Guru Purnima 2019 Festival कैसे मनाये गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा 2019 कैसे मनाये गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा 2019 : भारत में हर पर्व को बड़े ही हर्ष और उलाश के साथ मनाते हैं इन्हीं पर्व में से एक हैं गुरु पूर्णिमा इसे भी एक त्यौहार की तरह मनाते हैं गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी होता है. वेद व्यास जी प्रकांड विद्वान थे उन्होंने वेदों की भी रचना की थी इस कारण उन्हें वेद व्यास के नाम से पुकारा जाने लगा. गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता  हूं।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

गुरु पूर्णिमा की रात को क्या होता हैं

भारत जैसे देश में गुरु का स्थान सबसे ऊपर माना जाता हैं हर धर्म में गुरु की पूजा का महत्व होता हैं | हिन्दू, मुस्लमान, सिख और इशाई हर धर्म में गुरु का महत्वपूरण स्थान होता हैं | जिन्होंने गुरु बना रखे हैं वह अपने गुरु के चरणों की पूजा करते हैं और अपने जीवन में ज्ञान के दरवाजे खुलते हैं जिन्होंने गुरु नही बना रखे हैं वह सारी ब्रमांड के गुरु विष्णो भगवान को अपना गुरु बना सकते हैं और गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की आराधना कर सकते हैं | इस दिन बड़े बड़े संत अपनी ज्ञान की गंगा बहाते हैं और अपने शिष्यों के जीवन में अन्धकार को ख़त्म करते हैं | आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है

गुरु पूर्णिमा का महत्त्व क्या

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है। अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है।

गुरु पूर्णिमा के पीछे की कहानी क्या

आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है जैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हों. आषाढ़ की पूर्णिमा को चुनने के पीछे गहरा अर्थ है. अर्थ है कि गुरु तो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह हैं जो पूर्ण प्रकाशमान हैं और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह.  शिष्य सब तरह के हो सकते हैं, जन्मों के अंधेरे को लेकर आ छाए हैं. वे अंधेरे बादल की तरह ही हैं. उसमें भी गुरु चांद की तरह चमक सके, उस अंधेरे से घिरे वातावरण में भी प्रकाश जगा सके, तो ही गुरु पद की श्रेष्ठता है. इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है! इसमें गुरु की तरफ भी इशारा है और शिष्य की तरफ भी. गुरु की भक्ति में कई श्लोक रचे गए हैं जो गुरू की सार्थकता को व्यक्त करने में सहायक होते हैं. गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार संभव हो पाता है और गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं हो पाता.

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