हरतालिका तीज 2017 अखण्ड सौभाग्यवती बनने के लिय करें हरतालिका तीज का व्रत

हरतालिका तीज भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती हैं | यह त्यौहार शिव और पार्वती के पुर्नमिलन के उपल्क्ष मैं मनाया जाता हैं कहा जाता हैं की माँ पार्वती भगवान शिव से बहुत प्रेम करती थी और उनको पाने के लिए पार्वती ने 107 जन्म लिए थे अपने कठोर तप के कारण 108वें जन्म में भगवान शिवजी ने पार्वती को अपनी पत्नी के रूप मैं स्वीकार किया था | इसलिए जो महिलाएं इस व्रत को करती हैं माँ पार्वती उनसे खुश होकर उनके पतियों को लम्बी आयु प्रदान करती हैं | इसलिय हरतालिका तीज का त्योंहार मनाया जाता हैं और महिलाएं अपने जीवन साथी की लम्बी उम्र के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं |

कैसे करें हरतालिका तीज व्रत ?

इस व्रत पर सौभाग्यवती स्त्रियां नए लाल वस्त्र पहनकर, मेंहदी लगाकर, सोलह श्रृंगार करती है और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और मां पार्वती जी की पूजा आरम्भ करती है | इस पूजा में शिव-पार्वती की मूर्तियों का विधि के अनुसार पूजन किया जाता है और फिर हरितालिका तीज की कथा को सुना जाता है | माता पार्वती पर सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है भक्तों में मान्यता है कि जो सभी पापों और सांसारिक तापों को हरने वाले हरितालिका व्रत को विधि पूर्वक करता है, उसके सौभाग्य की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं.

हरतालिका तीज व्रत का शुभ मुहूर्त

इस बार हरितालिका तीज का पर्व तृतिया तिथि 24 अगस्त से सुबह 5 बजे से लगेगा इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं और लड़कियां इससे पहले ही सरगी कर लें. पूजा करने का सही मुहूर्त शाम 6 बजकर 04 मिनट से रात 8 बजकर 34 मिनट तक है. इस दौरान की गई पूजा बहुत सारी खुशियां और लाभ जातक को पहुंचायेगी.

हरतालिका तीज की पूजा की विधि और सामग्री

हरितालिका तीज की पूजन सामग्री : गीली मिट्टी या बालू रेत। बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल, अकांव का फूल, मंजरी, जनैव, वस्त्र व सभी प्रकार के फल एंव फूल पत्ते आदि। पार्वती मॉ के लिए सुहाग सामग्री-मेंहदी, चूड़ी, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग आदि। श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, दूध, शहद व गंगाजल पंचामृत के लिए।
हरितालिका तीज की पूजा विधि : हरितालिका तीज के दिन महिलायें निर्जला व्रत रखती है। इस दिन शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूति बनाकर पूजन किया जाता है। घर को स्वच्छ करके तोरण-मंडप आदि सजाया जाता है। एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती व उनकी सखी की आकृति बनायें। तत्पश्चात देवताओं का आवाहन कर षोडशेपचार पूजन करें। इस व्रत का पूजन पूरी रात्रि चलता है। प्रत्येक पहर में भगवान शंकर का पूजन व आरती होती है

हरतालिका तीज व्रतकथा :

hartalik teej

भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरितालिका तीज का त्यौहार शिव और पार्वती के पुर्नमिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती ने 107 जन्म लिए थे कल्याणकारी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए। अंततः मां पार्वती के कठोर तप के कारण उनके 108वें जन्म में भोले बाबा ने पार्वती जी को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। उसी समय से ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मां पार्वती प्रसन्न होकर पतियों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देती है।

हरतालिका तीज का महत्व :

हरतालिका तीज का बड़ा ही महत्व हैं इसका पूजन प्रदोष काल मैं किया जाता है | सोभाग्यवती महिलाये अपने सुहाग की रक्षा करने के लिए और अविवाहित लडकियाँ मन चाहा वर पाने के लिए ये व्रत रखती हैं इसलिय हिन्दू समाज मैं हरतालिका तीज का बड़ा ही महत्व हैं |

अखण्ड सौभाग्यवती बनने के लिय हरतालिका तीज का व्रत करे

सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सुहाग को अखण्ड बनाए रखने और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरितालिका तीज का व्रत करती हैं। सर्वप्रथम इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर के लिए रखा था। इस दिन विशेष रूप से गौरी−शंकर का ही पूजन किया जाता है। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदय से पूर्व ही उठ जाती हैं और नहा धोकर पूरा श्रृंगार करती हैं। पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी−शंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके साथ पार्वती जी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। रात में भजन, कीर्तन करते हुए जागरण कर तीन बार आरती की जाती है और शिव पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है।

Hartalika Teej 2017

Hartalika Teej Vrat is observed during Shukla Paksha Tritiya of Bhadrapada month. On this day, makeshift statues of Lord Shiva and Goddess Parvati are made with the sand and worshipped for marital bliss and progeny.

Hartalika Teej is known by this name due to the legend associated with it. Hartalika word is combination of “Harat” and “Aalika” which means “abduction” and “female friend” respectively. According to the legend of Hartalika Teej, the friend of Goddess Parvati took her to the thick forest so that her father can’t marry her to Lord Vishnu against her wish.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.