Hariyali Kajli Teej Sindhara 2017 Date Rajasthani festival

तीज का त्योंहार श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को पुरे देश में मनाया जाता हैं और राजस्थान में तीज दो बाद मनायी जाती हैं एक बार श्रावण मास में और दूसरी बार भाद्रपद माह की क्रष्ण पक्ष की तृतीया को जो राज्य के पूर्व क्षेत्र में मनाया जाता हैं | इस त्यौहार के आगमन से त्यौहारों का गणेश होता हैं | गणगोर के बाद में सबसे पहले तीज से ही त्यौहार का आना शुरू होता हैं | तीज को राजस्थान में हरियाली तीज भी कहते हैं | इस दिन महिलाए व्रत रखती हैं और शिव व पार्वती की आराधना करती हैं जिससे अपने पति के लिए दीर्घ आयु मांगती हैं |

तीज का त्यौहार मानसून का पर्व भी माना जाता हैं जब तीज आती हैं उस समय मानसून अपने सक्रिय रूप में आ जाता हैं और चारो और हरियाली छा जाती हैं जिससे इस त्यौहार के आनंद में ज्यादा ख़ुशी हो जाती हैं हिन्दुस्तान की नारी के सौभाग्य की रक्षा करने वाले इस व्रत को सौभाग्यवती स्त्रियां अपने अक्षय सौभाग्य सुहागन और सुख की लालसा हेतु श्रद्धा, लगन और विश्वास के साथ मानती हैं। कुवांरी लड़कियां भी अपने मन के अनुरूप पति प्राप्त करने के लिए इस पवित्र पावन व्रत को श्रद्धा और निष्ठा पूर्वक करती है।

तीज का त्यौहार :

हमारे देश में त्यौहारों का बहुत महत्व मन जाता हैं और इसे श्रद्धा के साथ मनाया जाता हैं | हर पर्व का अलग महत्व मन जाता हैं | तीज का का त्यौहार सावन महीने के मध्य में आता हैं इस त्यौहार के आने से पूर्व ही इंद्र देवता अपनी क्रपा से धरती माता का हरियाली से सृंगार कर देता हैं और चारो और खेतों में फसल लहराती हैं जिससे त्यौहार का आनंद ही कुछ और हो जाता हैं | ऐसा माना जाता है कि “तीज” नाम उस छोटे लाल कीड़े को दर्शाता है जो मानसून के मौसम में जमीन से बाहर आता है। हिन्दू कथाओं के अनुसार इसी दिन देवी पार्वती भगवान शिव के घर गयी थीं। यह पुरुष और स्त्री के रूप में उनके बंधन को दर्शाता है।

तीज के त्यौहार के दिन सभी महिलाए नये वस्त्र गहने धारण करती हैं | वे एक दिन पूर्व महिलाए हाथों पर मेहँदी लगाती हैं और शिव मन्दिर में माता पार्वती और भोले बाबा शिव की पूजा करती हैं कथा सुनने व सुनाए जाने की प्रथा भी हैं इस दिन महिलाए राजस्थानी व तीज त्यौहार से सम्बधित लोक गीत गाए जाते हैं वे पेड़ों से बंधे झूलों पर झूलती हैं। वे उपवास और स्वादिष्ट भोजन के संयोजन का आनंद उठाती हैं। नृत्य एक अन्य पारंपरिक तीज गतिविधि है।

सिंधारा ,सिंजारा

सिंजारा जिसे हम स्थानीय भाषा में सिंधारा भी बोल सकते हैं यह एक ऐसी प्रथा हैं जो तीज त्यौहार के एक दिन पूर्व नव विवाहिता के लिए ससुराल पक्ष वालो की और से मिठाई नए कपड़े कुछ आभूषण कोई भी बड़ा बर्तन पीहर पक्ष में ले जाए जाते और पीहर वाले रात को गीत गए जाते हैं नव विवाहिता उस सिंजारे को अपने आस पास के ढानियो में बाटती हैं | नव विवाहिता के पीहर पक्ष वाले ससुराल को कपड़े व भेंट दी जाती हैं

राजस्थनी तीज लोक गीत

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