हरियाली तीज 2017 पूजा मुहर्त सावन के गीत और तीज पर हरयाणवी लोकगीत

तीज का त्योंहार  : मेहंदी से रचे हाथ, होठों पर लाली, खनकती चूड़ियों से भरे हाथ, लहरिया और चुनरी की रंग साड़ियाँ और माथे पर गोटा पत्ती का स्पेशल बोरला। जाहिर है इस साज श्रृंगार से सजने के बाद Teej Festival के मौके पर हर महिला कोहिनूर हीरे की तरह चमकती नजर आएगी।

तीज पर राजस्थानी लुक में सजी महिलाएं

हरियाली तीज के त्योंहार पर राजस्थान की महिलाए खाश राजस्थानी वेशभूषा में सजती संवरती हैं । गोटा पत्ती के स्पेशल झुमके, बोरला व हार सभी महिलाओं के तन को और अधिक सुंदर बनाते हैं । महिलाएं अपना सोलह श्रंगार करती हैं | इसके बाद शुरू होता हैं मस्ती का सिलसिला,महिलाएं नाचती हैं गीत गाती हैं और मस्ती करती हैं । एक तरफ सावन और Hariyali Teej पर आधारित गीतों पर नृत्य की झंकार तो दूसरी और मजेदार प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं । किसी को चूड़ी से गोला बनाकर उसमें ज्यादा से ज्यादा बिंदी लगानी होती हैं तो किसी को मेहंदी के कोन से हैप्पी तीज लिखना हैं ।

हरियाली तीज गीत

तीज एक ऐसा त्योंहार हैं जिस दिन महिलाओं और नवविवाहित स्त्रियों की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं होता हैं | तीज के दिन नवी नवेली दुल्हन अपनी दोस्तों के साथ खूब आनंद करती हैं |

सावन के प्यारे गीत : प्रकृति की गोद पला लोक जीवन तो प्रकृति के प्रतिपल परिवर्तित नूतन साज-शृंगार को न सिर्फ देखता है, महसूस करता है बल्कि उसके साथ हर क्षण तादातम्य ही रखता है। सावन का महीना वर्षा ऋतु के चरम उत्कर्ष का महीना है। इसलिए लोकगीतों में ऋतुओं के अनुसार उड़ते मनोभावों का बड़ा ही सुन्दर और सजीव वर्णन मिलता है।

सावन के गीत

सावन आया अम्मा मेरी रंग भरा जी,
ए जी कोई आई हैं हरियाली तीज ।।
घर-घर झूला झूलें कामिनी जी ।
बन बन मोर पपीहा बोलता जी,
एजी कोई गावत गीत मल्हार ।। सावन—
कोयल कूकत अम्बुआ की डार पें जी ।
बादल गरजे, चमके बिजली जी,
एजी कोई उठी है घटा घनघोर,

तीज का त्यौहार कौथली और सिंधारा

तीज के त्यौहार पर कौथली और सिंधारा ये ऐसे रिवाज़ हैं जिनका हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। हरियाणवी संस्कृति और रीति रिवाज़ों से अनभिज्ञों के लिये बता दें कि कौथली एक ऐसा रिवाज़ है जिसमें विहाहित कन्याओं को उनकी ससुराल में मायके वालों की तरफ से सावन के फल, सावन की मिठाइयां एवं वस्त्रादि उपहार स्वरुप भेंट किये जाते हैं। जब लड़की नवविहिता होती है तो पहली बार यह उपहार लड़की की ससुराल की ओर से उसके मायके में दिया जाता है इसे सिंधारा कहा जाता है। सावन के महीने में तो यह किसी से भी आप पूछेंगे की और क्या चल रहा है तो उससे यह जवाब अपेक्षित हो सकता है कि हरियाणा में तो आजकल कौथली चल रही है।

तीज पर हरयाणवी लोकगीत

मीठी तो करदे मां कौथली

जाऊंगा बेबे ग देस सावण आया गूंजता

मेरी तो बेबे मौसी घाल दयो

म्हारै सावण गी तीज सावण आया गूंजता

तेरी तो बेबे घाल्या ना सरै

म्हारै है खोदी गो जोर सावण आया गूंजता

कसिया तो फेंकू रै बीरा झाड़ म

चालूंगी आपणल देस सावण आया गूंजता

जौ ए चीणा गो उरै खाणा है

भारी है चाकी का पाट सावण आया गूंजता

तीज का त्यौहार, कथा और पूजन विधि

Haritalika Teej : Haritalika Teej is celebrated during Shukla Paksha Tritiya of Bhadrapada month. Haritalika Teej comes one month after Hariyali Teej and most of the time celebrated one day before Ganesh Chaturthi. During Haritalika Teej women worship Lord Shiva and Goddess Parvati which are made of clay.

Hartalika Teej Puja Vidhi और मुहर्त :

Pratahkal Hartalika Puja Muhurat = 05:20 to 07:51
Duration = 2 Hours 31 Mins
Pradoshkal Hartalika Puja Muhurat = 17:57 to 20:13
Duration = 2 Hours 16 Mins
Tritiya Tithi Begins = 21:02 on 23/Aug/2017
Tritiya Tithi Ends = 20:27 on 24/Aug/2017

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