Krishna Janmashtami 2020 जन्माष्ठमी पर निबन्ध कविता और देखिए कान्हा के जन्म की पूरी कहानी हिंदी में

Krishna Janmashtami 2020 Essay The Hindu Celebrate Janmashtami for the birth of Sri Krishna. The festival usually occurs in August. Moreover the Hindu Celebrate this festival in the Ashtami of Krishna Paksha. Krishna Janmashtami is a Hindu Festival celebrated by the Hindu community in India. We have provided below Short and Long Essay on Krishna Janmashtami in English. These Janmashtami Essay are written effectively, though keeping the language simple to let you better understand the festival and its significance. The all Gays and Students can check Krishna Janmashtami 2020 Essay by 250 words 500 words 1000 words on this web page. We will Provide Krishna Janmashtami 2020 Essay this web portal. Some chose to show their devotion by observing a day long fast, even without water and performing veneration rituals for Sri Krishna in the house.

 Krishna Janmashtami 2020 Essay जन्माष्ठमी पर निबन्ध कविता और देखिए कान्हा के जन्म की पूरी कहानी हिंदी में

श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव है।श्रीकृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। क्योंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। Sri Krishna is considered as the one of the most powerful human incarnations of the Lord Vishnu. He was born around 5,000 years ago in Mathura. The sole objective of Sri Krishna’s birth was to free the Earth from the evilness of demons. He played an important role in Mahabharata and propagated the theory of bhakti and good karma which are narrated deeply in the Bhagwat Geeta.

कान्हा के जन्म की पूरी कहानी : Loard Krishna Born Story

लंबे समय पहले कंस मथुरा का राजा हुआ करता था। वह बहन देवकी के एक चचेरे भाई थे वह अपनी बहन को गहरे दिल से प्यार करता था | और कभी भी उसे उदास नहीं होने देता था।वह अपनी बहन की शादी में शामिल हुआ और आनंद लिया। एक बार जब वह अपनी बहन के ससुराल जा रहा था। तभी उसे आकाश में छिपी आवाज़ से चेतावनी मिली कि कंस, जिस बहन को तुम बहुत प्यार कर रहे हो वह एक दिन तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगी देवकी और वासुदेव का आठवां बच्चा तुझे मार डालेगा।

बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को कारावास

जैसे ही, उसे चेतावनी मिली, उसने अपने सैनिकों को अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को कारागार में रखने के लिए आदेश दिया। उसने मथुरा के सभी लोगों के साथ क्रूरता से बर्ताव करना शुरू कर दिया। उसने घोषणा की कि मैं अपनी बहन के सभी बच्चों को मार दूंगा, उसकी बहन ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया, फिर दूसरा, तीसरा और फिर सातवां जो कि कंस के द्वारा एक-एक करके मारे गए।

अष्टमी को (जन्माष्टमी) देवकी के आठवें बच्चें ने भगवान् क्रष्ण रूप मैं जन्म लिया

बाद में देवकी अपने आठवें बच्चे के साथ गर्भवती हुई अर्थात कृष्ण जी जो कि (भगवान विष्णु का अवतार) थे । भगवान कृष्ण ने द्वापरयुग में मध्य रात्रि में भाद्रपद के क्रष्ण पक्ष महीने में अष्टमी को जन्म लिया । उस दिन से, लोगों ने उसी दिन कृष्णा जन्माष्टमी या कृष्णाष्टमी का त्यौहार मनाना शुरू कर दिया।

कंस से बचाने के लिए क्रष्ण को गोकुल मैं नंद के पास छोड़ा

जब भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर जन्म लिया, एक चमत्कार सा हुआ, जेल के दरवाजे अपने आप खुल गये, रक्षक सो गए और एक छिपी हुई आवाज ने कृष्ण को बचाने के रास्ते के बारे में वासुदेव को बताया। वासुदेव ने कृष्णा को एक छोटी सी टोकरी में ले लिया और अंधेरे में मध्यरात्रि में एक बड़ी नदी से, गोकुल में अपने दोस्त नंद के पास ले गए।

बरसात से बचने के लिए शेषनाग ने की क्रष्ण की रक्षा

उन्होंने एक बरसात की रात को पार किया जहां शेषनाग ने उन्हें मदद की। उन्होंने अपने बेटे को अपने दोस्त (यशोदा और नंद बाबा) की लड़की के साथ बदला और कंस की जेल वापस लौट आये। सभी दरवाजे बंद हो गए और कंस को संदेश भेज दिया गया कि देवकी ने एक लड़की को जन्म दिया था।

क्रष्ण के मामा कंस को मरने की चेतावनी

कंस आया और उस लड़की को पटक कर मारने की कोशिश की, उसी समय वह लड़की कंस के हांथों से अदृश्य हो कर आकाश में अपने असली रूप बिजली कन्या के रूप में प्रकट हुई और उसने चेतावनी दी और कहा – अरे मुर्ख कंस तुम्हारा हत्यारा तो बहुत सुरक्षित जगह पर बढ़ रहा है और जब भी तुम्हारा समय पूरा हो जाएगा, तब वो तुम्हारा वध कर देगा।

क्रष्ण भगवान् विष्णु के आठवें अवतार

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे। यशोदा और नंद के सुरक्षित हाथ में गोकुल में बाल कृष्ण धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। बाद में उन्होंने कंस की सभी क्रूरता को समाप्त कर दिया और कंस की जेल से अपने माता-पिता को मुक्त कर दिया। कृष्ण की विभिन्न शरारती लीलाओं से गोकुलावासी बहुत खुश थे। गोकुल में रहने वाले लोग इस त्योहार को गोकुलाष्टमी के रूप में मनाते हैं। और सम्पूर्ण भारत मैं जन्माष्टमी बड़ी धूम धाम से मनाई जाती हैं |

क्रष्ण जन्माष्टमी पर कविता : Hindi Kavita on Krishna Janmashtami

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

रात अँधेरी अष्टमी।
महीना था वो भादो।

नन्द भी नाचे और नाची थी मैया।

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

माखन चोर कहाये तुम।
खुद भी खाया – सबको खिलाया।

पी गए थे तुम दहिया।

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

गोपी संग में रास रचाया।
राधा संग त्योहार मनाया।

वृन्दावन के अमर नचैया।

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

उस रास रंग में वृन्दावन के
क्यों न तब हमको भी मिलाया।

हम भी बनते रास रचैया।

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

छोड़ के पीछे सबको तुमने।
त्याग उदाहरण पेश किया।

वापस आओ धूम मचैया।

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

पाप बढ़े थे कंसराज में
बढ़ रही थी बुराइयाँ।

खुशियां बांटी कंस वधैया।

आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।
आ भी जाओ कृष्ण कन्हैया।

जन्माष्टमी पर निबन्ध : Essay on Janmashtami in Hindi

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हिन्दुओं के महापुरुष भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म दिवस भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है । कृष्ण के भक्त उनका जन्म दिवस सहस्त्रों वर्षों से मनाते आ रहे हैं ।आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व कृष्ण का जन्म हुआ था । मथुरा में कंस नामक राजा राज्य करता था । उसकी प्राणों से प्रिय एक बहन देवकी थी । देवकी का विवाह कंस के मित्र वसुदेव के साथ हुआ । अपनी बहन का रथ हांककर वह स्वयं अपनी बहन को ससुराल छोड़ने जा रहा था ।तभी अकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र उसका काल होगा । इतना सुनते ही उसने रथ को वापिस मोड़ लिया तथा देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया । एक-एक करके उसने देवकी की सात सन्तानों की हत्या कर डाली ।
धरती को कंस जैसे पापी के पापों के भार से मुक्त करने के लिए श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की गहन अन्धेरी रात में हुआ । कारागार के द्वार स्वत: खुल गए । वसुदेव ने मौके का फायदा उठाया और उसे अपने मित्र नन्द के यहाँ छोड़ आए ।कंस को किसी तरह उसके जीवित होने का संदेश मिल गया । उसने श्रीकृष्ण को मारने के अनेक असफल प्रयास किए और स्वयं काल का ग्रास बन गया । बाद में श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता को मुक्त कराया ।

जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल लोग अपने घरों को साफ करके मन्दिरों में धूप और दीये जलाते हैं । इस दिन लोग उपवास भी रखते हैं । मन्दिरों में सुबह से ही कीर्तन, पूजा पाठ, यज्ञ, वेदपाठ, कृष्ण लीला आदि प्रारम्भ होते हैं ।जो अर्द्धरात्रि तक चलते हैं । ठीक 12 बजे चन्द्रमा के दर्शन साथ ही मन्दिर शंख और घड़ियाल की ध्वनि से गूंज उठता हैं, आरती के बाद लोगों में प्रसाद बांटा जाता है । लोग उस प्रसाद को खाकर अपना व्रत तोड़तें है और अपने घर आकर भोजन इत्यादि करते हैं ।

शीर्षक : इस गध्यांस से हमे ये शिक्षा मिलती हैं कि इंसान को कभी भी अपने उपर घमंड नहीं करना चाहिए ,क्योकि धरती पर जो जन्म लेगा वो कितना भी बलशाली हो उसका मरना निश्चित हैं |

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