होंने नानक जी को सम्मान पूर्वक घर छोड़ने आ गए | अंत में नानक जी कबीरदास की ‘निर्गुण उपासना’ का प्रचार पंजाब में आरंभ किया | बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर गाँव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे | और वे सिख संप्रदाय के आदिगुरु हुए | इसलिए गुरुनानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु माने जाते है | और इनका जन्म दिवस पर हर वर्ष गुरुनानक जयंती के रूप में मनाते है |

गुरु नानक जी के माता-पिता का नाम व जीवन परिचय

गुरु नानक देव जी के माता का नाम तृप्ता देवी जी और पिता का नाम लाला कल्याण राय (मेहता कालू जी) थे | गुरु नानक जी के पिता पेशे से किसान थे और माता गृहणी थी | विवाह से पहले नानक जी के परिवार में माता-पिता व एक बहन थी | नानक जी की बहन का नाम नानकी था |

गुरु नानक देव जी का विवाह कब व कहाँ हुआ

गुरु नानक जी का बालपन सोलह वर्ष की आयु सन 1485 में गुरदासपुर जिले के अंतर्गत लाखौकी नामक स्थान के रहनेवाले मूला की कन्या सुलक्खनी से हुआ था | उनके दो पुत्र श्रीचन्द और लक्ष्मीचन्द थे | 32 वर्ष की अवस्था में इनके प्रथम पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ और चार वर्ष पश्चात् दूसरे पुत्र लखमीदास का जन्म हुआ | दोनों पुत्रो के जन्म के बाद सन 1507 में नानक जी अपने परिवार का भार अपने श्वसुर पर छोड़कर मरदाना, लहना, बाला और रामदास इन चार साथियों को लेकर तीर्थयात्रा के लिये निकल पडे़ |

गुरु नानक जी का परिवार व गुरु नानक देव जी का चरित्र

गुरु नानक देव जी की सम्पूर्ण जीवन कहानी व चरित्र : नानक जी का परिवार सम्प्पन था उनके परिवार में माता – पिता दो पुत्र व पत्नी थी | गुरु नानक के पिता ने उन्हें कृषि, व्यापार आदि में लगाना चाहते थे लेकिन उनका प्रयास असंभव हुआ | उसके बाद नानक जी के पिता ने उन्हें घोड़ों का व्यापार करने के लिए राशी दी लेकिन नानक जी ने वो राशी साधु सेवा में लगा दी | कुछ समय पश्चात् नानक जी अपने बहनोई के पास सुल्तानपुर चले गये | वहां वे सुल्तानपुर के गवर्नर दौलत खां के यहां मादी रख लिये गये | नानक जी अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करते थे और जो भी आय होती थी उसका ज्यादातर हिस्सा साधुओं और गरीबों की सेवा में लगा देते |

नानक जी अपने दोनों पुत्र के जन्म के बाद 1507 में उन्होंने अपना सब कुछ त्याग मरदाना, लहना, बाला और रामदास इन चार साथियों के साथ तीर्थयात्रा के लिये निकल पडे़ | 1521 तक इन्होंने तीन यात्राचक्र पूरे किए और चारों ओर घूमकर उपदेश देने लगे | गुरुनानक जी ने मुख्यत: भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब में भ्रमण किया | उन्होंने हिंदू धर्म मे फैली कुरीतिओं का सदैव विरोध किया | वे अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी थे | इनके उपदेश का सार यही होता था कि ईश्वर एक है उसकी उपासना हिंदू मुसलमान दोनों के लिये हैं | मूर्तिपुजा, बहुदेवोपासना को ये अनावश्यक कहते थे हिंदु और मुसलमान दोनों पर इनके मत का प्रभाव पड़ता था |

Guru Nanak Death Date गुरु नानक देव जी की मृत्यु

गुरु नानक देव जी शुरू से ही अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी थे | उनके उपदेशो की शिक्षा से समाज में बहुत परिवर्तन हुआ | गुरु नानक देव जी की मृत्यु 22 सितंबर 1539 करतारपुर में हुई | उन्होंने मृत्यु से पहले अपना गुरुगद्दी का भार यानि उत्तराधिकारी अपने शिष्य अंगददेव (बाबा लहना) को सौंप कर स्वयं करतारपुर में ‘ज्योति’ में लीन हो गए |

गुरु नानक जी के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य

परमात्मा ने पिलाया अमृत

सिख ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि गुरु नानक नित्य बेई नदी में स्नान करने जाया करते थे | एक दिन जब नानक जी स्नान करने के पश्चात वन में अन्तर्ध्यान हो गये | उस समय उन्हें परमात्मा का साक्षात्कार हुआ | परमात्मा ने उन्हें अमृत पिलाया और कहा – मैं सदैव तुम्हारे साथ हूं, जो तुम्हारे सम्पर्क में आयेंगे वे भी आनन्दित होंगे | जाओ दान दो, उपासना करो, स्वयं नाम लो और दूसरों से भी नाम स्मरण कराओ | इस घटना के पश्चात वे अपने परिवार का भार अपने श्वसुर को सौंपकर विचरण करने निकल पड़े और धर्म का प्रचार करने लगे | उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेशों की भी यात्राएं कीं और जन सेवा का उपदेश दिया | बाद में वे करतारपुर में बस गये और सन 1521 से 1539 तक वहीं रहे |

गुरु के लंगर की शुरुआत

गुरु नानक देवजी ने जात-पांत को समाप्त करने और सभी को समान दृष्टि से देखने की दिशा में कदम उठाते हुए ‘लंगर’ की प्रथा शुरू की थी | लंगर में सब छोटे-बड़े अमीर-गरीब एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करते हैं | आज भी गुरुद्वारों में उसी लंगर की व्यवस्था / प्रथा चल रही है | गुरुद्वारों में हर समय हर किसी को भोजन उपलब्ध होता है | इसमें सेवा और भक्ति का भाव मुख्य होता है | नानक देवजी का जन्मदिन गुरु पूर्व के रूप में मनाया जाता है तीन दिन पहले से ही प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं। जगह-जगह भक्त लोग पानी और शरबत आदि की व्यवस्था करते हैं। गुरु नानक जी का निधन सन 1539 ई. में हुआ। इन्होंने गुरुगद्दी का भार अपने शिष्य अंगददेव (बाबा लहना) को सौंप दिया और स्वयं करतारपुर में ‘ज्योति’ में लीन हो गए।

गुरु नानक की वाणी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ओत-प्रोत है | उन्होंने अपने अनुयायियों को जीवन की बहुत सी शिक्षाएँ दीं यदि उन्हें अपने जीवन में उतार लिया जाए तो जीवन सचमुच धन्य हो जाता है |

गुरु नानक जी के उपदेश

गुरु नानक जी ने अपने अनुयायियों को उच्च जीवन जीने के उपदेश दिए जो कि सदैव प्रासंगिक बने रहेंगे | गुरु नानक जी की शिक्षा का मूल उधेश्य यही है कि परमात्मा एक, अनन्त, सर्वशक्तिमान और सत्य है | वह सर्वत्र व्याप्त है | मूर्ति-पूजा आदि निरर्थक है | नाम-स्मरण सर्वोपरि तत्त्व है और नाम गुरु के द्वारा ही प्राप्त होता है | गुरु नानक की वाणी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ओत-प्रोत है | उन्होंने अपने अनुयायियों को जीवन की दस शिक्षाएं दीं जो इस प्रकार हैं

  1. ईश्वर एक है |
  2. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो |
  3. ईश्वर सब जगह और प्राणी मात्र में मौजूद है |
  4. ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता |
  5. ईमानदारी से और मेहनत कर के उदरपूर्ति करनी चाहिए |
  6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं |
  7. सदैव प्रसन्न रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा मांगनी चाहिए |
  8. मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से ज़रूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए |
  9. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं |
  10. भोजन शरीर को जि़ंदा रखने के लिए ज़रूरी है पर लोभ-लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है |

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